LoveYatri Movie Review: लवस्टोरी नहीं बल्कि गरबा स्टोरी है लवयात्री, सिर्फ इसलिए देखें
Recommended Video

'प्यार की हमेशा जीत होती है'.. वहीं आयुष शर्मा और वरीना हुसैन की लवयात्री में ये रोल गरबा अदा करता है। अगली बार जब आप वीसा इंटरव्यू के लिए जाएं या जिंदगी में कोई भी परेशानी आए तो बस घूम-घूम के गरबा कीजिए और पलक झपकते ही आपनी सारी प्रॉब्लम्स छू हो जाएंगी। इस फिल्म के जरिए तो हमें यही पता चलता है।
सुश्रुत aka सुसु (आयुष शर्मा) एक बिना काम का गुजराती लड़का है, जो पढ़ाई-लिखाई नहीं बल्कि अपनी गरबा अकैडमी खोलने के सपने देकता है। सु वात छे! वहीं दूसरी तरफ मिशेल aka मनीषा (वरीना हुसैन) एक लंदन बेस्ट एनआरआई लड़की है, जो खूबसूरत होने के साथ-साथ स्मार्ट भी है। या यूं कहें एक-दूसरे से एकदम अलग। सुसु को डांडिया नाइट्स पर पहली नजर का प्यार हो जाता है। वो भी बॉलीवुड के टिपिकल स्लो मोशन वाले स्टाइल में..

इसी बीच सुसु के अंकल रसिक (राम कपूर) उसके पास एक बॉलीवुड का फॉर्मूला लेकर आते हैं जिससे वो नवरात्रि नौ दिनों पर लड़की का दिल जीतने का दावा करते हैं। थोड़े ढ़ोलिडा और खाने-वाने के बाद जैसे ही आपको लगेगा कि अब इन लवबर्ड्स का हैप्पीलि एवर आफर वाला फेज आने वाला है वैसे ही मिशेल के पिता (रोनित रॉय) दोनों के बीच गलतफहमिया पैदा कर देंगे। मिशेल लंदन वापस चली जाएगी और सुसु का दिल टूट जाएगा। क्या गरबा ब्वॉय उसे फिर से मना पाएगा.. फिल्म की बाकी कहानी इसी के इर्द-गिर्द घूमती है।
लवरात्रि में यूं तो कुछ नया मालूम नहीं होता। अमीर लड़की-गरीब लड़का, साजिश करने वाला पिता और फिर चेंज और हार्ट..ये सब आपने पहले ही देखा है। नरेन भट्ट की राइटिंग में वो चमक नजर नहीं आती जो ऑडिएंस को जोड़े रखे। डायलॉग भी कोई खास असर नहीं छोड़ते। अभिराज मीनावाला का सपाट निर्देशन और घिसा-पिटा प्लॉट लवयात्री को फेल कर देता है।
सिर्फ एक जगह पर लवयात्री को पूरे नंबर मिलते हैं वो है नचा देने वाला म्यूजिक। चौगाडा और ढ़ोलिड़ा जैसे फिल्म के गाने काफी शानदार हैं।
आयुष शर्मा और वरीना हुसैन की लवयात्री में ताल की कमी है। निर्देशन काफी ढ़ीला है और फिल्म एक परफेक्ट लवस्टोरी बनने से चूक जाती है। हमारी तरफ से इस फिल्म को सिर्फ 1.5 स्टार्स।


Click it and Unblock the Notifications













