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हिंदी मीडियम Review -थोड़ी गड़बड़ लेकिन इरफान और कहानी दोनों फिल्म के हीरो

Written By: Shweta
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Rating:
3.5/5

फिल्म - हिंदी मीडियम
स्टारकास्ट - इरफान खान, सबा कमर, दीपक डोबरियाल
डायरेक्टर - साकेत चौधरी
प्रोड्यूसर - भूषण कुमार, कृष्णन कुमार, दिनेश विजन
लेखक - जीनत लखानी,साकेत चौधरी, अमितोष नागपाल (डायलोग)
शानदार पॉइंट - विषय और परफॉर्मेंस
निगेटिव पॉइंट - इंटरवल के बाद फिल्म अपनी पकड़ खो देती है और कई जगहों पर नैरेशन है। क्लाइमैक्स भी और अच्छा हो सकता था।
शानदार मोमेंट - इरफान खान का फिल्म में परिचय का सीन,सबा के साथ उनके क्यूट नोक-झोक और ऐसे कई पल

प्लॉट

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राज बत्रा (इरफान खान) का खुद का चांदनी चौक पर गारमेंट स्टोर है जिसमें मशहूर डिजाइनर्स के 'असल डिजाइन' किए कपड़े मिलते हैं। वहीं दूसरी और राज बत्रा की पत्नी मीता उर्फ मीट्ठू (सबा कमा) अपनी लाइफस्टाइल को अंग्रेजीफाई करने में व्यस्त रहती है ताकि उनकी छोटी बेटी पिया का दाखिला दिल्ली के एक शानदार इंग्लिश स्कूल में हो सके। राज और मिट्ठू एक कोचिंग में भी जाते हैं ताकि वो वो काऊंसलिंग ले सकें कि कैसे उनकी बेटी का एडमिशन हो सकता है। इसके बाद जल्दी ही दोनों अपने पुश्तैनी मकान चांदनी चौक से वसंत बिहार में शिफ्ट हो जाते हैं और अपने देसी तौर तरीकों को छोड़ देते हैं। इसके बाद उनका काउंसलर उन्हें गरीब कोटा (Right to Education Act) लगाने की सलाह देता है।

प्लॉट

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अब गरीबी दिखाने के लिए बत्रा परिवार एक भरत नगर में शिफ्ट हो जाते और अपने पड़ोसी श्याम प्रकाश (दीपक डोबरियाल) से ट्रेनिंग लेते हैं जिन्हें इनकी असल सच्चाई और आर्थिक स्थिति के बारे में कुछ भी नहीं पता है। क्या इतना सब करने के बाद पिया का दाखिला एक अच्छे इंग्लिश मीडियम स्कूल में हो सकेगा।

डायरेक्शन

डायरेक्शन

साकेत चौधरी आज के समय के एक बेहद कॉमन विषय और दिलचस्प कहानी को उठाते हैं। हिंदी मीडियम की शुरूआत काफी मजेदार है और आपको हंसने के कई मौके मिलेंगे जिससे हर कोई खुद को कनेक्ट कर सकेंगे।फिल्म बताती है कि कैसे इंग्लिश भारत में सिर्फ भाषा नहीं बल्कि क्लास बताती है।दुर्भाग्यवश इंटरवल के बाद कहानी अपना वजूद खो देती है। डायरेक्टर कई सारी चीजें दिखाने की कोशिश करते हैं। इन सब के बाद आखिर में फिल्म एक जबददस्त प्रभाव नहीं छोड़ पाती है।

परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस

इरफान खान इस फिल्म की जान हैं। उन्हें कोई भी रोल मिल जाए वो इसमें बेहतरीन तरीके से फिट बैठते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग हो या पंचलाइन देनी हो आप दिल से हसेंगे। इस फिल्म में भी उन्होंने बिल्कुल एक साधारण इंसान से जबरदस्ती अमीर दिखने के दौरान बेहतरीन लगे हैं।
सबा कमर ने भी फिल्म में अपना काम बखुबी किया है। वो पुरानी दिल्ली का लहजा पकड़ने में कामयाब रही हैं। उनकी और इरफान खान की केमेस्ट्री बहुत ही अच्छी है।दीपक डोबरियाल भी हमेशा की तरह अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किए हैं। तिलोतमा शोमे भी अच्छी हैं लेकिन अमृता सिंह का किरदार ठीक से नहीं लिखा गया।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

अमितोष नागपाल के कॉमिक पंच के साथ डायलोग समाज पर तीखा कटाक्ष करते है और फिल्म को हल्के फुल्के तरीके अंदाज में एक गंभीर सच्चाई दिखाने में कामयाब होते हैं। लक्ष्मण उतेकर की सिनेमेटोग्राफी भी बहुत अच्छी है और एडिटिंग भी बिल्कुल अच्छी है।

 म्युजिक

म्युजिक

हिंदी मीडियम के गाने कुछ खास प्रभावित नहीं करते हैं लेकिन इश्क तेरा तड़पावे सुनने के बाद हर 90s का बच्चा आज भी इसपर झूम उठता है। इक जिंदड़ी फिल्म के हिसाब से बिल्कुल सटीक गाना है।

 Verdict

Verdict

फिल्म के कमजोर क्लाइमैक्स और कुछ गड़बड़ियों को छोड़ दें तो हिंदी मीडियम पूरी तरह से देखने वाली फिल्म है। खासकर इसमें इरफान खान का शानदार परफॉर्मेंस और अच्छा ह्यूमर देखना मजेदार है।

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    English summary
    Hindi medium movie review story plot and rating, know how the movie is.

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