कोई क्रांति नहीं ला सकी क्रांतिवीर

कलाकार : जहान ब्लोच , समीर आफताब , हर्ष राजपूत , आदित्य सिंह राजपूत
प्रड्यूसर-डायरेक्टर: मेहुल कुमार , गीत : समीर
संगीत : सचिन - जिगर , फोटोग्राफी : संतोष सिवान
रेटिंग : 1/5
समीक्षा : मेहुल कुमार की क्रांतिवीर मे जब धमाल मचाया था तो इस के पीछे उस फिल्म के हीरो यानी कि नाना पाटेकर की जबरदस्त एक्टिंग थी, जिसमें उनका भरपूर साथ दिया था डिंपल कपाड़िया और परेश रावल ने जिनके अभिनय का कोई सानी नहीं है। पता नहीं क्यों मेहुल ने इस फिल्म के सीक्वेल में इन तीनों में से किसी एक को भी आजमाया नहीं। और तो और इतने संगीन सब्जेक्ट में एकदम से नए कलाकारों की भीड़ ला दी जिन्हें न तो अभिनय आता है और न ही प्रेंजेटेशन। नवोदित कलाकारों को चांस देना बेशक अच्छी बात है और इसका स्वागत करना चाहिए लेकिन कलाकार ऐसे तो हों जो ऐक्टिंग का ककहरा तो जानते हों। फिल्म की पटकथा बेहद कमजोर औऱ संगीत निराश करने वाला है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि मेहुल की क्रांतिवीर पुरानी बोतल में बासी शराब है।
देखें : क्रांतिवीर की तस्वीरें
कहानी : फिल्म वहां से शुरू होती है, जहां पिछली क्रांतिवीर खत्म होती है। नाना और डिंपल की इकलौती बेटी रोशनी एक टीवी चैनल में एंकर है। रोशनी को अपने माता पिता की मौत के बारे में बस इतना ही बताया गया है कि एक ऐक्सिडेंट में उनकी मौत हुई। रोशनी अपने तीन दोस्तों विशाल, उदय और गोल्डी के साथ समाज में कुछ बदलाव करना चाहती है। रोशनी जब विशाल के साथ रिटायर जज यशवर्धन का इंटरव्यू लेती है, तो उसे पता चलता है कि विशाल के पिता को फांसी देने के फैसले के दौरान उन्हें लगा कि किसी बेगुनाह को फांसी दी गई है।
देखें : आई हेट लव स्टोरीज
विशाल को उसके दादा से पता चलता है कि विशाल के पिता नेताओं की दंगे कराने की साजिश को नाकाम करना चाहते थे। इस साजिश के दौरान नेताओं ने उन्हें एक आतंकवादी हमले में ऐसा फंसाया कि कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा सुना दी। विशाल अपने मृत पिता की बेगुनाही को साबित करने के लिए मीडिया का सहारा लेता है। विशाल रोशनी के चैनल को जॉइन करता है। इस मुहिम में उनके दोनों दोस्त उदय और मिनिस्टर का बेटा गोल्डी भी उनके साथ है। विशाल , रोशनी की यह टीम सत्ता की कुर्सियों पर बैठे भ्रष्ट नेताओं पांटणकर और चीता कलई जनता के सामने खोलने के मिशन में जुट जाते हैं।


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