REVIEW: एमएस धोनी दि अन्टोल्ड स्टोरी, ओपनिंग के साथ SIXER.. धमाकेदार
फिल्म- एमएस धोनी दि अन्टोल्ड स्टोरी
अक्सर कहते सुना है.. अरे, धोनी तो किस्मत का धनी है.. कहां रांची से उठकर भारतीय क्रिकेट टीम में सेलेक्ट हो गया।और उसके आते ही इंडिया ने दो वर्ल्ड कप पर कब्जा कर लिया। लेकिन अब शायद लोग यह बात ना कहें।
एम एस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी से साफ है कि महेन्द्र सिंह धोनी ने अपनी किस्मत - ताबड़तोड़ मेहनत से बनाई है। सुशांत सिंह राजपूत ने साबित किया है कि उनसे बेहतर धोनी और कोई हो ही नहीं सकता था।
[Note: हालांकि एम एस धोनी- एक अनकही कहानी.. में अनकही काफी कम बातें थी..]

खैर, फिल्म का इंतजार क्या होता है, आप धोनी बॉयोपिक की बेसब्री को देखकर समझ सकते हैं। क्रिकेट और बॉलीवुड का यह मेल लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। नीरज पांडे के निर्देशन में बनी यह फिल्म भारत के सफलतम क्रिकेट कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के जीवन पर आधारित है।
नीचे पढ़ें फिल्म की पूरी समीक्षा-
कहानी
कहानी शुरू होती है वानखेडे स्टेडियम क्रिकेट वर्ल्ड कप 2011 से.. मैदान में 7 नंबर जर्सी के साथ उतरते हैं एम एस धोनी.. और वहीं से फिल्म जाती है सालों पीछे.. जब होता है धोनी का जन्म। धोनी के बचपन की कहानी आपको अच्छी लगेगी। स्कूल, पढ़ाई, फुटबॉल से लेकर क्रिकेट तक का सफर निर्देशक ने काफी सफाई के साथ दिखाया है।
फिल्म में यदि आप डूब गए तो कई सीन और डॉयलोग आपको इमोशनल कर देंगे। खासकर जब धोनी दिलीप ट्राफी के लिए सेलेक्ट होकर भी नहीं जा पाते हैं। या जब तीन साल तक टीटीई की नौकरी करने के बाद वह अपनी विवशता पहली बार निकालते हैं।
फिल्म की सबसे अच्छी बात यह रही कि फिल्म में क्रिकेट को काफी जगह दिया गया है। ना कि धोनी की लव लाइफ और गानों को। फिल्म सेकेंड हाफ में काफी तेजी के साथ गुजर जाती है। जबकि फर्स्ट हाफ में कुछ सीन्स ना भी होते तो कहानी पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
अभिनय
एक्टिंग की बात करें तो सुशांत सिंह राजपूत धोनी के किरदार में बेस्ट हैं। पान सिंह धोनी के किरदार में अनुपम खेर, धोनी की बहन बनीं भूमिका चावला.. धोनी के कोच बने राजेश शर्मा.. कुमुद मिश्रा.. सभी अपने किरदारों में बेहतरीन लगे। वहीं दिशा पटानी और किएरा आडवाणी ने अपना हिस्सा अच्छे से निभाया।
निर्देशन
फिल्म का निर्देशन किया है नीरज पांडे ने.. जिन्होंने बेबी और स्पेशल 26 जैसी फिल्में बनाई हैं। लिहाजा, हमें फिल्म से कुछ ज्यादा ही उम्मीदें थी। किसी की जिंदगी को 3 घंटे में समेटना छोटी बात नहीं है, जो निर्देशक ने सफाई के साथ किया है। लेकिन 3 घंटे लंबी फिल्म देखना भी आज के दर्शकों को थोड़ा बोर कर जाती है। धोनी बॉयोपिक 3 घंटे 5 मिनट की फिल्म है..
तकनीकी पक्ष
बेहतरीन बैकग्राउंड स्कोर, ज़बरदस्त डायलॉग, खासकर यदि आप झारखंड, बिहार के हैं तो कुछ शब्द बड़ी स्क्रीन पर सुनकर आपको मज़ा आ जाएगा। टी-20 वर्ल्ड कप और वर्ल्ड कप 2011 के रियल फुटेज को फिल्म में काफी बढ़िया एडिटिंग के साथ दिखाया गया है।
अच्छी बातें
फिल्म की सबसे दमदार बात इनके एक्टर्स है.. सुशांत सिंह राजपूत हों या बाकी सर्पोटिंग एक्टर्स.. सभी ने शानदार अभिनय किया है।
निगेटिव बातें
फिल्म की सबसे बड़ी कमज़ोरी इसकी लंबाई है। वहीं, कुछ लोगों को यह ऐतराज़ भी हो सकता है कि फिल्म में सिर्फ धोनी की पॉजिटिव बातें.. या यूं कह लें तो महानता दिखाई गयी है। और हां, भारत में कई खिलाड़ी ऐसे भी हैं, जिनकी जिंदगी में धोनी से ज्यादा ट्विस्ट एंड टर्न्स हैं.. और जिन पर फिल्म बनाई जा सकती है।
देंखे या नहीं
जरूर जाएं.. खासकर यदि आप धोनी फैन हैं तो.. फिल्म को एक बार देखना तो जरूर बनता है। आखिर बार बार बॉलीवुड और क्रिकेट का ऐसा मेल देखने नहीं मिलता।


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