फैमिली ड्रामा है 'मिले ना मिले हम'

निर्देशक : अनुज सक्सेना
तकनीकी टीम : तनवीर खान,जावेद अख्तर,साजिद-वाजिद
रेटिंग : 2/5
'मिले ना मिले हम' लोक जन शक्ति पार्टी के अध्यक्ष और राज्य सभा सांसद रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान की पहली फिल्म है। यह एक परिवार की कहानी है इसमें चिराग के साथ तीन तीन हिरोइनें है फिर भी फिल्म में रोमांस की जगह फैमिली ड्रामा ही दिखती है। चिराग अपने माता-पिता के इगो के बीच फंसा हुआ है। दोनों के झगड़ों के चलते चिराग अपनी पहचान ही नहीं बना पाता।
'मिले ना मिले हम' की कहानी पूरी तरह से चिराग पासवान को पर ही बनी है। पूरी फिल्म के दौरान चिराग अपने अलग हुए मां बाप को मिलाने की कोशिश में लगे रहते हैं। चिराग जब छोटा था तब ही उसकी मां शालिनी यानि पूनम ढिल्लन और पिता सिद्धार्थ यानि कबीर बेदी एक दूसरे से अलग हो चुके हैं। बड़े होने पर चिराग की एक ही ख्वाहिश रहती है कि वो किसी भी तरह अपने माता पिता को एक कर दे। सिद्धार्थ एक बिसनेस मैन है तो शालिनी भी बिजनेस देखती है। चिराग एक एक महीना अपने माता पिता के पास रहता है। शालिनी चिराग की शादी कामिया, सागारिका से कराना चाहती है तो सिद्धार्थ चिराग की शादी अपने दोस्त की बेटी मनजीत, नीरू बावजा से कराना चाहते हैं।
लेकिन सिद्धार्थ दोनों में से किसी से शादी नहीं करना चाहता है और अपने माता पिता से झूठ बोलता है कि वो किसी और को पसंद करता है और एक विज्ञापन में दिख रही मॉ़डल को ही अपनी गर्लफ्रेंड बता देता है। ये मॉडल अनुश्का, कंगना रणाउत होती है। अनुष्का चिराग को जानती तक नहीं है। चिराग अनुष्का से एक ऐसी डील करता है कि जिसे अनुष्का मना नहीं कर पाती है। बाद में जब चिराग के माता पिता अनुष्का से चिराग को भूलने का दवाब डालते हैं और यही से फिल्म की कहानी में असली ट्वीस्ट आता है।
फिल्म कहानी धीरे धीरे ही आगे बढ़ती है। फैमिली ड्रामा है लेकिन रोना-धोना नहीं है। फिल्म ज्यादा अलग हुए माता पिता को मिलाने की कोशिश में जुटे एक बेटे पर फोकस किया गया है।
कंगना अपने रोल को कुछ हद तक निभा पाई हैं। चिराग पासवान की ये पहली फिल्म है। उस हिसाब से एक्टींग ठीक है लेकिन उन्हें जमने में काफी समय लगेगा। फिल्म में सागरिका गहते और नीरू बावजा ने भी ठीक ठाक काम किया है।
कुल मिलाकर कह सकते हैं कि मिले न मिले हम एक एवरेज फिल्म ही है।


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