'हिट: द फर्स्ट केस' रिव्यू: कमजोर क्लाईमैक्स का शिकार बनी राजकुमार राव की ये संस्पेंस थ्रिलर
निर्देशक- शैलेश कोलानु
कलाकार- राजकुमार राव, सान्या मल्होत्रा, शिल्पा शुक्ला, दिलीप ताहिल, मिलिंद गुनाजी
एक सस्पेंस थ्रिलर फिल्म के लिए दो अनिवार्य बातें होती हैं, गुनहगार तक पहुंचने का रास्ता और गुनहगार के गुनाह करने की वजह। 'हिट' यहां पहले हिस्से में 100 में से 100 अंक पाती है, तो दूसरे में 50। फिल्म का फर्स्ट हॉफ बहुत ही मजबूत, दिलचस्प और बंधा हुआ है। लेकिन क्लाईमैक्स तक जाते जाते 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया' वाला हाल मालूम पड़ता है।
साल 2020 में इसी नाम से आई तेलुगु फिल्म की आधिकारिक रीमेक है 'हिट'। शैलेश कोलानु ने ही दोनों फिल्मों का निर्देशन किया है, लिहाजा फिल्म के कुछ हिस्सों को छोड़कर उन्होंने कहानी के साथ ज्यादा छेड़छाड़ नहीं है। एक गुमशुदा लड़की की तलाश के इर्द गिर्द घूमती इस कहानी को दर्शकों ने बहुत पसंद किया था। खासकर फिल्म की पटकथी और परफॉमेंस को पॉजिटिव प्रतिक्रिया मिली थी। लेकिन उसकी रीमेक में निर्देशक ने वो पकड़ खो दी है।

कहानी है विक्रम (राजकुमार राव) की, जो HIT (होमीसाइड इंवेस्टिगेटिव टीम) का अफसर है। विक्रम अतीत से जुड़ी एक घटना की याद से हर दिन जूझ रहा है, जब उसकी आंखों के सामने किसी की हत्या कर दी गई थी। उसकी सेहत का ख्याल करते हुए विक्रम की डॉक्टर और उसकी प्रेमिका नेहा (सान्या मल्होत्रा) उसे कुछ समय के लिए ड्यूटी से छुट्टी लेने की सलाह देते हैं। वह छुट्टी पर होता है कि जब उसे जानकारी मिलती है कि नेहा मिसिंग है। सिर्फ नेहा ही नहीं, बल्कि एक और लड़की प्रीति भी बीच हाईवे से गायब हो जाती है। इन दोनों केस को सुलझाते सुलझाते विक्रम का शक कई लोगों पर जाता है। जल्द ही उसे दोनों केस में समानता दिखने लगती है। लेकिन केस की कड़ी के अंत तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है। ऐसे में विक्रम किस तरह इस केस को सुलझाता है और उसे क्या क्या दांव पर लगाना पड़ता है.. इसी के इर्द गिर्द घूमती है कहानी।
लगभग दो घंटे सोलह मिनट लंबी यह फिल्म दमदार अभिनय और बांधे रखने वाली पटकथा के साथ फर्स्ट हॉफ में दिल जीतती है। पहली सीन से ही निर्देशक आपका ध्यान बांध लेते हैं और कहानी काफी तेजी से आगे बढ़ती है। हर किरदार सस्पेंस से भरा लगता है, लेकिन निर्देशक आपको कहानी के दूसरे छोर से बहुत ही सफलतापूर्वक दूर रखते हैं। लेकिन सेकेंड हॉफ में फिल्म कहानी के मामले में कमजोर पड़ने लग जाती है। फिल्म की पटकथा लिखी है शैलेश कोलानु ने, जबकि संवाद हैं गिरीश कोहली के।
लेखन, निर्देशन से लेकर तकनीकि स्तर पर भी फिल्म औसत से ऊपर है। एस मणिकंदन की सिनेमेटोग्राफी कहानी में नयापन जोड़ती है। गैरी बीएच की कसी हुई एडिटिंग फिल्म का एक पॉजिटिव पक्ष है। फिल्म का संगीत दिया है मिथुन और मनन भारद्वाज ने, जो कि औसत है।
अभिनय की बात करें तो राजकुमार राव एक उम्दा अभिनेता हैं और यहां भी उन्होंने ये साबित किया है। एक रफ एंड टफ अफसर के किरदार में वो दमदार लगे हैं, लेकिन किरदार के कमजोर पलों में हमदर्दी भी बटोर ले जाते हैं। कहना गलत नहीं होगा कि लंबे समय के बाद राजकुमार राव को इस अंदाज में देखना अच्छा लगता है। सान्या मल्होत्रा के हाथ यहां कुछ खास नहीं लगा है। सीमित समय में वह अपने किरदार के साथ न्याय करती हैं। वहीं, शिल्पा शुक्ला, दिलीप ताहिल, मिलिंद गुनाजी जैसे कलाकारों को भी निर्देशक ने खास मौका नहीं दिया है।
कुल मिलाकर, 'हिट द फर्स्ट केस' बॉलीवुड की बेस्ट सस्पेंस थ्रिलर्स में शामिल हो सकती थी, लेकिन निर्देशक के कुछ दांव अपर्याप्त रहे। राजकुमार की बेहतरीन अदाकारी के लिए फिल्म जरूर देखी जा सकती है। फिल्मीबीट की ओर से 'हिट' को 3 स्टार।


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