गली बॉय फिल्म रिव्यू: रणवीर सिंह और आलिया भट्ट आपको इस साल की बेस्ट फिल्म दे चुके हैं
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तराज़ू के बस दो थाल हैं - एक और हम, दूजे में ख्वाब हैं। ये लाइनें, ज़ोया अख्तर की गली बॉय के मुख्य किरदार मुराद (रणवीर सिंह) के ख्वाबों को अच्छे से बयान करती हैं। सारी गुत्थियों और उलझनों के बीच भी, इस युवा लड़के को अपने समाधान, सड़कों पर रैप करने से मिलता है। मुराद का मतलब होता है ख्वाहिशें। अपने नाम की ही तरह, मुराद की चाह है कि वो अपने इस जुनून को अपना करियर बनाए। लेकिन ये फूलों से भरा रास्ता नहीं होता। उसे समाज से लेकर वर्ग में बंटी इस दुनिया का सामना करना पड़ता है।
फिल्म के एक बेहद अहम सीन में मुराद एक रोती हुई अमीर लड़की की कार का ड्राईवर बना होता है और उसकी एक झलक गाड़ी के शीशे में देखता है। वो चाहता है कि उसे चुप कराए लेकिन नहीं करा पाता। जावेद अख्तर की बेहतरीन लाइनें इस पूरे सीन को आपके दिल में छोड़ जाएंगी - "तुमसे हमदर्दी भी नहीं कर सकता मैं, मेरे बस की बात नहीं है, मैं ये बहते आंसू पोछूं, उतनी मेरी औकात नहीं है"।

मुराद माचिस के डिब्बे जितने छोटे से कमरे में अपने पूरे परिवार के साथ, धारावी में रहता है। जब उसका मार पीट करने वाला पिता, घर में दूसरी बीवी ले आता है तो उसकी मां अपना गुस्सा और लाचारी दोनों ही निकालती है लेकिन उस औरत के साथ अपना सच स्वीकार करने की कोशिश करती है। वो औरत जो उम्र में उसके बेटे मुराद जितनी ही है।
मुराद की ज़िंदगी की इकलौती अच्छी और खास बात है उसके दोस्त और उसकी एक अपने आप में उलझी रहने वाली गर्लफ्रेंड सफीना (आलिया भट्ट) जो ये मानने से नहीं कतराती कि अगर कोई उसके बंदे पर डोरे डालने की कोशिश करेगा तो, "मेरे बॉयफ्रेंड से गुलू गुलू करेगी तो धोपतूंगी ही ना उसको"।
जहां सफीना एक बहुत ही मज़बूत किरदार के रूप में सामने आती है, उसके हिजाब के पीछे वो एक ऐसी लड़की है जो ज़िंदगी में नॉर्मल चीज़ें करना चाहती हैं - दोस्तों के साथ घूमना, लड़कों से बात करना, लिपस्टिक लगाना, बिना मां बाप के डर के।
वहीं दूसरी तरफ मुराद कभी कभी कागज़ पर गुस्से में कुछ कुछ लाइनें लिख कर अपने सारे इमोशन बाहर निकालता रहता है। जल्दी ही उसकी ये कला एक रैपर को पता चलती है। एमसी शेर (सिद्धांत चतुर्वेदी) मुराद को सलाह देता है कि अपने अंदर का लावा फटकर बाहर आने दे। मुराद इस बात पर डाउट करता है कि पब्लिक के सामने रैप कैसे करेगा तो एमसी उसे कहता है, " अगर दुनिया में सब कंफर्टेबल होते तो रैप कौन करता?"
जैसे जैसे समय निकलता है, मुराद अपने अंदर के रैपर को चीर फाड़ करके बाहर निकालता है और इसमें उसकी मदद करते हैं एमसी शेर और बर्कली की एक म्यूज़िक स्टू़डेंट स्काई (कल्कि कोचलिन)। मुराद गली बॉय बन जाता है। फिल्म में एक रैप की लाइन है, " जीवन जीवन दरिया दरिया, एक जो पार करो, दूसरा दरिया मिले"
गली बॉय के साथ ज़ोया अख्तर के हाथ में एक मास्टरपीस फिल्म है। उनका सधा हुआ निर्देशन इस फिल्म को बड़ी आसानी एक सफल कोशिश बनाता है और दर्शकों को फिल्म के साथ बहने में कोई दिक्कत नहीं आती है। जो फिल्ममेकर केवल अमीरों की कहानी कहने के लिए फेमस थीं उन्होंने इस बार गलियों की कहानी सुनाई है और किसी को निराश नहीं किया है।
हालांकि गली बॉय कहीं कहीं लंबी खिंचती है लेकिन इससे फिल्म पर कोई असर नहीं पड़ता है। वहीं मुराद और स्काई का ट्रैक फिल्म पर ज़्यादा असर नहीं छोड़ पाता है। अभिनय की बात करें तो रणवीर सिंह का शानदार प्रदर्शन आपका दिल जीत लेता और आप कहेंगे, "भाई तेरे जैसा कोई हार्डिच्च नहीं है।" मुराद के किरदार में रणवीर अपने एक एक इमोशन को आपसे जोड़ेंगे और आप उनके लिए लड़ना चाहेंगे।
"चलते चलते कहीं एक मोड़ आता है, सीधे रास्ते से बिल्कुल अलग, कोई दीवाना ही होता है जो उधर जाता है।" रणवीर सिंह इस फिल्म में वही दीवाना बने हैं। अपनी रील इमेज की तरह रणवीर अपनी फिल्मों में भी बेहतरीन चॉइस खोज रहे हैं और उन्हें सब कुछ धीरे धीरे मिल भी रहा है।
आलिया भट्ट, गली बॉय में रणवीर के किरदार का सपोर्ट बनती हैं। आप उनकी पंचलाइन अपने दिमाग से निकाल ही नहीं पाएंगे। वो हर फ्रेम में एकदम फ्रेश और कुछ नया लेकर आती हैं। सिद्धांत चतुर्वेदी इस साल की खोज हैं। उनका किरदार शेर एक सधा हुआ और शानदार डेब्यू है और कई जगह रणवीर सिंह से लाइमलाइट छीनता है।
जय ओज़ा के कैमरे से हर सीन में मुंबई की गलियों को बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। ऐसा लगता है कि ये गलियां बोलती हैं। वहीं नितिन बैद की एडिटिंग भी शानदार है। फिल्म की सपोर्टिंग कास्ट - विजय वर्मा, अमृता सुभाष, विजय राज़, विजय मौर्या सब एक बेहतरीन फिल्म पेश करते हैं।
फिल्म में मुख्य भूमिका निभाता है फिल्म का म्यूज़िक और गानों के बोल जो हर सिचुएशन को एक अलग ही तराज़ू में तोलते हैं। रणवीर सिंह रैप करने के लिए ही पैदा हुए और ये फिल्म इस बात का सुबूत है।
"कौन बोला, मुझसे ना हो पाएगा?" ये लाइन उन लोगों के लिए जो अपने सपने पूरे करने में डरते हैं। गली बॉय उनके लिए एक प्रेरणा है। फिल्म देखने के बाद आपका दिल भी आपसे बोलेगा, "अपना टाईम आएगा"। फिल्मीबीट की तरफ से फिल्म को चार स्टार।


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