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    REVIEW: लिपस्टिक अंडर माई बुर्का.. दमदार.. आंखे खोल देगी ये फिल्म!

    By Madhuri
    |
    Rating:
    3.5/5

    कास्ट- कोंकणा सेन शर्मा,रत्ना पाठक शाह, आहना कुमरा, पल्बिता बोरठाकुर, सुशांत सिंह, वैभव तत्ववादी, विक्रांत मेसी, शशांक अरोड़ा
    डायरेक्टर - अलंकृता श्रीवास्तव
    प्रोड्यूसर - प्रकाश झा
    लेखक - अलंकृता श्रीवास्तव
    शानदार पॉइंट - परफॉर्मेंस, डायरेरक्शन, कहानी
    निगेटिव पॉइंट - पुरुषों के किरदार में गहराई नहीं है और ये वन डायमेंशनल लगते हैं
    शानदार मोमेंट - एक सीन में रत्ना पाठक शाह कॉमेडी फ्लेवर लाती हैं और आप उसका आनंद लेंगे

    प्लॉट

    प्लॉट

    फिल्म में भोपाल की पृष्ठभूमि दिखाई गई है। फिल्म वॉइस ओवर से शुरू होती है कि कैसे महिलाओं की जिंदगी में उदासी आ जाती है और फिर जवानी कांटे की तरह चुभने लगती हैं। जल्दी ही चार महिलाओं की अलग अलग कहानी दिखाई जाती है।चारों महिलाएं जल्द ही सभी बंदिशों को तोड़कर सेक्सुअली दमित समाज से बाहर निकलना चाहती है और वो जिंदगी जीना चाहती है जिसकी
    वो हकदार है।

    प्लॉट

    प्लॉट

    रेहाना (पल्बिता बोरठाकुर) एक टीनएज जो घर में भी बुर्का में रहती है और देसी माइली सायरस बनना चाहती है। लेड जेप का stairway to heaven उसका पसंदीदा गाना है। वो कॉलेज में जीन्स पर बैन के खिलाफ आवाज उठाती है और दुकान से सामान भी चुराती है।

    शिरीन (कोंकणा सेन शर्मा) एक बुर्का पहनने वाली हाउसवाइफ है जिसका रुढ़िवादी पति उसे सेक्स ऑब्जेक्ट से ज्यादा कुछ नहीं समझता। वो अपनी खुशी के लिए घर घर जाकर सेल्स जॉब करती है।

    लीला (आहना कुमारा) एक पार्लर चलाती है जो अपनी सुहागरात के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहती और इसे लेकर कई सपने सजाती है।

    बुआ जी उर्फ उषा परमार (रत्ना पाठक शाह) 55 साल की महिला है जिसका यौन अस्तित्व समाज में स्वीकार्य नहीं है। वो तैराकी के लिए जाती है और दूसरे नाम के साथ फोन सेक्स में लिप्त होती है। असल में ये चारों महिलाएं एक मिट्टी के घर में रहती है जो बुआ जी का है और बाकी तीनों इसमें किराएदार हैं।

    देसी नाम लिपस्टिक वाले सपने के साथ इन चारों की कहानियां फिल्म में समांतांर में दिखाई गई है जिसकी मुख्य किरगार रोजी हार्बर के कल्पना और सपनों की दुनिया में होती है।

    बाकी पूरी फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे चारों महिलाएं परिणाम जानते हुए भी विद्रोह करती हैं।

    Shraddha Kapoor, Radhika Apte, Mona Singh at Lipstick Under my Burkha screening; Watch | FilmiBeat
    डायरेक्शन

    डायरेक्शन

    लिपस्टिक अंडर माय बुर्का तभी लोगों की नजरों में आ गई थी जब सेंसर बोर्ड ने फिल्म को रिलीज करने से मना कर दिया था और कहा था कि कि महिला केंद्रित फिल्म है और फिल्म में कई जगहों पर सेक्स सीन है। मेकर्स ने एक कदम आगे बढ़कर FCAT का दरवाजा खटखटाया जिन्होंने फिल्म को मंजूरी दी।


    शायद पहलाज निहलानी नहीं चाहते थे कि समाज में महिलाओं की असल सच्चाई को दिखाया जाए जहां महिलाओं की निजी पसंद नापसंद की कोई जगह नहीं है। अलंकृता श्रीवास्तव की तारीफ करनी
    होगी जिन्होंने इन सबसे हटकर पुरूष पितृसत्ता की वजह से इसके पीछे क्या चीजें होती है वो दिखाने की कोशिश की है। जहां एक लड़की लोगों के सामने डांस नहीं कर सकती क्योंकि 'लोग क्या सोचेंगे'.
    जहां एक अधेड़ उम्र की महिला अपने सेक्सुअल पसंद नापसंद के बारे में बात नहीं कर सकती। जहां एक पुरूष कभी भी सेक्स के लिए अपनी अपनी पत्नी की अनुमति या उसकी पसंद नापसंद के बारे में नहीं सोचता है।
    अलंकृता श्रीवास्तव की ये फिल्म इन महिलाओं की आवाज है जो शायद ही कभी सुनी जाती है। वहीं फिल्म में अगर पुरूषों को अगर एक जैसा नहीं दिखाया जाता तो ज्यादा अच्छा होता।

    परफॉर्मेंस

    परफॉर्मेंस

    कोंकणा सेन शर्मा शिरीन के किरदार में कई शानदार सीन दी हैं जिन्हें देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे।

    रत्ना पाठक शाह का किरदार भी फिल्म में काफी प्रभावित करता है। उनका किरदार काफी मजेदार और सबसे अधिक प्रभावित करता है।

    आहना कुमारा का दमदार किरदार और पल्बिता बोरठाकुर का विद्रोही अंदाज भी काफी अच्छा है।

    विक्रम मेसी को फिल्म में देखना काफी मजेदार है हालांकि उनका रोल फिल्म में छोटा है। सुशांत सिंह, वैभव तत्ववादी ने भी अपना काम बखुबी किया है। शशांक अरोड़ा का प्लॉट फिल्म में कमजोर है।

    तकनीकी पक्ष

    तकनीकी पक्ष

    अक्षय सिंह की सिनेमेटोग्राफी फिल्म के माहौल को परफेक्ट तरीके से दिखाती है।चारू श्री रॉय की एडिटिंग भी अच्छी है। गजल धाईवाल के डायलोग भी काफी क्सुअल संकेतो को दिखाता है लेकिन काफी इमोशनल है जो फिल्म की और मजबूती देता है।

    म्यूजिक

    म्यूजिक

    जेबुनिसा बांगाश और मंगेश धाधके ने अच्छा म्यूजिक दिय़ा है जो फिल्म को मजबूती देती है।

    Verdict

    Verdict

    अगर आप फिल्म में कुछ दमदार कंटेट देखना चाहते हैं तो लिपस्टिक के इस बोल्ड शेड को देखिए जिसका असर काफी समय तक रहेगा।

    English summary
    Lipstick Under my burkha movie review Story plot and rating,

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