Laila Majnu Movie Review: प्यार की अद्भुत कहानी में दिल जीत ले गए नए 'मजनू', इसलिए देखें ये फिल्म
Recommended Video

'तुझे क्या लगता है, ये सब हम कर रहे हैं.. हमारी कहानी पहले से लिखी हुई है।' प्यार में डूबा हुआ क़ैस ये बात अपनी प्रेमिका लैला को कहता है। क़ैस की ये लाइनें काफी हद तक सही होती हैं। लैला-मजनू की कहानी सबसे लोकप्रिय लोक-कथाओं में से एक है। नसीब के मारे दो प्यार करने वाले जिनके प्रेम की गहराई की कोई सीमा नहीं है। साजिद अली की इस लैला मजनू की कहानी में किरदार अपने आप को समकालीन समय नें पाते हैं लेकिन इमोशन्स पहले से कुछ भी अलग नहीं हैं।
फिल्म की शुरुआत होती है साजिद अली की लैला (तृप्ति दिमित्री) से, जो कि एक खुल कर जीने वाली लड़की है। ये लैला किसी लड़ते से झेड़खानी करने से नहीं शर्माती। इसी बीच उसका सामना होता है क़ैस (अविनाश तिवारी) से, जो एक अमीर और बिगड़ा हुआ लड़का है। क़ैस को लैला से पहली नजर में प्यार हो जाता है। उनका शुरुआती प्यार धीरे-धीरे गहराई पाता जाता है। उन्हें पता चलता है कि वे साथ रहने के लिए नहीं बने हैं।
साजिद अली और इमतियाज अली के लैला-मजनू को अपनाने में आपको थोड़ा वक्त तो लगता है। फिल्म में कमिया तो हैं लेकिन आप अपने आप को इस फिल्म के प्यार में पड़ने से रोक नहीं पाएंगे।

इमतियाज अली की लव स्टोरीज मुश्किल से ही टेढ़ी-मेढ़ी होती हैं और लैला-मजनू (जिसे साजिद अली ने भी लिखा है) मे वे इस मैजिक को लाने में कामयाब होते हैं। खासकर आखिर के 20-25 मिनटों में जब इमोशन्स अपनी गहाराई तक पहुंच जाते हैं। साजिद अली के लैला-मजनू को अपनाने में आपको थोड़ा वक्त तो लगता है। फिल्म की शुरुआत थोड़ी ढ़ीली होती है। फिल्म आपको किरदारों को समझाने के लिए थोड़ा वक्त लेती है। शुरूआत में लैला का किरदार ऑडिएंस के मन में कई सवाल छोड़ जाता हैं। किसी-किसी जगह पर उनकी लहजा और हरकतें कहीं-कहीं काफी बचकानी और अजीब लगती हैं। हालांकि कुछ ही देर में क़ैस की एंट्री के बाद सबकुछ सामान्य हो जाता है। उनका किरदार ऑडिएंस को आकर्षित करने वाला है।


Click it and Unblock the Notifications











