Housefull 5 Review: बहुत लंबी स्टारकास्ट ने बनाई फिल्म की खिचड़ी, मर्डर मिस्ट्री के अलावा कुछ नया नहीं

Housefull 5 Review: जब कॉमेडी फिल्मों की फ्रेंचाइजी की बात की जाती है तो 'हाउसफुल' का नाम जरूर और सबसे पहले लिया जाता है। 6 जून को इस फिल्म की फ्रेंचाइजी की पांचवी किश्त रिलीज हुई है। लेकिन क्या ये फिल्म आपको देखनी चाहिए या स्किप करनी चाहिए, आइए इस रिव्यू में जानें।
क्या है कहानी
मल्टीस्टारर फिल्म हाउसफुल की कहानी एक क्रूज पर शुरू होती है, जहां एक बेहद अमीर आदमी रंजीत अपने 100वें जन्मदिन की आलीशान पार्टी देना चाहता है। लेकिन जश्न की रात आने से पहले उसकी मौत हो जाती है। सारी प्रॉपर्टी रंजीत की दूसरी बीवी के बेटे को मिलने ही वाली थी कि रंजीत की वकील बताती है कि रंजीत की पहली बीवी से भी एक बेटा है, जिसका नाम जॉली है और वो ही इस प्रॉपर्टी का असली मालिक होगा। वो भी इस क्रूज में अपने पिता का जन्मदिन मनाने आने वाला है।
कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब क्रूज पर एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन-तीन जॉली आ जाते हैं, वो भी अपनी विदेशी बीवियों के साथ। पहला जॉली बनकर आते हैं रितेश देशमुख, दूसरा जॉली बनकर आते हैं अभिषेक बच्चन और तीसरा जॉली बनकर आते हैं अक्षय कुमार। अब माजरा ये है कि असली जॉली कौन है तो इसके लिए तीनों का DNA टेस्ट करवाया जाता है। लेकिन जिस डॉक्टर को DNA करना होता है, उसका ही मर्डर कर दिया जाता है। अब ये मर्डर किसने किया और क्यों किया... ये आपको फिल्म देखने के बाद पता चलेगा।
कैसी ही फिल्म
इस फिल्म की कहानी एंटरटेनिंग है, लेकिन इस फिल्म में मर्डर मिस्ट्री को छोड़कर कुछ नया नहीं है। जोक्स में नयापन नहीं है। फिल्म आपको थोड़ी खिंची-खिंची लग सकती है और कई मौकों पर आकर आपको थोड़ी कन्फ्यूजन भी हो सकती है।
इस फिल्म में इतनी लंबी स्टारकास्ट है कि पूरी फिल्म में एक्टर्स की एंट्री हो रही है और हर आधे घंटे में आपको एक नया चेहरा देखने को मिल सकता है। इस फिल्म को नोस्टैलजिक बनाने की कोशिश भी की गई है और पहले की हाउसफुल से कुछ सीन को इस मूवी के साथ जबरदस्ती जोड़ने की कोशिश की है।
फिल्म के फर्स्ट हाफ का शुरुआत का एक घंटा काफी अच्छा है लेकिन बाद में कहानी में बोरियत आनी शुरू हो जाती है। वहीं सेकेंड हाफ में जब कहानी में नाना पाटेकर की एंट्री होती है तो वहां से कहानी थोड़ी ग्रिपिंग होनी शुरू होती है। हालांकि, इस फिल्म में सौंदर्या शर्मा को क्यों रखा गया है, ये पता नहीं चल पाया है। वो इस फिल्म में एक एक्स्ट्रा कलाकार होने के अलावा कोई और योगदान नहीं दे पाई हैं।
कैसी है एक्टिंग?
फिल्म की लीड कास्ट जैसे अक्षय, रितेश और अभिषेक के अलावा सबका काम बिलो एवरेज रहा। हालांकि, नाना पाटेकर इस फिल्म में काफी दमदार अंदाज में दिखाई दिए हैं। लेकिन बाकी एक्टर्स से उनकी क्षमता के हिसाब से बेहद कम काम लिया गया है और उन्हें कैमरा स्पेस भी काफी कम दिया गया है।
फिल्म में कई एक्टर्स ऐसे भी थे, जो अगर इस फिल्म में ना भी होते तो भी काम चल ही जाता। जैसे- सौंदर्या शर्मा, डिनो मोरिया, चंकी पांडे, निकितन धीर आदि। संजय दत्त और जैकी श्रॉफ फिल्म में काफी ओवर एक्टिंग करते नजर आए।
फाइनल रिव्यू
इस फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है जो आपको अपनी तरफ खींचे। लेकिन अगर आपको अक्षय, रितेश और अभिषेक की कॉमिक टाइमिंग पसंद है तो आप ये फिल्म देख सकते हैं। लेकिन इसके अलावा इस फिल्म में देखने लायक कुछ भी नहीं है। फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से इस फिल्म को मिलते हैं 2.5 स्टार।


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