Maa Movie Review: काजोल पर भारी पड़ते दिखे रॉनित रॉय, ट्विस्ट और टर्न से भरी ये फिल्म आपको करेगी एंटरटेन

Cast: Kajol, Ronit Roy, Indraneil Sengupta, Yaaneea Bharadwaj, Jitin Gulati, Kherin Sharma
Director: Vishal Furia
Maa Movie Review: पिछले साल आई फिल्म 'दो पत्ती' में अपना जादू बिखेरने के बाद अब एक बार फिर काजोल लौट आई हैं। एक नए रंग और रौब के साथ। इस बार काजोल बनी हैं 'मां', जिसकी बेटी की जान खतरे में हैं। लेकिन क्या ये फिल्म आपको देखनी चाहिए या स्किप करनी चाहिए, आइए इस रिव्यू में जानें।
क्या है कहानी?
फिल्म की कहानी चंदरपुर नाम के एक गांव से शुरू होती है, जहां एक घर में जुड़वा बच्चों का जन्म होता है। एक लड़का जिसका नाम शुभांकर रखा जाता है और लड़की, जिसकी एक श्राप की वजह से बलि दे दी जाती है। इसके बाद कहानी 40 साल बाद की दिखाई जाती है। अब शुभांकर की एक फैमिली है उसकी बीवी का नाम अंबिका है और उन दोनों की एक 12 साल की बेटी है श्वेता। लेकिन शुभांकर ने अपने परिवार से ये बात छिपाकर रखी है कि उसकी एक बेटी है...क्योंकि उसके परिवार में बेटियों की बलि दे देते हैं, इसलिए अपनी बेटी की जान बचाने के लिए वो अपने गांव वालों को बताता है कि उसका एक बेटा है।
अचानक शुभांकर के पिता की मौत हो जाती है और वो अपने पिता के अंतिम दर्शन के लिए गांव पहुंचता है और गांव के प्रधान से कहता है कि वो अपना पुश्तैनी घर बेचना चाहता है। ये कहकर वो अपनी बीवी और बच्ची के पास लौट रहा होता है तभी उस गांव का शापित पेड़ उसकी जान ले लेता है। अब चंदरपुर के गांव का प्रधान शुभांकर की पत्नी अंबिका और उसकी बेटी श्वेता को गांव बुलाता है ताकि गांव के पुश्तैनी घर को जल्द से जल्द बेचा जा सके। लेकिन जैसे ही अंबिका और उसकी बेटी गांव में कदम रखते हैं, वैसे ही शुरू हो जाता है शापित पेड़ का आतंक, जो सिर्फ एक पेड़ नहीं... बल्कि एक राक्षस है। जो किसी भी हाल में अपने वंश को आगे बढ़ाना चाहता है और उसका वंश शुभांकर और अंबिका के बेटी श्वेता ही बढ़ा सकती है। लेकिन अंबिका अपनी बेटी को राक्षस के इस चंगुल से बचाना चाहती है और अब वो अपनी बेटी को कैसे बचाएगी ये देखने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
कैसी है फिल्म
मां फिल्म का पहला पार्ट आपको थोड़ा खिंचा-खिंचा लग सकता है। लेकिन जब अंबिका और श्वेता चंदरपुर पहुंच जाते हैं, तब कहानी असल में आगे बढ़ती हुई नजर आती है। फिल्म में VFX का इस्तेमाल भरपूर मात्रा में हुआ है। लेकिन इस फिल्म का सबसे बड़ा माइनस पॉइंट ही इसका VFX है क्योंकि कई जगहों पर ये नकली लगता है। स्क्रीनप्ले काफी अच्छा है और उसे भूतिया बनाने की पूरी कोशिश की गई है। फर्स्ट हाफ तक आपको ये थोड़ा डरा सकती है... लेकिन जैसे ही कहानी आपको समझ आ जाएगी आपका डर भी कम होता जाएगा।
फिल्म में काली मां का एंगल लिया गया है और उसे रक्तबीज नाम के राक्षस से जोड़ा गया है, जो आपको इंट्रेस्टिंग लग सकता है। इस फिल्म की सबसे अच्छी बात यह है कि ट्रेलर से आपको फिल्म की स्टोरीलाइन का कुछ हद तक अंदाजा हो सकता है लेकिन पूरी फिल्म ट्रेलर से कहीं ज्यादा है। हालांकि, फिल्म में थोड़ा और हॉरर का तड़का लगाया जा सकता था।
कैसी है एक्टिंग
फिल्म में शुभांकर का रोल इंद्रनील सेनगुप्ता ने निभाया है, उनका रोल छोटा है लेकिन उन्होंने अच्छा काम किया है। फिल्म में रोनित रॉय भी हैं, जो कई सीन में काजोल पर भारी पड़ते नजर आए हैं। काजोल ने भी इस फिल्म में अपना अच्छा काम दिखाया है। वो हर बार की तरह इस बार भी अपने किरदार में डूबी नजर आईं और मां के रोल में तो वो कई जगह पर्सनल होती हुईं भी दिखीं।
फाइनल रिव्यू
अगर आप काजोल के फैन है तो आपको ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए। यही नहीं, रॉनित रॉय कितने कमाल के एक्टर हैं... ये देखने के लिए भी आपको इस फिल्म को देखना होगा। इस फिल्म में काजोल ने अपने मां वाले इमोशन को निचोड़कर रख दिया है। इस फिल्म के अंत में आपको एक ऐसा सरप्राइज देखने को मिलेगा, जिसे देखकर आपके रोंगटे तो खड़े होंगे साथ ही आपका मन खुशी से झूम उठेगा। जी हां, इस फिल्म का अंत देखकर आपको लगेगा कि राक्षस का अंत हो गया है लेकिन नहीं इस अंत एक नया आगाज होगा... काले जादू की दुनिया एक बार फिर आपको डराएगी। चलिए फिल्म के फाइनल रिव्यू पर नजर डालते हैं तो इस फिल्म को फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से मिलते हैं 3 स्टार।


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