अरशद वारसी, रोनित रॉय, अमित साध और अदिति राव हैदरी की फिल्म गुड्डू रंगीला आज परदे पर रिलीज हो रही है। फिल्म में हमारे समाज की एक ऐसी बुराई पर रौशनी डालेन का प्रयास किया गया है जो कि आज भी हमारे समाज को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है। हम अक्सर सुनते हैं कि गावो में दूसरी जाति में शादी करने पर लड़की-लड़के को जला दिया गया या काट दिया गया।
इसी बात को गुड्डू रंगीला में भी दिखाया गया है। जिसमें समाज में इस तरह की शादियां करने वालों को मारकर अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए रोनित रॉय-बिल्लू पहलवान आगे रहते है। वहीं अरशद वारसी जो कि खुद भी एक इंटरकास्ट शादी कर चुके हैं को रॉनित रॉय की इस गंदी सोच का सामना करना पड़ता है।
फिल्म की कहानी थोड़ी सी कंफ्यूजिंग रही लेकिन कुल मिलाकर रॉनित रॉय बाजी मार ले गये। आइये एक नज़र डालते हैं फिल्म के रिव्यू पर।
कहानी
गुड्डू रंगीला की कहानी कुछ यूं है कि फिल्म में बिल्लू पहलवान (रोनित रॉय) अने गाव में होने वाली इंटरकास्ट मैरिज के खिलाफ रहते हैं और अगर कोई भी ऐसी शादी करता है तो वो उसे मार देते हैं। रंगीला (अरशद वारसी) और गुड्डू (अमित साध) को पैसों की जरुरत होती है और उसी दौरान उन्हें एक कॉंट्रेक्ट मिलता है बेबी (अदिति राव हैदरी) को किडनैप करने का। किडनैप करने के बाद पता चलता है कि खुद बेबी ही ये सारी प्लानिंग करती है। अब इसके पीछे क्या वजह है और बिल्लू का इससे क्या ताल्लुक है ये जानने के लिए देखें गुड्डू रंगीला।
अभिनय
अरशद वारसी ने अच्छा अभिनय किया है। उनके एक्सप्रेशन, डायलॉग्स काफी अच्छे हैं। कॉमेडी डायलॉग्स में उनका परफेक्शन सामने आता है। रॉनित रॉय इस मामले में बाजी मार ले गये। गाव में अपनी ही धाक जमाने वाले बिल्लू के किरदार में रॉनित रॉय ने काफी बेहतरीन परफॉर्मेंस दिया है। अमित साध भी ठीक ठाक लगे और अदिति राव हैदरी बिना एक्सप्रेशन के ही नजर आई।
निर्देशन
गुड्डू रंगीला का निर्देशन थोड़ा और बेहतर हो सकता था। लोकेशन बेहतरीन थीं लेकिन कहानी में कहीं कहीं पर काफी कंफ्यूजन था।
संगीत
संगीत के मामले में भी गुड्डू रंगीला में ऐसे गाने नहीं थे जो कि दर्शकों की जुबां पर चढ़ जाएं।
देखें या नहीं
फिल्म एक बार देखने योग्य है। हमारी तरफ से गुड्डू रंगीला को 3 स्टार्स।


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