Jana Gana Mana review: पब्लिक प्लेस पर मिली लाश, पुलिस ने केस भी सुलझाया लेकिन कोर्टरूम में सामने आया कुछ और..

Rating:
3.5/5

Jana Gana Mana Malayalam movie review: पिछले काफी समय से लोगों में साउथ सिनेमा को लेकर काफी दिलचस्पी बढ़ी है, खासतौर पर मलयालम सिनेमा को लेकर। इस सिनेमा ने फिल्मों की एक ऐसी दुनिया बनाई है, जिसे देखने के बाद लोग दांतों तले उंगलियां दबा रहे हैं। अगर आप भी मलयालम सिनेमा को एक्सप्लोर करना चाहते हैं तो हम आपकी मदद करेंगे और बताएंगे मलयालम सिनेमा का AtoZ.

Jana Gana Mana review

जी हां, हमने अब तक अभी तक हमने A- Aavesham, B- Bhoothkaalam, C- Cold Case, D- Drishyam, E- Eko, F- Family, G- Golam, H- Hridyam, I- Iratta का रिव्यू किया है और आज हम आपके लिए J- Jana Gana Mana का रिव्यू करने जा रहे हैं।

यह फिल्म 28 अप्रैल 2022 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म के लीड रोल में हैं- पृथ्वीराज सुकुमारन, सुराज वेंजारामूडू और ममता मोहनदास। इस फिल्म को डायरेक्ट किया है दीजो जोस एंटनी ने। यह फिल्म एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर मूवी है।

क्या है कहानी?

फिल्म की शुरुआत एक कॉलेज प्रोफेसर सभा मरियम की दर्दनाक हत्या से होती है। जिसकी लाश को पब्लिक प्लेस में छोड़ दिया जाता है, ताकि ये सिर्फ हत्या ना लगे बल्कि इस मर्डर से लोगों को मैसेज भी पहुंचे। इस घटना के बाद देशभर में गुस्सा फैल जाता है। कॉलेज के स्टूडेंट विरोध करते हैं और मामला नेशनल बहस का मुद्दा बन जाता है।

केस की जांच की जिम्मेदारी ACP सज्जन कुमार (सुराज वेंजारामूडू) को सौंपी जाती है। पहले हिस्से में दिखाया जाता है कि पुलिस जांच होती है और पुलिस कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लेती है और लोगों को लगता है कि न्याय मिल गया है। लेकिन सज्जन कुमार को पता है कि लोगों को जो दिखाया जा रहा है, वो गलत है और कुर्सी पर बैठे कुछ लोगों के लिए असली मुद्दे को दबाया जा रहा है और नई कहानी को जन्म दिया जा रहा है। देश को छोड़कर कुर्सी पर ध्यान दिया जाता है।

इंटरवल के बाद कहानी कोर्टरूम ड्रामा में बदल जाती है, जहां वकील अरविंद स्वामीनाथन (पृथ्वीराज सुकुमारन) की एंट्री से पूरा मामला नया मोड़ लेता है। जैसे-जैसे सच्चाई सामने आती है, दर्शकों की सोच भी बदलने लगती है। फिल्म कई सामाजिक सवाल उठाती है- क्या भीड़ का फैसला ही न्याय है? क्या मीडिया ट्रायल सच को बदल सकता है?

कैसी है फिल्म?

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका टॉपिक है। यह एंटरटेनमेंट के साथ-साथ सोचने पर मजबूर करती है। स्क्रीनप्ले तेज है और कई जगह ट्विस्ट दर्शकों को बांधे रखते हैं। हालांकि, फिल्म का रनटाइम थोड़ा लंबा है और कुछ कोर्ट सीन जरूरत से ज्यादा ड्रमैटिक लग सकते हैं। क्लाइमैक्स में सीक्वल की झलक कहानी को थोड़ा खींचती हुई महसूस होती है। बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी फिल्म के माहौल को मजबूत बनाते हैं। कई सीन इमोशनल असर छोड़ते हैं।

कैसी है एक्टिंग?

पृथ्वीराज सुकुमारन दूसरे हाफ में पूरी तरह छा जाते हैं। उनके कोर्टरूम मोनोलॉग दमदार हैं और स्क्रीन प्रेजेंस शानदार है।

सुराज वेंजारामूडू ने एक जटिल पुलिस अधिकारी की भूमिका में बेहतरीन संतुलन दिखाया है। उनका किरदार फिल्म की रीढ़ की तरह है।

ममता मोहनदास ने सीमित स्क्रीन टाइम में भी प्रभाव छोड़ा है। सहायक कलाकारों का अभिनय भी कहानी को मजबूती देता है।

फाइनल रिव्यू

जना गण मन एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि बहस भी पैदा करती है। इसमें कुछ खामियां जरूर हैं- जैसे लंबाई और कुछ हिस्सों की ओवर-ड्रामेटिक प्रेजेंटेशन लेकिन मजबूत अभिनय और प्रासंगिक मुद्दों की वजह से यह फिल्म असरदार बन जाती है। अगर आप सामाजिक-राजनीतिक थ्रिलर पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए जरूर देखने लायक है।

कहां देख सकते हैं

इस फिल्म को आप OTT प्लैटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं। इस फिल्म को IMDb पर 8.3 रेटिंग मिली है। जो कि एक काफी अच्छी रेटिंग है।

More from Filmibeat

Read more about: Malayalam Movie Review
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+
X