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    फिल्म रिव्यू: हवाईज़ादा...इस हवाईजहाज़ ने उड़ान भरी ही नहीं!

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    आयुष्मान खुराना, पल्लवी शारदा और मिथुन चक्रवर्ती बिना पंखों के उड़ने की एक नाकाम कोशिश करने के बाद दर्शकों को निराश करते हैं। हवाईज़ादा एक उलझी हुई और बोरियत भरी कहानी है जिसे उतने ही फीके ढंग से परोसा गया है। फिल्म में अभिनय के नाम पर थोड़ी ओवरएक्टिंग है, ड्रामा के नाम पर चीखते चिल्लाते लोग।

    फिल्म कहानी है शिवकर बापूजी तलपड़े की जिन्हें भारत के राइट ब्रदर्स कहा जा सकता है। जी हां, शिवकर तलपड़े को सबसे पहला हवाई जहाज़ बनाने का श्रेय (नहीं दिया गया) देने की मांग की जाती रही है। और हवाईज़ादा उनके इसी सपने की कहानी है। फिल्म में शिवकर बापूजी तलपड़े का किरदार निभाते हैं आयुष्मान खुराना जो बिल्कुल फीके नज़र आते हैं।

    दर्शक किसी हवाईउड़ान की कल्पना करते हैं, इंतज़ार करते हैं कि कभी तो ये विमान उड़ान भरेगा लेकिन हवाईज़ादा निराश करती है। हालांकि फिल्म के कुछ पक्ष दर्शकों को काफी पसंद आए। देखिए हवाईज़ादा का ये रिव्यू -

    कहानी: सच होकर भी दमदार नहीं

    कहानी: सच होकर भी दमदार नहीं

    फिल्म की कहानी एक लड़के की है, अमीर लड़के की जिसे ज़िंदगी में केवल अपनी गर्लफ्रेंड से शादी करनी है। और वो गर्लफ्रेंड एक लाविणी डांसर है। लड़की के छोड़ देने के बाद हीरो को समझ आता है कि ज़िंदगी में कुछ करना चाहिए और शुरू होता है प्लेन बनाने का सपना। किसी भी लेजेंड की कहानी ऐसे नहीं बताई जाती कि वो शुरूआत में ही दम तोड़ दे।

    अभिनय, ओवरएक्टिंग और नो एक्टिंग!

    अभिनय, ओवरएक्टिंग और नो एक्टिंग!

    आयुष्मान खुराना को या तो ओवरएक्टिंग आती है या फिर बिल्कुल एक्टिंग नहीं आती। कुछ दृश्यों में उनके हाव भाव देखकर सिनेमा में दर्शक हंस रहे थे। और ये सीन सीरियस थे। पल्लवी के लिए कुछ करने को था नहीं। हां मिथुन दा से जो बन पड़ा वो उन्होंने किया है।

    निर्देशन: अच्छी कोशिश

    निर्देशन: अच्छी कोशिश

    विभू पुरी ने एक अच्छी कोशिश की है एक अच्छी फिल्म बनाने की। बस कुछ जगह वो बुरी तरह फेल हुए हैं लेकिन उनकी कोशिश एक निर्देशक के तौर पर काबिले तारीफ है।

    संगीत: क्यों बढ़ा दिया टाइम

    संगीत: क्यों बढ़ा दिया टाइम

    फिल्म का संगीत केवल फिल्म का टाइम खाता है। कुल मिलाकर फिल्म 167 मिनट की है और संगीत उतना ही थका हुआ। वहीं फिल्म में डाक टिकट छोड़कर कोई भी गाना दर्शकों को नहीं बांध पाता।

    मेकअप और सेट: पुराना भारत

    मेकअप और सेट: पुराना भारत

    फिल्म में 18वीं सदी का भारत दिखाने की कोशिश की गई है और काफी हद तक उसमें कामयाब भी होती है। हालांकि फिल्म तथ्यों के मामले पर भी मात खा जाती है। वहीं मिथुन चक्रवर्ती का मेकअप उनके किरदार की गरिमा को कम करता है।

     हिट या मिस!

    हिट या मिस!

    अगर आप आयुष्मान के फैन हैं तो फिल्म देख सकते हैं लेकिन अगर आप इतिहास के प्रशंसक हैं तो फिल्म मत देखिए वरना अपनी अपरिमार्जित भाषा के ज़िम्मेदार आप खुद होंगे। फिल्म में गल्तियां ही गल्तियां हैं। हमारी रेटिंग 2.5!

    English summary
    Hawaizaada is useless and boring as a story and Ayushmann Khurrana disappoints in yet another act which otherwise could be classic.
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