समीक्षा: दिल को झकझोर कर रख देगा 'हैदर' का पागलपन

By अंकुर शर्मा

फिल्‍म: हैदर
कलाकार: तब्‍बू, शाहिद कपूर, केके मेनन, श्रद्धा कपूर
निर्देशक: विशाल भारद्वाज
रेटिंग: 3.5 स्टार

समीक्षा: विशाल भारद्वाज की मोस्ट अवेटड फिल्म 'हैदर' आज सिनेमाघरों में पहुंच चुकी है। रहस्य, रोमांच और बदले की कहानी 'हैदर' ने समीक्षकों को काफी आकर्षक किया है। आज के दौर में जहां हर फ्राईडे एक फिल्म रिलीज होती है, जिसके बारे में लोग दो दिन में भूल जाते हैं, वहां फिल्म 'हैदर' लोगों को ठहर कर सोचने के बारे में कहती है।

शानदार फिल्म 'हैदर'

इसमें कोई शक नहीं कि विशाल ने एक शानदार और बेहतरीन फिल्म बनायी है जिसे लोग लंबे वक्त तक याद करेंगे। हां कुछ जगहों पर फिल्म कहीं-कहीं बोर होती है लेकिन फिर भी फिल्म बेहद शानदार हैं। फिल्म के हीरो शाहिद कपूर ने अपनी एक्टिंग से जता दिया है कि उनके अंदर महान अभिनेता पंकज कपूर का ही खून हैं। उनके संवाद, उनकी स्टाइल, उनका डांस, उनका दिल छू लेना वाला अंदाज वाकई में काफी दमदार है जिसके लिए उन्हें पूरे दस में दस नंबर मिलने चाहिए।

फिल्म के प्रमोशन के दौरान शाहिद ने हमेशा कहा कि यह फिल्म उनके दस साल के करियर की बेस्ट फिल्म है तो सही में आपको बता दें कि वाकई में यह उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्म है। फिल्म की जान अगर कोई है तो वो है अभिनेत्री तब्बू, जिनकी जितनी तारीफ की जाये वो कम ही है। उनकी एक्टिंग ने फिल्म को बेहतरीन बना दिया है। एक लाचार मुस्लिम महिला और बेबस मां का रोल उनसे अच्छा कोई नहीं निभा सकता था।

श्रद्धा कपूर ने भी अपनी तरफ से बेस्ट किया है। हालांकि उनके हिस्से में ज्यादा सींस नहीं थे लेकिन जितने भी थे वो उन्होंने भरपूर जिये हैं। अपने पिता और प्रेमी में से किसी एक चुनने की कश्मकश को श्रद्धा ने बखूबी निभाया है तो वहीं एक विलेन के रूप में केके मेनन लाजवाब है। विशाल ने एक टचिंग फिल्म बनायी है। कश्मीर की वादियां, लोकेशन, संगीत सब कुछ अव्वल दर्जे का है।

'हैदर' शाहिद के करियर की बेस्ट फिल्म!

कहना गलत ना होगा लंबे वक्त के बाद फिल्म 'हैदर' लोगों के बीच मेंसार्थक सिनेमा का खूबसूरत गिफ्ट है। यह एक क्लासिक सिनेमा है जिसे कमर्शियल दर्शक शायद ही पसंद करें। फिलहाल हमारी ओर से फिल्म को 3.5 स्टार।

कहानी: "हैदर" की एक भटके बेटे की कहानी है जो अपने पिता ( नरेन्द्र झा) के गायब होने की खबर सुनते ही पढ़ाई बीच में छोड़कर चला आता है। घर आने पर उसे कश्मीरी सेना से पता चलता है उसके पिता उग्रवादियों को पनाह देते थे जिसकी वजह से वो गायब हुए हैं और उसकी मां और उसके चाचा में नाजायज संबध है जिसकी वजह से वो सोचता है कि शायद उसके पिता के घर छोडने का कारण यह है।

'हैदर' विलियम शेक्सपियर के नाटक 'हेमलेट' का फिल्म रूपांतरण

इसलिए उसे अपनी मां से नफरत हो जाती है। लेकिन तभी अचानक खबर आती है कि हैदर के पिता की मौत हो गई है, जिसके कारण हैदर अपनी मां और चाचा से बदला लेने की सोचने लगता है। आखिर क्या होता है हैदर का, क्या वो जो सोच रहा है वो सही है या फिर सच कुछ और है इसे जानने के लिए आपको अपने नजदीकी सिनेमाघरों में जाना होगा फिल्म को देखने के लिए।

एक नजर हैदर की तस्वीरों पर..

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