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क्या दिल्ली क्या लाहोर फिल्म रिव्यू- जिस्म जुदा हैं मगर रुहें आज भी पाक हैं

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Kya Dilli Kya Lahore movie review
निर्माता- किरण अरोड़ा
निर्देशक- विजय राज
कलाकार- विजय राज, मनु सिंह
संगीत- संदेश शंदिल्य
Rating:
3.0/5

(सोनिका मिश्रा) भारत और पाकिस्तान का मुद्दा एक ऐसा विषय है जो कि फिल्मकारों को हमेशा से ही प्रिय रहा है। लेकिन अक्सर इस मुद्दे पर बनी फिल्में या तो विवादों में घिर जाती हैं और या तो उन्हें पाकिस्तान में रिलीज होने से बैन कर दिया जाता है। क्या दिल्ली क्या लाहौर भी पाकिस्तान और भारत के बीच चल रही समस्याओं पर ही आधारित है। फिल्म को बहुत पेचीदा ना बनाते हुए फिल्म के निर्दे्शक ने बहुत ही सिंपल तरीके से ये बताने की कोशिश की है कि भले ही भारत और पाकिस्तान देशों की सियासत ने इन दो मुल्कों को एक दूसरे बिल्कुल जुदा कर दिया है लेकिन इसके बावजूद आखिर दोनों मुल्कों में रहने वाले हैं तो इंसान ही और दोनों में ही एक इंसानियत की भावना है। कोई जन्म लेने के साथ ही एक दूसरे से नफरत नहीं करने लगता। ये नफरत सियासत के लोग इनके दिलों में भरते हैं।

फिल्म की कहानी है पाकिस्तानी सिपाही रहमत अली (विजय राज) और हिंदुस्तान की आर्मी के बावर्ची समर्थ प्रताप शास्त्री (मनु सिंह) की। कहाने के अनुसार रहमत अली की परवरिश दिल्ली में होती है और समर्थ की लाहौर में। दोनों की मुलाकात भारत पाकिस्तान के एक युद्ध के दौरान बॉर्डर पर होती है और किस्मत उन्हें कुछ समय के लिए साथ ला देती है। इस दौरान दोनों के बीच दोस्ती, दुश्मनी की एक अजीब सी ही जंग शुरु हो जाती है। दोनों के मुल्क एक दूसरे से नफरत करते हैं लेकिन दोनों के दिल एक दूसरे के बारे में जानने के बेताब हैं। आगे क्या होता है दोनों की जिंदगी में, इस अनकहे से रिश्ते का अंजाम क्या होता है यही है फिल्म की आगे की कहानी। जिसे जानने के लिए आपको अपने नजदीकी सिनेमाहॉल में जाना होगा।

फिल्म की कहानी बेहद ही सिंपल हैं। फिल्म में मुद्दा काफी गंभीर लिया गया है लेकिन उसे बहुत ही प्यार के साथ संभाल के स्क्रीन पर दिखाया गया है। फिल्म में विजय राज ने हमेशा की ही तरह अपनी बहेतरीन अदाकारी से लोगों कों हंसाया है रुलाया है और उन्हें इमोशनल कर दिया है। वहीं मनु राज एक बेहतरीन एक्टर होते हुए भी कहीं कहीं पर थोड़ा सा ढीले पड़ गये हैं। क्या दिल्ली क्या लाहौल फिल्म को देखने के बाद आपको भी महसूस होगा कि वाकई हम जिन्हें अपना दुश्मन मान बैठे हैं वो भी कहीं ना कहीं हमारे ही जैसे हैं, उनके दिलो में भी हमारी ही तरह जज्बात हैं वो भी हमारी ही तरह सोचते हैं। बस गलती है तो उस हवा की उस आवाम की जिसमें वो रहते हैं और जिसमें हम रहते हैं।

फिल्म की कहानी बहुत ही बेहतरीन है, एक अच्छी कोशिश है। विजय राज की बतौर निर्देशक पहली फिल्म ये जताती है कि वो एक बेहतरीन एक्टर के साथ ही निर्देशन की भी समज रखते हैं। हालांकि बॉक्स ऑफिस के हिसाब से शायद लोगों को फिल्म कुछ खास पसंद ना आए क्योंकि इसमें टिपिकल कमर्शियल मसाले नहीं हैं। लेकिन इसके बावजूद अगर एक सिंपल और प्यारी फिल्मो शौकीन लोगों को जरुर एक बार इस फिल्म को देखना चाहिए।

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    English summary
    Kya Dilli Kya Lohore movie set in 1948 when India and Pakistan was facing the side effects of partition. Vijay Raj and Manu Singh starer Kya Dilli Kya Lahore is a simple story of a two soldiers from India and Pakistan who met each other at Border and make a bonding full of love.

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