Jatadhara Movie Review: 'धन पिशाचिनी' बनकर सोनाक्षी ने डराया, ओवरड्रमैटिक कहानी ने किया मजा खराब

Jatadhara movie review

Rating:
3.0/5

Jatadhara Movie Review: इन दिनों साउथ इंडियन फिल्मों का काफी क्रेज है और धीरे-धीरे बॉलीवुड सितारों का भी इंट्रेस्ट साउथ सिनेमा की ओर शिफ्ट होता नजर आ रहा है। हाल ही में सोनाक्षी सिन्हा की पहली तेलुगु फिल्म 'जटाधारा' में नजर आ रही हैं। अब आपको ये फिल्म देखनी चाहिए या स्किप करनी चाहिए, आइए इस रिव्यू में जानते हैं।

क्या है कहानी?

फिल्म 'जटाधारा' की कहानी एक रहस्यमयी 'पिशाच बंधन' के इर्द-गिर्द घूमती है - एक ऐसा बंधन जो सदियों पुराने खजाने की रक्षा के लिए बनाया गया था। जब कोई लालच में आकर इस बंधन को तोड़ देता है, तो जाग उठती है धन पिशाचिनी (सोनाक्षी सिन्हा), जो हर उस व्यक्ति को सजा देती है जो खजाने के पीछे जाता है।

यहां एंट्री होती है घोस्ट हंटर शिवा (सुधीर बाबू) की, जो शुरुआत में आत्माओं और भूतों में विश्वास नहीं करता। लेकिन जैसे-जैसे वह इस रहस्यमयी दुनिया में उतरता है, उसके विश्वास और तर्क के बीच टकराव शुरू हो जाता है। आगे की कहानी में शिवा की यह यात्रा डर, आस्था और अलौकिक शक्तियों के बीच का एक रोमांचक अनुभव बन जाती है।

कैसी है फिल्म?

'जटाधारा' सिर्फ एक डराने वाली फिल्म नहीं है, बल्कि यह विज्ञान, आस्था और मिथकों का एक दिलचस्प कॉम्बिनेशन है। फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी है, लेकिन इंटरवल के बाद कहानी थोड़ी स्पीड पकड़ती है और रहस्य गहरा होता जाता है।

फिल्म के कुछ सीक्वेंस- जैसे मंदिर के सीन, अनुष्ठान और क्लाइमैक्स में शिव तांडव- बेहद शानदार हैं। कहानी आपको सोचने पर मजबूर करती है कि क्या भूत सच में होते हैं, या सब सिर्फ हमारे डर की कल्पना है?

कैसी है एक्टिंग?

सुधीर बाबू ने शिवा के किरदार में गजब की ईमानदारी और दमखम दिखाया है। उनके एक्शन सीन और इमोशनल सीक्वेंस दोनों ही कमाल के लगे हैं। सोनाक्षी सिन्हा ने 'धन पिशाचिनी' के रूप में एक अलग ही अंदाज पेश किया है। उनके डायलॉग कम हैं, लेकिन उनके एक्सप्रेशन काफी अच्छे हैं। दिव्या खोसला फिल्म में खूबसूरती और शांति का बैलेंस लाती हैं, जबकि शिल्पा शिरोडकर और इंदिरा कृष्णा ने अपने किरदारों को संजीदगी से निभाया है।

कैसा है डायरेक्शन?

वेणकट कल्याण और अभिषेक जायसवाल ने फिल्म को मॉडर्न सोच और प्राचीन मान्यताओं के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश के साथ बनाया है। कैमरा वर्क और सिनेमेटोग्राफी अच्छी है- खासतौर पर मंदिरों, केरल के नजारों और रिच लाइटिंग के साथ शूट किए गए सीन विजुअली बहुत अच्छे हैं।

फाइनल रिव्यू

'जटाधारा' एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ डराने के लिए नहीं, बल्कि सोचने पर मजबूर करने के लिए बनी है। यह फिल्म अंधविश्वास और लॉजिक, दोनों को एक साथ चलाती है। हालांकि फिल्म का पहला हिस्सा थोड़ा धीमा है और कुछ सीन में मेलोड्रामा ज्यादा लगता है, लेकिन दूसरा हाफ इसे संभाल लेता है। अगर आपको सुपरनैचुरल, माइथोलॉजिकल और स्पिरिचुअल थ्रिलर पसंद हैं, तो 'जटाधारा' देख सकते हैं। फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से इस फिल्म को दिए जाते हैं तीन स्टार।

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