सच्ची दोस्ती के नाम काई पो छे- फिल्म रिव्यू
कहानी- गुजरात में हुए दंगों पर आधारित 'काई पो छे' तीनों दोस्तों - इशान भट्ट (सुशांत सिंह राजपूत), ओमकार शास्त्री (अमित साध) और गोविंद पटेल (राजकुमार यादव)की कहानी बताती है। तीनों दोस्त अपने सपनों को सच करने के लिए नयी सदी में किस तरह की जद्दोजहद करते हैं इसे बहुत ही खूबसूरती के साथ दिखाया गया है फिल्म में। फिल्म की कहानी की शुरुआत होती है उस वक्त से जब भारत न्यूक्लियर पावर में आगे बढ़ रहा था। अहमदाबाद शहर में रह रहे तीन लड़कों के पास ये सबसे अच्छा वक्त था अपना बिजनेस शुरु करने का।
भारत जैसे देश में जहां क्रिकेट को धर्म माना जाता है वहां तीनों दोस्त मिलकर एक क्रिकटे ट्रेनिंग अकेडमी खोलने का प्लान करते हैं। ताकि वो क्रिकेट के क्षेत्र में अगले कुछ सुपरस्टार्स बना सकें। लेकिन इनकी किस्मत इनका साथ नहीं देती और इनका प्लान फ्लॉप हो जाता है। गोधरा में हुए दंगों की वजह से इनका प्लान मिट्टी में मिल जाता है और तीनों को बहुत ही बुरे वक्त का सामना करना पड़ता है। लेकिन इनकी दोस्ती पहले की तरह ही मजबूत बनी रहती है।
'काई पो छे' दोस्ती, सपनों और पैशन की कहानी है। फिल्म की कहानी कभी आपको हंसाएगी तो कभी रुलाएगी। लेकिन फिल्म में सच्चाई हर कदम पर आपको नज़र आएगी। फिल्म में आम इंसान का क्रिकेट, सिनेमा और पॉलिटिक्स के प्रति पागलपन साफ देखने को मिलेगा। फिल्म में कहीं पर भी ओवर ड्रामा नहीं दिखाई देगा। पूरी फिल्म हकीकत के धरातल पर तैयार की गयी है।
अभिनय- अभिषेक कपूर ने एख बार कहा था कि बॉलीवुड का कोई भी बड़ा एक्टर उनकी फिल्म में काम नहीं करना चाहता है। लेकिन फिल्म को देखने के बाद हम कह सकते हैं कि इन तीन नये चेहरों को लेकर अभिषेक ने कुछ भी गलत नहीं किया है। सुशांत सिंह राजपूत ने फिल्म में आउट ऑफ दि बॉक्स परफॉर्मेंस दी है। अमित साध ने अपने किरदार ओमी के साथ पूरी इमानदारी निभाई है और राजकुमार यादव ने अपनी एक्टिंग स्किल्स से सभी को हैरान कर दिया है। कुल मिलाकर काई पो छे फिल्म को बेहतरीन बनाने में तीनों एक्टरों का जबरदस्त हाथ है।


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