Mirai Movie Review: तेजा सज्जा ने एक बार फिर पर्दे पर बिखेरा अपना जादू,कानों में गूंज उठा 'जय श्री राम'

Mirai Movie Review: साउथ के फेमस हीरो तेजा सज्जा ने अपनी माइथोलॉजिकल फैंटेसी थ्रिलर फिल्म हनुमान से लोगों को चौंकाया था और अब एक बार फिर से वो लोगों का दिल जीतने के 'मिराई' में नजर आ रहे हैं। क्या एक बार फिर तेजा सज्जा सिनेमाघरों में अपना जादू चला पाएंगे या नहीं, आपको ये फिल्म देखनी चाहिए या नहीं आइए इस रिव्यू में जानते हैं।
क्या है कहानी
मिराई की कहानी शुरू होता है कलिंग के राजा अशोक से, जो एक चक्रवर्ती सम्राट है। जब सम्राट अशोक को एहसास होता है कि उसे युद्ध नहीं लड़ना तो वो अपनी शक्तियों को नौ ग्रंथों में बांट देता है और नौ अलग-अलग देशों के योद्धाओं को दे देता है। यही योद्धा सालों से इन ग्रंथों की रक्षा करते आ रहे हैं। लेकिन अब एक काली शक्तियों पर अपनी विजय हासिल कर चुका महाबीर लामा (मनोज मांचू) इन नौ ग्रंथों को हासिल करना चाहता है क्योंकि वो भगवान बनना चाहता है। जिसे रोकने के जिम्मा अंबिका (श्रिया सरन) नाम की योगिनी लेती है, जिसके पास कई शक्तियां हैं। लेकिन उसे लामा को रोकने के लिए अपने बच्चे का त्याग करना पड़ेगा और वो दुनिया की रक्षा के लिए अपने बेटे को त्याग देती है।
अब ये लड़का वेदा(तेजा सज्जा) धीरे-धीरे बड़ा होता है और एक जगह से दूसरी जगह जाता है, वहीं लामा समय के साथ और शक्तिशाली होता जाता है। उसने आठ महाग्रंथ हासिल कर लिए हैं और अब वो नौंवे महाग्रंथ की ओर बढ़ता है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी वेदा पर है, जो काफी मामलों में लामा से कम है। तो क्या वेदा इस दुनिया को लामा के कहर से बचा पाएगा? या लामा अमरत्व हासिल करके खुद को भगवान बना देगा? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
कैसी है फिल्म
फिल्म में माइथोलॉजी, साइंस फिक्शन, एक्शन, कॉमेडी... आपको सब देखने को मिलने वाला है। फिल्म का फर्स्ट हाफ अच्छा है... लेकिन कई जगहों पर आपको कहानी इधर-उधर दौड़ती नजर आएगी। फर्स्ट हाफ में आपको लगेगा कि कई चीजें स्किप हो गई हैं। लेकिन ये बात तो तय है कि आप बोर नहीं होंगे और अगर आपको फिल्म का फर्स्ट हाफ पसंद आएगा तो यकीन मानिए फिल्म का सैकेंड हाफ आपको और लुभाने वाला है। फिल्म के सैकेंड हाफ में ऐसे कई पल आएंगे जब आपके रोंगटे खड़े होंगे। तेजा सज्जा का बार-बार उठकर खड़े होना और युद्ध के लिए तैयार होना आपको प्रेरित करेगा।
कुछ हद तक ये फिल्म आपको 'ब्रह्मास्त्र' और 'हनुमान' की याद दिलाएगी। जिस तरह से तेजा सज्जा की पिछली फिल्म 'हनुमान' से आपको प्रभु हनुमान के प्रति प्रीति का अनुभव हुआ था, इस फिल्म में आपको प्रभु श्री राम के प्रति प्रीति का एहसास होगा। ये फिल्म जब खत्म होगी तो आपकी जुबान पर एक ही नाम होगा-'जय श्री राम'।
ये फिल्म आपके मन में राम भक्ति को भर देगी, ये एक मास अपीलिंग फिल्म है, जिसे हर वर्ग के लोग पसंद कर सकते हैं। इस फिल्म में बहुत से संदेश छिपे हैं- जैसे बड़े उद्देश्य के लिए त्याग जरूरी है।
कैसी है एक्टिंग
इस फिल्म में लगभग सभी किरदारों ने अच्छा काम किया है। हालांकि, तेजा सज्जा को देखकर ऐसा लगा कि वो 'हनुमान' से उठकर 'मिराई' में आ गए हों। लेकिन गलती उनकी नहीं है... उनका कैरेक्टर ही कुछ ऐसा गढ़ा हुआ है। इस फिल्म श्रिया सरन का रोल छोटा है लेकिन काफी ज्यादा प्रभावशाली और एक अहम किरदार का एहसास देता है। श्रिया के इमोशनल सीन दिल को छू जाते हैं और फिल्म में दिखाई गई उनकी दृढ़ता आपको इंप्रेस कर सकती है। फिल्म में जगपति बाबू का रोल भी काफी छोटा है लेकिन जगपति बाबू से ज्यादा इंप्रेसिव रोल आपको श्रिया लगेंगी। फिल्म में रितिका नायक का काम भी ठीक-ठाक है। वो फिल्म में एक फ्रेशनेस लेकर आती हैं।
फाइनल रिव्यू
इस फिल्म का पार्ट और भी अच्छा हो सकता था। कहानी भी अच्छी थी, लेकिन कहानी में वो साउथ सिनेमा का टच साफ नजर आता है। हालांकि, सैकेंड हाफ फिल्म काफी बेहतरीन था। कुल मिलाकर अगर आपको माइथोलॉजिकल फिल्में पसंद हैं तो आप ये फिल्म देख सकते हैं और इस फिल्म को देखने का असली मजा थिएटर में ही है। फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से इस फिल्म को मिलते हैं 3.5 स्टार।


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