हाईवे सफर है एहसासों का, महाबीर वीरा के प्यार का- फिल्म रिव्यू!
इम्तियाज अली की फिल्म हाइवे भले ही आपको बतौर फिल्म उतनी बेहतरीन ना लगे और ना ही आपको कोई सपनों का राजकुमार या लार्जर दैन लाइफ किरदार देखने को मिलें। लेकिन वीरा और महाबीर आपको कहीं ना कहीं खुद से जुड़े हुए लगेंगे। ये किरदार आपको जिंदगी के कुछ नये मायने सिखा देंगे। अक्सर शहर में रहकर हम नहीं समझ पाते कि हम क्या मिस कर रहे हैं। शहर से बाहर जाने के बाद ही शहर की सच्चाई आपको नज़र आती है। कहते हैं कि जीने के लिए जो चीजें सबसे ज्यादा जरुरी हैं वो तो हमें प्रकृति ने फ्री ही दी हैं। लेकिन हम इन फ्री चीजों को छोड़कर पैसों द्वारा खरीदी जाने वाली खुशियों को ही ज्यादा मह्त्व देते हैं। शहरों के बड़े बड़े घरों के अंदर भी कितनी गंदगी और कितना अधूरापन है ये हाइवे फिल्म में इम्तियाज ने अपने किरदार वीरा के जरिये दिखाने की कोशिश की है।
वीरा महाबीर जो कि समाज के दो बिल्कुल ही विपरीत समाज और परिवार से हैं। दोनों की परिस्थितियां उन्हें एक दूसरे से मिला देती हैं और फिर शुरु होता है हाईवे का सफर। इस सफर के दौरान ही दोनों किरदारों के बीच एक अनकहा सा रिश्ता बन जाता है जो कि धीरे धीरे अपना रुप बदलते हुए प्यार में तब्दील हो जाता है। लेकिन हाइवे के सफर के खत्म होने के साथ ही ये रिश्ता भी खत्म हो जाता है। कैसे शुरु हुआ ये रिश्ता और कैसे खत्म हो गया। क्या कहानी है महाबीर और वीरा की ये जानने के लिए तो आपको हाइवे फिल्म देखनी होगी। फिल्म अलग अलग लोगों पर अलग अलग ही प्रभाव छोड़ेगी लेकिन इतना जरुर है कि इम्तियाज ने जैसा कि अपने इँटरव्यू में कहा कि कुछ कहानियां आपके साथ ही चलती हैं, आपको छोड़ती नहीं। वैसा ही हाइवे देखने के बाद आपके साथ भी हो सकता है।
हाईवे का एक एक सीन बोलता है। एक एक सीन की अपनी कहानी है। इम्तियाज अली ने अलग अलग स्टेट्स को मिलाकर तीन घंटे का एक सफर रिकॉर्ड किया है और इस सफर में एक प्यारी सी कहानी डाली है वीरा-महाबीर की। ये सफर आपको भी अपने साथ लेकर चलेगा। साथ ही फिल्म का संगीत कहीं भी कहानी के साथ साथ बहता हुआ महसूस होगा।


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