Haq Movie Review: तीन तलाक पर बनी 'हक' में यामी ने लूटा दिल, लेकिन डायरेक्शन के पेंच पड़े ढीले

Haq Movie Review: यामी गौतम एक बार फिर लौट आई हैं, अपनी एक नई फिल्म के साथ। इस बार उनके साथ नजर आ रहे हैं इमरान हाशमी। पहली बार स्क्रीन में इमरान और यामी एक साथ नजर आने वाले हैं। इस फिल्म में दिखाई जा रही है हक की कहानी। एक बीवी जिसे तीन तलाक दे दिया गया उसके हक की कहानी। लेकिन क्या आपको ये फिल्म देखनी चाहिए या स्किप करनी चाहिए, आइए इस रिव्यू में जानते हैं।
क्या है कहानी
इस फिल्म में दिखाया गया है कि एक नामी वकील अब्बास खान मौलवी की बेटी शाजिया बानो के साथ शादी करता है। दोनों में शुरुआत में तो बहुत प्यार होता है लेकिन धीरे-धीरे दोनों में दूरियां बढ़ने लग जाती हैं और हद तो तब हो जाती है जब शाजिया तीसरी बार प्रेग्नेंट होती है तो अब्बास दूसरी बीवी को ले आता है। ये देखकर शाजिया के पैरों तले जमीन खिसक जाती है।
अब्बास धीरे-धीरे दूसरी बीवी की तरफ खिंचा चला जाता है और शाजिया अकेली पड़ती जाती है और अब्बास अब शाजिया को समय देना भी बंद कर देता है और उससे बात-बात पर झगड़ने लगता है। इससे नाराज होकर शाजिया अपने तीन बच्चों को लेकर मायके चली जाती है। पहले तो अब्बास बच्चों के खर्चे के लिए पैसे भिजवाता है लेकिन फिर वो पैसे देना भी बंद कर देता है और शाजिया को एक सांस में तीन तलाक दे देता है।
इसके बाद शुरु होती है हक की लड़ाई, शाजिया के हक की... शाजिया के बच्चों के हक की... और हर उस औरत के हक की जिसे आदमी यूं ही लावारिस छोड़ देता है।
कैसी है फिल्म
फिल्म की कहानी में प्यार, धोखा और दगबाजी दिखाई है। इस धोखे के खिलाफ कानूनी जंग दिखाई है। एक औरत जब अपने पति के खिलाफ ही कोर्ट पहुंचती है तो समाज उसे किस नजर से देखता है, उस दर्द को दिखाया गया है। फिल्म का फर्स्ट हाफ शुरू से लेकर अंत तक एक जैसा है। कहानी में ठहराव है। पहले हाफ के बाद कहानी में कोर्ट रूम ड्रामा शुरू होता है और मूवी का अंत भी कोर्ट रूम ड्रामा पर ही खत्म होता है।
फिल्म की कहानी अच्छी है लेकिन थोड़ी तितर-बितर है। कई जगहों पर कहानी को संभालने की कोशिश की गई है लेकिन हो नहीं पाया। सस्पेंस का हिस्सा थोड़ा और बेहतर हो सकता था लेकिन हो नहीं पाया। फिल्म में कलाकारों की एक्टिंग तो शानदार है लेकिन कहानी के डायरेक्शन में कई जगहों पर काफी कमियां आपको दिख सकती है।
कैसी है एक्टिंग
इस फिल्म में लगभग हर किरदार ने बेहतरीन काम किया है। लेकिन जिसकी एक्टिंग ने इस फिल्म में जान फूंकी है वो हैं यामी गौतम। शाजिया बानो के रोल में वो खूब जंची हैं और उनकी उर्दू एकदम खालिस लगती है। इमरान हाशमी भी अपने रोल में कमाल के लगे हैं उनका शानदार अंदाज फिल्म में एक लेयर को जोड़ता है।
फाइनल रिव्यू
इस फिल्म में कहानी काफी सिंपल थी, जिसे काफी करीने से सजाकर पेश करने की कोशिश की गई है। फिल्म थोड़ी स्लो है, इसलिए शायद ये उन लोगों को पसंद ना आए जिन्हें फास्ट पेस फिल्में पसंद हैं। यामी गौतम और इमरान की एक्टिंग इस फिल्म की जान है। इसके अलावा फिल्म की डायरेक्श में थोड़ी और मेहनत हो सकती थी। ये फिल्म एक वन टाइम वॉच है, वो भी इसलिए क्योंकि ये फिल्म समाज को एक संदेश देती है। इस फिल्म को फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से मिलते हैं 2.5 स्टार।


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