सोनू सूद के लिए 'मैक्सिमम' नसीरुद्दीन के लिए मिनिमम: फिल्म रिव्यू

एक्टर - सोनू सूद, नसीरुद्दीन शा्ह, नेहा धूपिया, विनय पाठक, हेजल कीच
प्रोड्यूसर - कबीर कौशिक
डिरेक्टर - कबीर कौशिक
म्यूजिक - अमजद नदीम, देवी श्री प्रसाद
सेंसर सर्टिफ़िकेट - A
"पुलिस के धंधे में बने रहने के दो ही तरीके हैं या तो टॉप पे रहो या चुप रहो।" सोनू सूद का ये डॉयलॉग मैक्सिमम फिल्म की कहानी का आधार है। इस फिल्म की कहानी 2003 में पुलिस द्वारा लगातार एनकाउंटर करने वाले दो पुलिस ऑफिसरों की जिंदगी पर आधारित है। सोनू सूद और नसीरुद्दीन शाह ने इस फिल्म में दो एनकाउंटर स्पेशिलिस्ट का किरदार निभाया है। फिल्म में सोनू सूद का किरदार काफी मजबूती से बुना गया है। नसीरुद्दीन शाह के किरदार को ज्यादा तवज्जो नहीं मिली है।
सन् 2003 में मुम्बई पुलिस के दो ऑफिसर प्रदीप शर्मा और विजय सालस्कर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट थे और ज्यादा से ज्यादा अंडरवर्ल्ड के आतंकियों को मार गिराने के लिए प्रसिद्ध थे। दोनों के बीच नंबर गेम चलता था यानि कि कौन कितने ज्यादा एनकाउंटर करता है। फिल्हाल प्रदीप शर्मा 2010 से जेल में बंद हैं और विजय सालस्कर की मौत हो चुकी है।
कबीर कौशिक ने फिल्म की कहानी में दोनों पुलिस ऑफिसरों की जिंदगी को पूरी तरह से उतारने की कोशिश की है। फिल्म में सोनू सूद का किरदार प्रदीप शर्मा से और नसीरुद्दीन शाह का किरदार विजय सालस्कर से प्ररित है।
कहानी: फिल्म की कहानी की शुरुआत होती है मुम्बई के एक भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिस ऑफिसर प्रताप (सोनू सूद) से जो कि एक एनकाउंटर स्पेलिस्ट है। प्रताप की पत्नी है नेहा धूपिया जिससे प्रताप बहुत प्यार करता है उसकी एक बेटी भी है जो कि पैरों से अपाहिज है। प्रताप भी में लिप्त है।
दूसरी तरफ है दूसरा एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अरुण इनामदार (नसीरुद्दीन शाह) जो कि अब तक छप्पन की तर्ज पर 56 एनकाउंटर कर चुका है। दोनों पुलिस ऑफिसरों के बीच एक दूसरे से ज्यादा से ज्यादा एनकाउंटर करने की होड़ लगी रहती है।
फिल्म की इंटरवल के बाद की कहानी सन् 2008 में मुम्बई पुलिस की स्थिति पर आधारित है। नेहा धूपिया इस फिल्म में भी किसी सशक्त किरदार में नज़र नहीं आई हैं। हजेल कीच का आइटम सांग आ अन्ते अमलापुरम काफी सेंसेशनल है और फिल्म की गंभीर कहानी से थोड़े वक्त के लिए अलग करती है।


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