Mannu Kya Karegga Review: कॉलेज लाइफ, प्यार और कंफ्यूजन, व्योम-साची की दिल छू लेने वाली कहानी

Mannu Kya? Karegga Review: जब बच्चे बड़े होते हैं और कॉलेज की ओर रुख करते हैं तो उनके मन में कई तरह के सवाल आते हैं, जैसे उनका फ्यूचर कैसा होगा, उन्हें पार्टनर कैसा मिलेगा। इसी जद्दोजहद को दिखाती है फिल्म मन्नू क्या करेगा। आपको ये फिल्म देखनी चाहिए या स्किप करनी चाहिए आइए इस रिव्यू में जानें।
क्या है कहानी?
फिल्म की कहानी मन्नू नाम के एक कॉलेज छात्र के इर्द-गिर्द घूमती है। मन्नू देहरादून के एक छोटे शहर का रहने वाला है और पढ़ाई में अच्छा है, लेकिन खुद के सपनों और भविष्य को लेकर कन्फ्यूजन में है। फिर उसकी मुलाकात जिया से होती है। जिया स्पष्ट सोच वाली और फोकस्ड लड़की है। मन्नू और जिया के बीच दोस्ती और धीरे-धीरे प्यार भी पनपता है। इस रिश्ते के जरिए मन्नू खुद को समझता है और अपने जीवन के फैसले लेना सीखता है। यह कहानी सिर्फ रोमांस नहीं है, बल्कि आत्म-खोज और अपनी पहचान पाने की यात्रा भी है।
कैसी है फिल्म?
फिल्म की कहानी बहुत सिंपल और क्लियर है। कॉलेज लाइफ, दोस्ती और प्यार को बिना ओवरड्रामैटिक किए दिखाया गया है। फिल्म की सिनेमाटोग्राफी बहुत सुंदर है। देहरादून के खूबसूरत लोकेशन और कॉलेज लाइफ को कैमरे में बड़े ही नैचुरल तरीके से कैद किया गया है।
फिल्म का म्यूजिक कहानी का हिस्सा है। गाने जैसे 'हमनवा', 'फना हुआ', 'तेरी यादें' और 'मन्नू तेरा क्या होगा' कहानी को इमोशनल मोड़ और गहराई देते हैं। बैकग्राउंड भी कहानी के साथ अच्छे से मेल खाता है। डायरेक्टर संजय त्रिपाठी ने फिल्म को बहुत सिंपल और स्थिर तरीके से बनाया है।
कैसी है एक्टिंग?
व्योम यादव ने मन्नू के रोल में मासूमियत और ईमानदारी दिखाई है। उनकी एक्टिंग बेहद नैचुरल और असरदार लगी है। साची बिंद्रा ने जिया के रोल में कॉन्फिडेंस और क्लैरिटी दिखाई। उनका किरदार आज की लड़कियों का प्रतिनिधित्व करता है। मन्नू के माता-पिता के रोल में कुमुद मिश्रा और चारु शंकर शानदार लगे। विनय पाठक, डीन ऑफ नथिंग और प्रोफेसर डॉन ने मन्नू की जिंदगी में दोस्त और गाइड का रोल अच्छे से निभाया। सभी सपोर्टिंग एक्टर जैसे राजेश कुमार, बृजेंद्र काला, नमन गोर, आयत मेमन और डिंपल शर्मा ने फिल्म को मजबूती दी।
फाइनल रिव्यू
'मन्नू क्या करेगा' एक सिंपल, सच्ची और दिल को छू लेने वाली फिल्म है। नए कलाकारों का कॉन्फिडेंस, डायरेक्टर की ईमानदारी और कहानी की सादगी इसे एक अच्छी फिल्म बनाती है।यह फिल्म हमें यह भी दिखाती है कि कभी-कभी हम अपने जीवन में बहुत ज्यादा उलझ जाते हैं, लेकिन नीयत सही हो तो समय के साथ सही दिशा जरूर मिलती है।


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