'गुड लक जेरी' रिव्यू- पैसा, पॉवर, हिम्मत और इमोशन की कहानी, जाह्नवी कपूर ने परफॉर्मेंस से जीता दिल

Rating:
3.5/5

निर्देशक- सिद्धार्थ सेन
कलाकार- जान्हवी कपूर, दीपक डोबरियाल, मीता वशिष्ठ, सुशांत सिंह, नीरज सूद, सौरभ सचदेवा, जसवंत सिंह दलाल
प्लेटफॉर्म- डिज्नी+हॉटस्टार

"भगदड़ में दबे पापा थे, लेकिन मर हम रहे हैं", जया कुमार यानि की जेरी कहती है। फिल्म की कहानी एक इमोशनल कड़ी से शुरु होती है, लेकिन धीरे धीरे ऐसे दिलचस्प किरदार जुड़ते जाते हैं कि आपके चेहरे पर हंसी बनी रहती है। 'गुड लक जेरी' एक डार्क कॉमेडी है जो कुछ कठिन सवाल पूछती है। यह आपको हंसाती है, साथ ही सोचने पर मजबूर करती है कि एक निश्चित वर्ग के लिए जीवन कितना कष्टप्रद हो सकता है।

पैसे की तंगी की वजह से जेरी ड्रग्स तस्करी की खतरनाक दुनिया से जुड़ जाती है। लेकिन मामला तब गड़बड़ हो जाता है कि, जब वो ये छोड़ने का फैसला करती है। आनंद एल राय के बैनर तले बनी 'गुड लक जेरी' तमिल फिल्म 'कोलामावु कोकिला' की आधिकारिक रीमेक है। बहरहाल, यदि आपने ओरिजनल फिल्म देखी भी है, तो भी 'गुड लक जेरी' आपको निराश नहीं करेगी।

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कहानी काफी खूबसूरत अंदाज में महिला सशक्तिकरण की भी बात करती है। जब जेरी की मां अपनी जिंदगी भाग्य भरोसे छोड़ने की बात करती है.. तो जेरी उनसे पूछती है कि क्या वो ऐसी ही बातें तब भी कहती यदि उनका बेटा होता! साथ ही विश्वास दिलाती है कि चाहे जो भी हो जाए वो उनके इलाज के लिए पैसों का जुगाड़ करके ही रहेगी।

कहानी

कहानी

बिहार के दरभंगा से पंजाब आई जेरी (जान्हवी कपूर) अपनी मां (मीता वशिष्ठ) और छोटी बहन चेरी के साथ मुश्किल से गुजर बरस कर रही होती है, जब एक दिन अचानक ही उसका सामना ड्रग बेचने वाले गिरोह से होता है। जेरी की शुरुआत जबरदस्ती होती है, लेकिन जल्द ही वो समझ जाती है कि जितने पैसों की उसे जरूरत है, वो उसे इसी काम से मिल सकते हैं। जेरी को अपनी मां के कैंसर के इलाज के लिए 20 लाख रूपयों की जरूरत होती है। लिहाजा, वो ना चाहते हुए भी ड्रग डीलिंग के धंधे से जुड़ जाती है। गिरोह वाले भी उसके काम से बेहद खुद होते हैं क्योंकि अपने मासूम शक्ल की वजह से जेरी पुलिस वालों को आसानी से झांसा दे देती है। लेकिन मुश्किल तब शुरु होती है, जब जेरी इस धंधे से निकलने का सोचती है। गिरोह के मुखिया द्वारा उसे और उसके परिवार वालों को जान से मारने की धमकी दी जाती है। लेकिन जैसा कि जेरी कहती है- "जितने हम दिखते हैं, उतने हैं नहीं".. वह गुंडों के सामने घुटने नहीं टेकती है और अपनी चालाकी से सबको चमका दे जाती है। लेकिन ये सब कैसे संभव हो पाता है.. ये देखना काफी मनोरंजक है।

अभिनय

अभिनय

जया कुमार उर्फ़ जेरी के किरदार में जान्हवी कपूर ने शानदार प्रदर्शन किया है। सीधी सादी मासूमियत से भरी लेकिन हिम्मती और चालाक अपने किरदार को जान्हवी मजबूती से स्थापित करती हैं। कहना गलत नहीं होगा कि जान्हवी अपनी हर फिल्म से साथ और दमदार होती जा रही हैं। इस फिल्म के इमोशनल दृश्यों में जान्हवी ने जैसे भाव दिखाये हैं, वो काफी प्रभावित करने वाला है। एक पल वो मासूम दिखती हैं, दूसरे ही पल अपने विरोधियों को मार गिराती हैं। फिल्म में उनके किरदार को एक बिहारी टोन दिया गया है, जहां वो थोड़ा लड़खड़ाती हैं, लेकिन अपने अभिनय से ये कमी छिपा लेती हैं। मीता वशिष्ठ और जान्हवी के साथ में कुछ बेहतरीन सीन्स हैं। वहीं, दीपक डोबरियाल, सुशांत सिंह, नीरज सूद, सौरभ सचदेवा, जसवंत सिंह दलाल.. सभी कलाकार अपने अपने किरदारों में खूब जमे हैं। फिल्म में कॉमेडी का डोज़ मुख्य तौर पर दीपक डोबरियाल के जिम्मे ही था और उन्होंने यहां कोई कसर नहीं छोड़ी है।

निर्देशन

निर्देशन

मोमो बनाकर बेचने वाली मां और दो बेटियों की कहानी को निर्देशन सिद्धार्थ सेन इतने मनोरंजक तरीके से परोसा है कि आप लगातार फिल्म से बंधे रहते हैं। आम तौर पर रीमेक बनाने के दौरान कहानी से इमोशनल टच खो जाता है। लेकिन यहां निर्देशक से उस बात का ख्याल रखा है। साथ ही अच्छी बात है कि फिल्म किरदारों को स्थापित करने में ज्यादा वक्त नहीं लेती है, बल्कि शुरुआती आधे घंटे में ही कहानी को मुख्य बिंदू तक ले जाया गया है। हां, कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी प्रेडिक्टेबल हो जाती है, लेकिन किरदार आपको कहानी से जोड़े रखते हैं। जान्हवी भले ही फिल्म की मुख्य कलाकार हैं, लेकिन अच्छी बात है कि निर्देशक ने स्क्रीन पर सहायक कलाकारों को भी पूरी जगह दी है।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

तकनीकी स्तर पर फिल्म मजबूत है। प्रकाश चंद्र साहू की कसी हुई एडिटिंग फिल्म को एक स्तर ऊपर ले जाती है। वहीं, रंगराजन रामबंद्रन की सिनेमेटोग्राफी आकर्षित करती है। पंजाब के खेतों, गलियों से लेकर घर के आंगन तक को उन्होंने बड़ी सूक्ष्मता के साथ कैमरे में कैद किया है। फिल्म के कॉस्ट्यूम डिजाइजिंग की भी तारीफ होनी चाहिए।

संगीत

संगीत

इस फिल्म के गाने पराग छाबड़ा द्वारा रचित हैं। गाने के बोल राज शेखर ने लिखे हैं, जो कि बेहतरीन हैं। फिल्म खत्म होने के बाद भी इसके गानों का प्रभाव कुछ वक्त तक रहता है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अमन पंत ने तैयार किया है। कहना गलत नहीं होगा कि फिल्म का संगीत कहानी को और मजबूत बनाता है।

रेटिंग

रेटिंग

इमोशन और कॉमेडी की सही मात्रा, अच्छी कहानी और दमदार स्टारकास्ट.. 'गुड लक जेरी' में यह सब कुछ मौजूद है। फिल्म एक इमोशनल सुर से शुरु होती है, लेकिन अंत तक ऐसी भागमभाग मचती है कि आप एक हंसी के साथ रह जाते हैं। फिल्म डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हो चुकी है और फैमिली के साथ बैठकर देखने के लिए यह परफेक्ट फिल्म है। जान्हवी कपूर अभिनीत 'गुड लक जेरी' को फिल्मीबीट की ओर से 3.5 स्टार।

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