आतंक पर 'कुर्बान' होंगे कितने?
कुर्बान की कुर्बानियों का सफर जारी है। फिल्म निर्देशक 'रेन्सिल डिसिल्वा' ने 'रंग दे बसंती' की पटकथा लिखने के बाद निर्देशन में भी अपने नाम का झंडा गाड़ दिया है। वह पहले प्रयास के तौर पर कुर्बान को काफी आगे ले गए हैं। रेन्सिल का कहना था कि इस फिल्म में आप को तथ्यों की बोझिलता नहीं बल्कि कल्पना की उड़ान देखने को मिलेगी। उनके कहने के मुताबिक है फिल्म 'कुर्बान'
कुर्बान के हर सीन के साथ दर्शक उस उड़ान को अपने भीतर महसूस कर सकता है। आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे को प्रेम कहानी के खोल में पेश करना निश्चय ही बढ़िया आइडिया है। अगर स्टोरी लाइन को लेकर जरा भी संशय होता तो इस फिल्म का हाल आतंक पर पहले बनी फिल्मों सा होना तय था। पर निर्देशक ने खुद को बिल्कुल स्पष्ट रखा है।
उनकी कहानी में झोल बहुत कम जगहों पर है। फिल्म के संगीत और करीना-सैफ के अंतरंग दृश्यों ने इन कमजोरियों को भी पूरी तरह ढक दिया है।
ये फिल्म देख कर दर्शकों के मन में एक सवाल उठना तय है कि आतंकवाद की घाटी में आखिर कितने लोग कुर्बान होंगे। मनोरंजन के जामे में गंभीर सामग्री परोसने की बढ़िया कोशिश है 'कुर्बान'।


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