Kesari Chapter 2 Review: कोर्टरूम ड्रामा के खिलाड़ी बने अक्षय, खून बैसाखी का सच और देशभक्ती का जोश भरेगी फिल्म

Kesari Chapter 2 Review: जलियांवाला बाग के काले इतिहास के बारे में सबको पता है लेकिन इस हत्याकांड ने किस तरह से देश के लोगों को हिला दिया था, ये दिखाया है 'केसरी चैप्टर 2' में। इस फिल्म में हैं अक्षय कुमार, अनन्या पांडे और आर माधवन। लेकिन क्या ये फिल्म आपको देखनी चाहिए या स्किप करनी चाहिए, आइए इस रिव्यू में जानते हैं।
क्या है कहानी?
भारत में अंग्रेजी हुकूमत के लिए लड़ने वाला शानदार वकील है शंकरन नायर, जिसके लिए कोई भी केस जीतना चुटकी बजाने का खेल होता है। जिस शख्स को अंग्रेज जेल भेजने के लिए हर तरह के जतन कर रहे थे, उसे शंकरन नायर ने एक ही हियरिंग में सलाखों के पीछे पहुंचा दिया और वो शख्स था कृपाल सिंह। कृपाल सिंह तो जेल चला गया लेकिन अपने परिवार को पीछे छोड़ गया और वो परिवार पहुंच गया जलियांवाला बाग। जहां सब मर गए लेकिन कृपाल सिंह का बेटा बच गया और इसी बेटे की वजह से शंकरन नायर का दिल पिघला और उसने जलियांवाला बाग में हुए नरसंहार के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया।
दिलरीत गिल ने भी शंकरन नायर के साथ मिलकर इस अंग्रेजी हुकूमत की जड़ों को हिलाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। लेकिन मामला उस वक्त काफी जटिल हो जाता है जब एंट्री होती है मेक केनली की, जो मिजाज में अड़ियल है और जिद्दी भी है। जो किसी भी हाल में शंकरन नायर को धूल चटाना चाहता है, क्योंकि उसे लगता है कि वो शंकरन की वजह से ही बर्बाद हुआ है। एक तरफ क्राउन है, जिसके पास दौलत है, जिसने पूरे देश को गुलाम बना रखा है, जो किसी भी हाल में इस केस को जीतना चाहता है और दूसरी तरफ शंकरन नायर है जो हर हाल में अपने देश को इंसाफ दिलाना चाहता है। जीत किसके पासे में जाती है, इसके लिए आपको ये फिल्म देखनी होगी।
कैसी है फिल्म
फिल्म की कहानी सन् 1919 की है जब बैसाखी के दिन ज्यादा से ज्यादा से लोगों को जलियांवाला बाग बुलाया गया था। जहां जनरल डायर अपनी सेना के साथ आकर मासूमों पर गोलियां बरसा देता है और हजारों लोगों को मौत के घाट उतार देता है। फिल्म का फर्स्ट हाफ में दिखाया जाता है कि शंकरन नायर एक अंग्रेजों का वफादार आदमी है, लेकिन वो दिल का भी अच्छा है। जब उसे जलियांवाला बाग की सच्चाई के बारे में पता चलता है तो अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा हो जाता है। इस फिल्म में जब अक्षय की एंट्री अंग्रेजों के वकील के तौर पर होती है तो वो इतनी धमाकेदार नहीं होती लेकिन जब वो भारतीयों के लिए कोर्ट में उतरता है तो उसका अंदाज, रौब बिलकुल अलग हो जाता है और उसी एंट्री से कहानी का रुख बदल जाता है।
पूरी फिल्म काफी रोमांचक है फर्स्ट हाफ में माधवन की एंट्री और माधवन की एंट्री जब होती है तब लगता है कि अब मामले ने जोर पकड़ा है। फिल्म का सैकेंड हाफ अक्षय वर्सेज माधवन उर्फ शंकरन वर्सेज मेककेनली है। इस फिल्म में इतने ट्विस्ट हैं कि एक तरफ पलड़ा माधवन की तरफ जाता है और दूसरी बारी में अक्षय बाजी पलट लेते हैं। एक बार तो ऐसा पल भी आएगा, जब शंकरन हार मान लेता है लेकिन जनाब इसी हार के बाद जीत की कहानी लिखी जाती है। फिल्म का सैकेंड हाफ शानदारा है और आप कई बार सीटी और ताली बजाने पर मजबूर हो जाएंगे।
कैसी है एक्टिंग
केसरी में शंकरन नायर का रोल निभाया है अक्षय कुमार ने, जिन्होंने इस फिल्म में अपना बेस्ट दिया है और ये कहना गलत नहीं होगा कि वो ही इस फिल्म के असली हीरो हैं, जिन्हें जबरदस्ती हीरो के रूप में पेश नहीं किया गया है... लेकिन अपनी एक्टिंग और अपने डायलॉग से उन्होंने साबित किया है कि वो एक हीरो हैं। माधवन ने मेककेनली के रूप में निगेटिव रोल निभाया है लेकिन क्या कमाल का रोल निभाया है। शंकरन और मेककेनली जब भी आमने-सामने आए कड़ी टक्कर का माहौल बना। अनन्या पांडे ने भी फिल्म में शानदार काम किया है। उन्हें स्क्रीन स्पेस और डायलॉग तो ज्यादा नहीं मिले लेकिन जब भी स्क्रीन पर दिखीं बेहतरीन ही लगीं। जाट के बाद एक बार फिर रेजिना कैसेंड्रा नजर आई हैं और इस बार उन्होंने शंकरन नायर की पत्नी का रोल निभाया है और वो भी एक सपोर्टिव पत्नी के रूप में अच्छी लगी हैं। इस फिल्म में हर एक्टर जो स्क्रीन में नजर आया, उसने अपने लेवल पर शानदार काम किया है।
फाइनल रिव्यू
केसरी चैप्टर 2 सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक भावना है देशभक्ति की। जलियांवाला बाग कितना भयानक था, कितना दर्दनाक था, कितना अमानवीय था... ये दिखाया गया है इस फिल्म में। हम एक आजाद देश में सांस ले रहे हैं और ये हमारे लिए कितनी सौभाग्य की बात है, ये दिखाया है गया है इस फिल्म में। तो क्या आपको ये फिल्म देखनी चाहिए... तो इसके लिए मैं कहूंगी एक बड़ा 'हां'। फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से इस फिल्म को मिलते हैं 4 स्टार।


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