Mahavatar Narsimha Review: भक्त प्रह्लाद की आह पर गरजे भगवान, दिखा नृसिंह अवतार का प्रचंड रूप!

Mahavatar Narsimha Movie Review: भक्त प्रह्लाद पर जब विपदा पड़ी तो भगवान विष्णु को खुद एक अवतार लेकर अवतरित होना पड़ा। भक्त की भक्ति में कितनी शक्ति है, इस फिल्म में आपको यही देखने को मिलेगा। लेकिन क्या आपको फिल्म देखनी चाहिए या मिस करनी चाहिए, आइए इस रिव्यू में जानते हैं।
क्या है कहानी?
'Mahavatar Narsimha' की कहानी शुरू होती है कश्यप ऋषि के घर से जहां उन्हें अपनी पत्नी दिति के हठ की वजह से उस समय पर संभोग करना पड़ता है, जिस समय उस क्रिया को निषेध माना जाता है। नतीजतन, दिति के गर्भ में दो महा शक्तिशाली राक्षसों का वास हो जाता है, जो जन्म से ही काफी खूंखार हैं और उनकी शक्तियां इतनी अपार हैं कि उन्हें रोकना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं। इन दोनों बच्चों का नाम रखा जाता है- हिरणाक्ष्य और हिरण्यकश्यपु। गुरु शुक्राचार्य अपने सान्निध्य में हिरणाक्ष्य और हिरण्यकश्यपु को सारी विद्या देते हैं और उन्हें और भी ज्यादा खतरनाक बनाते हैं। साथ ही ये भी बताते हैं कि राक्षसों के सबसे बड़े दुश्मन हैं विष्णु, जिसके बाद हिरणाक्ष्य और हिरण्यकश्यपु विष्णु जी को ढूंढ़ना शुरू कर देते हैं ताकि वो उन्हें मार सके।
विष्णु जी को ढूंढ़ने के चक्कर में हिरणाक्ष्य और हिरण्यकश्यपु धरती पर अपना आतंक फैलाना शुरू कर देते हैं और हर विष्णु भक्त को जान से मारना शुरू कर देते हैं। हिरणाक्ष्य को इस बीच एक ऐसी तरकीब सूझती है, जिससे विष्णु भगवान खुद उसके पास चलकर आएं। हिरणाक्ष्य धरती को सागर में डुबा देता है और धरती की रक्षा करने हेतु स्वयं आते हैं विष्णु भगवान वो भी वराह अवतार लेकर। वो ना सिर्फ धरती को बचाते हैं बल्कि हिरणाक्ष्य का अंत भी करते हैं।
अपने भाई के अंत के बाद तो हिरण्यकश्यपु और भी बेकाबू हो जाता है और वो अपनी गर्भवती पत्नी को छोड़कर ब्रह्मा जी से वरदान पाने के तपस्या करने चला जाता है। इस बीच हिरण्यकश्यपु की पत्नी विष्णु भक्ति में लीन हो जाती है और हिरण्यकश्यपु को ब्रह्मा जी से अपना मनचाहा वरदान मिल जाता है। लेकिन असली कहानी इसी के बाद शुरू होती है और उसे देखने के लिए आपको मूवी की टिकट खरीदकर सिनेमाघरों में जाना होगा।
कैसी है फिल्म
फिल्म में ऐसा कुछ अलग नहीं है, जो पहले कभी ना दिखाया गया हो। भक्त प्रह्लाद के बारे में आज के समय में सभी लोग जानते हैं। लेकिन फिल्म के एक्शन सीक्वेंस ही इस फिल्म की जान है। इस फिल्म में दो जबरदस्त फाइटिंग सीक्वेंस हैं पहला फर्स्ट हाफ में दूसरा सैकेंड हाफ में। पहले हाफ में हिरणाक्ष्य और वराह अवतार में विष्णु जी का फाइट सीन जबरदस्त है और सैकेंड हाफ के आखिरी आधे घंटे में तो नृसिंह अवतार का फाइट सीक्वेंस देखकर तो आपके रोंगटे ही खड़े होने वाले हैं।
फिल्म का पहला हाफ थोड़ा सा स्लो है, कई सीन में ऐसा लगता है कि फिल्म को जबरदस्ती खींचा जा रहा है लेकिन सैकेंड हाफ में फिल्म का असली मैजिक सामने आता है, जो आपको सिनेमाघरों में ही एक्सपीरिएंस करना होगा।
कैसा है एनिमेशन
इस फिल्म में एनिमेशन पर काफी काम किया गया है लेकिन एनिमेशन में मामले में भारत अब भी हॉलीवुड से काफी पीछे हैं। फिल्म में विष्णु जी के दोनों अवतार को काफी अच्छे से दिखाया गया है, खासतौर पर नृसिंह अवतार को तो फिल्म में बखूबी दिखाया है। उनका लुक, उनकी दहाड़ आपके रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है।
फाइनल रिव्यू
इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है, जो आपको सरप्राइज करे सिर्फ नृसिंह अवतार के दमदार रूप को छोड़कर। इस फिल्म को मास ऑडियंस के लिए बनाया गया है, जिसे देखकर लोगों के मन में भक्ति के भावों का उठना आम हो सकता है। इसे देखने के बाद आपका भी मन प्रभु की भक्ति में लीन होने को करेगा। भगवान भी एक सच्चे भक्त के दास होते हैं, यही इस फिल्म में दिखाया गया है। इस फिल्म को फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से मिलते हैं 3 स्टार।


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