Karwaan Movie Review: इरफान खान और दुलकर सलमान की शानदार फिल्म, एक-एक पल यादगार
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'मैं अकेला ही चा था जानिब-ए-मंजिल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया'... मजरूह सुल्तानपुरी की ये लाइनें शौकत (इरफान खान) की वैन पर लिखी हुई हैं और ये लाइनें आपको हिंट देती हैं कि आकर्ष खुराना की इस फिल्म के पिटारे में क्या-क्या मिलेगा। कारवां को सिर्फ एक रोड ट्रिप कहना गलत होगा। ये फिल्म उससे गई ज्यादा डीप है। इस फिल्म के सबसे खास बात ये है कि फिल्म मेकर्स बड़ी चालाकी से मौत को थीम बनाकर ऑडिएंस को ये बताते हैं कि जब हम अपने आपको मुक्त कर देते हैं तो जिंदगी में कुछ अच्छी बातों के लिए जगह बनाते हैं।

प्लॉट की बात करें तो अविनाश (दुलकर सलमान) एक मायूस जिंदगी जीता है और बैंगलोर की एक आईटी कंपनी में बोरिंग की नौकरी करता है। फ्लैशबैक में खुलासा किया जाता है कि उसका दिल फोटोग्राफी में लगता है लेकिन उसके पिता (आकाश खुराना) फोटोग्राफी के करियर को कभी एप्रूव नहीं करते हैं।
वहीं अविनाश की जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आता है जब उसे पिता के निधन की खबर मिलती है। जो कि तीर्थ यात्रा के दौरान हुआ है। अविनाश अपने दोस्त यानी शौकत की मदद लेता है उनका मृत शरीर लाने के लिए, जिसके बाद उसे पता चलता है कि उसके पिता की बॉडी दूसरे मृत शरीर से एक्सचेंज हो गई है जो कि तान्या (मिथिला पालकर) की दादी की होती है।
इरफान खान, दुलकर सलमान और मिथिला पालकर की फिल्म कारवां एक रिफ्रेशिंग फिल्म है। इसके सभी किरदारों से ऑडिएंस खुद को जुड़ा हुआ पाएगी। ये ट्रिप आप मिस नहीं कर सकते।


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