प्यार में कमिटमेंट बिना नहीं होती हैप्पी एंडिग- फिल्म रिव्यू
ये रिश्ता कहां जा रहा है यूडी..कहीं जाना क्यों है..जहां है वहीं ठीक है ना। हैप्पी एंडिग के डायलॉग की ही तरह आजकल के युवाओं की सोच भी है। जिन्हें रिश्ते सिर्फ बनाने आते हैं, फिर वो कहां जा रहा है, उसे कहां तक लेकर जाना है इस बारे में वो सोचना ही नहीं चाहते या फिर इन सवालों को वो इग्नोंर कर देते हैं। रिश्ते बनाते वक्त सब अच्छा और खूबसूरत ही नज़र आता है मुश्किल तब आती है जब रिश्तो में कमिटमेंट की मांग आती है। कुछ ऐसे ही सवालों और जवाबों से जूझती है हैप्पी एंडिंग।
कहानी- फिल्म की कहानी युडी के इर्द गिर्द घूमती है जो कि एक बेहतरीन लेखक है लेकिन उसका करियर काफी बुरी स्थिति से गुजर रहा है। यूडी की निजी जिंदगी भी काफी मुश्किलों में है। उसका अपनी गर्लफ्रैंड कल्कि के साथ ब्रेक अप हुआ है। गोविंदा जो कि एक सुपरस्टार है उसका भी करियर काफी नीचे जा रहा है। गोविंदा यूडी को कहता है कि वो उसके लिए एक फिल्म की स्क्रिप्ट लिखे। यूडी के लिए ये आखिरी मौका है अपने करियर को बचाने का।
कहानी के लिए प्रेरणा की तलाश में यूडी की मुलाकात होती है इलियाना डी क्रूज से जो कि एक रोमांटिक नॉवेल लेखिका है। क्या यूडी को इलियाना से मिलकर अपनी स्क्रिप्ट पूरी कर पाता है। क्या यूडी प्यार में कमिटमेंट कर पाने में सफल हो पाता है। ये जानने के लिए तो आपको हैप्पी एंडिंग फिल्म देखनी होगी। कुल मिलाकर फिल्म की कहानी में काफी नयापन लाने की कोशिश की गयी है और किसी हद तक सफलता भी मिली है।


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