मल्लिका की गूंगी 'हिस्स' से भली देसी नागिन
निर्माता - गोविंद मेनन, विक्रम सिंह
कलाकार - मल्लिका शेरावत, इरफान खान, दिव्या दत्ता, जेफ डॉसिट
समीक्षा - फिल्म 'हिस्स' भारतीय दर्शकों की हीन ग्रंथि पर जबर्दस्त प्रहार करती है। 'हिस्स' को प्रचार इसलिए मिला था क्योंकि ये हॉलीवुड फिल्म थी लेकिन फिल्म को देखकर ये महसूस होता है कि हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती मतलब हर विदेशी माल अच्छा नहीं होता। हम भारतीय मान कर चलते हैं कि पश्चिमी देश हर मामले में हमसे बेहतर हैं लेकिन हिस्स इस मनोग्रंथि पर जोरदार प्रहार करती है। सिनेमाहॉल में मल्लिका की हॉलीवुड फिल्म देखने गया दर्शक हर सीन के साथ कहता है कि इससे तो देसी नागिन भली है। कम से कम बोलती तो है।
मल्लिका शेरावत की फिल्म 'हिस्स' ने शेरावत की पहचान को और सार्थक बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। बॉलीवुड में मल्लिका अपनी न्यूडिटी और भोंडेपन के बेबाक प्रदर्शन के लिए पहचानी जाती हैं। मल्लिका की फिल्म 'हिस्स' ने उनकी इस पहचान में कोई दाग नहीं लगाया है बल्कि ये सिद्ध कर दिया है कि देसी फिल्में हों या विदेशी मूवीज, वह इस तरह की स्टोरीज के लिए एकदम सही चुनाव हैं।
'हिस्स' किसी भी तरह उनकी पिछली फिल्मों से अलग नहीं है। मल्लिका ही इस फिल्म का केंद्रीय किरदार हैं। इसलिए जाहिर है कि फिल्म के मुख्य तत्व नग्नता और दिमागी दिवालियापन ही हैं। लेकिन इस फिल्म की निर्देशिका का हॉलीवुड से होना, फिल्म की कहानी के लिए सबसे ज्यादा हानि कारक सिद्ध हुआ है। निर्देशिका जेनिफर लिंच की बतौर निर्देशक ये पहली फिल्म है। 'हिस्स' में उनके अनाड़ीपन और नौसिखियेपन की भरपूर छाप पड़ी है।
'हिस्स' को देख कर ऐसा लगता है मानो फिल्म निर्माण करते समय पूरी यूनिट दिमाग से कोई काम नहीं लिया है। कहानी से लेकर, एक्टिंग तक और लोकेशंस से लेकर स्पेशल एफेक्ट तक सबमें एक उबाऊ नीरसता है जो सिनेमाहॉल जाने वाले दर्शकों को मल्लिका और निर्देशिका दोनों पर झुंझलाने के लिए मजबूर कर देती है। फिल्म में कमियों की गिनती नहीं है, मल्लिका को नग्नता से फुरसत नहीं मिली है और निर्देशिका ने उन्हे डायलॉग देने तक की जरूरत नहीं समझी है। पूरी फिल्म मल्लिका की नग्नता की खामोश और भोंडी कहानी बन कर रह गयी है।


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