Kantara Chapter 1 Review: एक बार नहीं कई बार होंगे देवता के दर्शन, ऋषभ शेट्टी ने पेश किया मास्टरपीस!

Kantara Chapter 1 Review

Rating:
4.0/5

Kantara Chapter 1 Movie Review: साल 2022 में जब 'कांतारा' रिलीज हुई थी तो इस फिल्म से लोगों की ज्यादा उम्मीदें नहीं थी लेकिन ऋषभ शेट्टी की कमाल की एक्टिंग ने ऐसा जादू दिखाया कि लोग थिएटर्स में खिंचे चले आए। अब इस फिल्म का प्रीक्वल आ गया है 'कांतारा चैप्टर 1', तो क्या ये फिल्म पहले पार्ट से उठी दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतर पाई है या नहीं आइए इस रिव्यू में जानें।

क्या है कहानी

कांतारा की कहानी एक कांतारा नाम के जंगल की है जहां कुछ आदिवासी लोग रहते हैं और वो अपने देवता को पूजते हैं लेकिन पास में ही रहने वाला राजा काफी क्रूर होता है और वो अपना अधिकार जमाने के लिए कांतारा के जंगल में जाता है और वहां के लोगों को मारने लग जाता है और तभी देव के गण वहां आकर उस राजा को मार डालते हैं और कांतारा के लोग एक बार खुशी-खुशी वहां रहने लग जाते हैं।

जिस राजा को मारा जाता है, उसका बेटा अपने ही आंखों के सामने अपने पिता की मौत को देखता है और वो फैसला लेता है कि वो कांतारा कभी नहीं जाएगा। राजा के घर दो बच्चों का जन्म होता है- एक लड़का और एक लड़की। लड़का आगे चलकर राजा (गुलशन देवैया) बनता है और वो हमेशा नशे में चूर रहता है वो एक दिन कांतारा जाने का फैसला करता है लेकिन उसे उल्टे पैर लौटना पड़ता है और कांतारा के कुछ लोग राजा की परिधि में आकर व्यापार करने का फैसला लेते हैं। ये बात राजा को खटकती है और फिर वो राजा सेना लेकर कांतारा में जाकर लूटपाट मचाता है और फिर शुरू होता है देवता का क्रोध। क्या राजा को उसके कर्मों की सजा मिलेगी? देवता कैसे अपने लोगों को बचाएंगे ये जानने के लिए थिएटर्स में जाकर फिल्म देखनी होगी।

कैसी है फिल्म

फिल्म विजुअलाइजेशन काफी अच्छा है, फिल्म का पहला हाफ तो आपको जरूरत से ज्यादा खिंचा हुआ नजर आएगा और आपको पता नहीं लगेगा कि ये फिल्म में दिखाना क्या चाह रहे हैं। इंटरवल के वक्त आपके दिमाग में कई तरह के सवाल होंगे और उन सवालों का जवाब देगा फिल्म का सैकेंड हाफ। जी हां सैकेंड हाफ ही इस फिल्म की जान है। 'कांतारा' के क्लाइमैक्स सीन ने लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए थे लेकिन इस फिल्म में ऐसे कई सीन आएंगे जो ना सिर्फ आपके रोंगटे खड़े करेंगे बल्कि आपको देवता के आगे हाथ जोड़ने पर भी मजबूर करेंगे।

फिल्म को देखकर आपको एक अलग सी एनर्जी महसूस होगी, आपके अंदर एक फील गुड इमोशन का एहसास होगा।

कैसी है एक्टिंग

इस फिल्म के हीरो हैं ऋषभ शेट्टी और ये बात आपको बार-बार महसूस होगी। ऋषभ शेट्टी के किरदार को इस फिल्म में इतने मजबूत तरीके से दिखाया गया है कि आपको उनके आगे बाकी सब पानी कम चाय लगेंगे। गुलशन देवैया ने भी अपने रोल को काफी अच्छे तरीके से निभाया है लेकिन उनके कैरेक्टर को थोड़ा और गहराई दी जा सकती थी। कनकवती का रोल निभाने वाली रुक्मिणी वसंत ने भी अपने रोल को काफी संजीदगी और ईमानदारी से निभाया है और सैकेंड हाफ में तो उनका रोल और भी मजबूती पकड़ता हुआ आपको दिखाई देगा।

फाइनल रिव्यू

ये फिल्म एक मास्टरपीस कही जा सकती है। जहां कांतारा में सिर्फ एक क्लाइमैक्स ने लोगों के होश उड़ा दिए थे वहीं इस फिल्म का सैकेंड हाफ ही लोगों के होश फाख्ता करने के लिए काफी है। फिल्म का अगर पहला हाफ थोड़ा रोमांचक बनाया जाता तो ये फिल्म 5 में से 5 रेटिंग पाने की हकदार है। फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से इस फिल्म को मिलते हैं 4 स्टार।

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