Gustaakh Ishq Review: दमदार एक्टिंग के बावजूद बोरिंग हुई फिल्म, विजय वर्मा और फातिमा की बॉन्डिंग देखने लायक

Gustaakh Ishq Movie Review: गुस्ताख इश्क आज (28 नवंबर) सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह फिल्म रोमांस, शायरी, पुरानी यादों और दिल छू लेने वाली भावनाओं का एक खूबसूरत कॉम्बिनेशन पेश करती है। विजय वर्मा, फातिमा सना शेख और दिग्गज एक्टर नसीरुद्दीन शाह की इस फिल्म को आपको देखना चाहिए या स्किप करना चाहिए, आइए इस रिव्यू में जानते हैं।
क्या है कहानी
विभु पुरी के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म 90 के दशक की बैकग्राउंड पर बेस्ड है, वह दौर जब हाथ से लिखी चिट्ठियां, धीमे-धीमे पनपने वाला प्यार और दिल से निकली शायरी लोगों की जिंदगी का हिस्सा हुआ करती थीं। कहानी में विजय वर्मा एक जिद्दी और इमोशनल नौजवान का रोल निभा रहे हैं, नसीरुद्दीन शाह एक मशहूर शायर बने हैं जिनका अतीत रहस्यों से भरा है, और फ़ातिमा सना शेख उनकी बेटी का रोल निभा रही हैं जो अपने दिल और हालात के बीच फंसी हुई है।
कहानी 90 के दशक में सेट है। दिल्ली में रहने वाला नवाबुद्दीन (विजय वर्मा) अपने दिवंगत पिता की आखिरी निशानी- एक बंद होती प्रिंटिंग प्रेस को बचाना चाहता है। वह अपने पिता के जमाने के मशहूर शायर अजीज (नसीरुद्दीन शाह) की पुरानी कविताओं को दोबारा छापकर अपनी प्रिंटिंग प्रेस को बचाने का रास्ता ढूंढता है।
अजीज की शायरी से इंप्रेस होकर नवाबुद्दीन पंजाब में उनकी बेटी मन्नत (फातिमा सना शेख) के पास पहुंचता है। पहली मुलाकात में मन्नत नवाबुद्दीन को साफ मना कर देती है और बताती है कि अजीज अब लिखना बंद कर चुके हैं।
पर नवाबुद्दीन हार नहीं मानता। आखिरकार वह अजीज की दुकान तक पहुंचता है और असली मकसद छिपाकर उनसे शायरी सीखने की इच्छा जताता है। इस बीच नवाबुद्दीन मन्नत के लिए धीरे-धीरे कुछ महसूस करने लगता है। फिल्म का स्ट्रगल तब सामने आता है, जब अजीज को सच्चाई पता चलती है।
कैसी है फिल्म
फिल्म की कहानी साधारण है, लेकिन 90 के दशक का माहौल, रंग, म्यूजिक और शायरी फिल्म को एक अलग खूबसूरती देते हैं। शायरी और डायलॉग फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। हालांकि, पहला हाफ सिर्फ ठीक-ठाक है और उतना असरदार नहीं लगता। दूसरा हाफ भी धीमा है, जिसकी वजह से इमोशन का असर कम हो जाता है। म्यूजिक अच्छा है, पर याद रह जाने वाला नहीं। क्लाइमैक्स इमोशनल है, लेकिन पूरी जर्नी को यादगार नहीं बना पाता।
कैसी है एक्टिंग
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका स्टारकास्ट है। विजय वर्मा नवाबुद्दीन के किरदार में बेहतरीन लगते हैं। उनकी ईमानदारी और भावुकता स्क्रीन पर इंपैक्ट डालती है। फातिमा सना शेख मन्नत के रोल में मासूमियत लेकर आती हैं। विजय वर्मा के साथ उनकी केमिस्ट्री शानदार लगी है। नसीरुद्दीन शाह हर बार की तरह अपनी दमदार मौजूदगी से कहानी को ऊपर ले जाते हैं। शारीब हाशमी जैसे टैलेंटेड एक्टर को ठीक से इस्तेमाल नहीं किया गया।
फाइनल रिव्यू
गुस्ताख इश्क एक सिंपल और प्यारी रोमांटिक फिल्म है जिसमें बेहतरीन एक्टिंग, खूबसूरत शायरी और पुरानी यादों की छुअन है। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और धीमी रफ्तार के कारण यह उतनी प्रभावशाली नहीं बन पाती, जितनी बन सकती थी। फिल्म को बनाने की एक अच्छी कोशिश तो की गई है लेकिन बस औसत स्तर के लेवल पर ही दिल को छू पाती है, पर गहराई तक नहीं उतरती। फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से इस फिल्म को मिलते हैं 3 स्टार।


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