'मेड इन चाइना' फिल्म रिव्यू- अहम मुद्दे को कंधों पर उठाते हैं राजकुमार राव और बोमन ईरानी
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सेक्स और गुप्त रोग पर समाज में फैली चुप्पी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर पिछले कुछ सालों में कई फिल्में सामने आई हैं। शुभ मंगल सावधान, खानदानी शफाखाना जैसी फिल्मों में इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा की गई है। ऐसे में इस विषय को नए अंदाज़ में सामने लेकर आने की कोशिश की है निर्देशक मिखिल मुसाले ने।
''जब हम खांसी, सर्दी, बुखार और अन्य बीमारियों पर बात करें तो ठीक, लेकिन सेक्स संबंधी बीमारियों पर बात करना शर्मनाक हो जाता है। क्यों ?''
कमिटि के सामने बैठे डॉक्टर वर्धी (बोमन ईरानी) जब यह संवाद करते हैं तो यह सवाल सिर्फ फिल्म के किरदारों के लिए नहीं, बल्कि दर्शकों की मानसिकता पर भी छोड़ा जाता है।
हमारे समाज में सेक्स शब्द या उससे जुड़ी बीमारियों को लेकर बात करना आज भी अनुचित माना जाता है। इसी दबी कुचली संकुचित विचारधारा को बदलने की कोशिश की गई है फिल्म मेड इन चाइना में। दमदार कलाकारों के साथ निर्देशक मिखिल मुसाले इस फिल्म को काफी मजबूत बना सकते थे। लेकिन कमजोर निर्देशन और लचर पटकथा फिल्म को औसत बना देती है।


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