कहीं फिल्म गोल हो न जाए गोल
धन धना धन गोल फ़िल्म अतुल अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित दूसरी फ़िल्म है. इस से पहले अतुल चॉकलेट का भी निर्देशन कर चुके हैं जो बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी. फ़िल्म फुटबाल खेल पर आधारित है. चक दे इंडिया के धमाके के बाद गोल के लिए दर्शकों में खासा उत्साह है.
कहानी:
साउथआल फुटबाल टीम जिसका कैप्टेन शान अली खान (अरशद वारसी) है और उसकी टीम बहुत संकट में है. यहाँ तक की जिस मैदान पर वो अभ्यास करते हैं वो भी लीज़ पर है. अपने फुटबाल क्लब और मैदान को बचाने के लिए साउथआल फुटबाल टीम को मैच जीतना है. शान की मदद से उनके कोच टोनी सिंह (बोमन इरानी) इस चैलेंज को स्वीकार करते हैं और खिलाड़ियों को तैयार करते हैं. खिलाड़ी भी ऐसे जिनमें उत्साह और लगन की कमी है.
सनी भसीन (जॉन अब्राहम) एक ऐसा खिलाड़ी है जिसके बहुत सपने हैं और एक अच्छा प्लेयर है लेकिन सिर्फ़ रंग भेद के कारण उसे सलेक्ट नही किया गया. टोनी सिंह सनी से बात करते हैं और साउथआल फुटबाल टीम की तरफ़ से खेलने के लिए राजी कर लेते हैं. लेकिन शान और सनी की आपस में बिल्कुल भी नही बनती. दूसरी तरफ़ शान की बहन रुमाना (बिपाशा बासु) सनी को चाहने लगती है. सनी अपने बेहतरीन खेल के प्रदर्शन से टीम और अपने साथियों का चहेता बन जाता है. और जैसे बगैर विलेन के हर कहानी अधूरी होती है तो धन धना धन गोल के भी विलेन जोनी बक्शी(दलीप ताहिल) की एंट्री होती है.
देखा जाए तो फ़िल्म एक साधारण ड्रामा है जिसे विवेक अग्निहोत्री ने बहुत ही उम्दा तरीके से निर्देशित किया है. जॉन ने अच्छा अभिनय किया है. अरशद वारसी हमेशा की तरह फ़िल्म पर छाए रहे. बोमन इरानी ने भी इस गंभीर रोल बहुत अच्छी तरह निभाया है. हालांकि बिपाशा का रोल छोटा रहा लेकिन हमेशा की तरह औसत रहा. फ़िल्म का दूसरा हॉफ और बेहतर हो सकता था. कुल मिलाकर धन धना धन गोल एक औसत फ़िल्म है जिसके बारे में इतना कहा जा सकता है की दर्शकों के टिकट के पैसे व्यर्थ नही जायेंगे.


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