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    'घूमकेतु' फिल्म रिव्यू- 2020 की ईद रिलीज लेकर आ गए नवाजुद्दीन सिद्दीकी, लेकिन मज़ा नहीं आया

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    Rating:
    2.0/5

    निर्देशक- पुष्पेन्द्र नाथ मिश्रा

    कलाकार- नवाजुद्दीन सिद्दीकी, अनुराग कश्यप, रघुबीर यादव, इला अरूण

    प्लेटफॉर्म- ज़ी 5

    'घूमकेतु' (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) लेखक बनना चाहता है और अपने ख्वाब पूरे करने की चाहत उसे मुंबई तक खींच लाती है। वह ब्लडी बाथरूम, सौलेती मां, दिलवाले दुल्हनिया दे जाएंगे जैसी कहानियां लिखता है और अपनी फिल्मों में सुपरस्टार्स को फिल्माना चाहता है। लेकिन किस्मत ने उसके लिए कुछ और ही क्लाईमैक्स सोच रखा है।

    Ghoomketu

    लॉकडाउन के दौरान सीधे ओटीटी पर रिलीज हुई है नवाजुद्दीन सिद्दीकी की 'घूमकेतु'। देखी जाए तो यह 2020 की ईद रिलीज है। लिहाजा, फिल्म से कुछ उम्मीदें भी थीं। लेकिन क्या यह उम्मीदों पर खरी उतरती है?

    फिल्म में घूमकेतु का संवाद है- "ये कॉमेडी बहुत कठिन चीज है, लोगों को हंसी आनी भी तो चाहिए...." शायद निर्देशक पुष्पेन्द्र नाथ मिश्रा खुद ही यह बात भूल गए।

    फिल्म की कहानी

    फिल्म की कहानी

    मोहाना गांव के घूमकेतु को राइटर बनना है, फिल्म की कहानी लिखनी है। इस ख्वाब को पूरा करने के लिए वह गांव के अखबार 'गुदगुदी' के चक्कर काटता है। वहां उसे नौकरी तो नहीं मिलती, लेकिन एक सलाह मिल जाती है- कहानी लिखने के लिए संघर्ष जरूरी है। "30 दिनों में बॉलीवुड राइटर कैसे बनें" नामक किताब को साथ में रखकर वह जिंदगी में संघर्ष करने मुंबई भाग आता है। यहां वह फिल्म निर्माता को अपनी कहानियां सुनाता है। अपनी फिल्म में रणवीर सिंह, सोनाक्षी सिन्हा को लेने के सपने देखता है। शाहरुख की ऑफिस के चक्कर काटता है। रोमांटिक कहानी से लेकर, हॉरर, कॉमेडी सब ट्राई करता है। अंततः फिल्म निर्माता उसे 30 दिनों तक का वक्त देता है कि वो कोई अच्छी सी कहानी लेकर आए। वहीं, दूसरी ओर घर से भागे घूमकेतु को पकड़ने का जिम्मा मिलता है पुलिस अफसर बदलानी (अनुराग कश्यप) को, जिसे 30 दिनों में किसी भी तरह घूमकेतु को पकड़ना है। अब इन 30 दिनों में घूमकेतु राइटर बन पाता है या उसे पुलिस पकड़ लेती है। इसी के इर्द गिर्द पूरी कहानी घूमती है।

    निर्देशन

    निर्देशन

    सीधे सपाट शब्दों में कहा जाए तो फिल्म का एक किरदार भी आपको 2 घंटों तक पकड़कर नहीं रख पाता। पुष्पेन्द्र नाथ मिश्रा के निर्देशन में बनी फिल्म की कहानी गांव की सादगी, एक अजीब परिवार, मुंबई नगरिया और बॉलीवुड से होकर गुजरती है। मुंबई में घूमकेतु का संघर्ष थोड़ी देर आपका ध्यान आर्कषित कर सकता है, लेकिन कमजोर संवाद उत्साह ठंडा कर देती है। निर्देशक के पास नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकार और कैमियो के लिए अमिताभ बच्चन जैसा नाम था, काश उन्होंने कहानी में नयापन डालने की भी कोशिश की होती। रंग बिरंगे कपड़े पहना घूमकेतु किसी घिसे पिटे फिल्म का दोहराया सीन लगता है। मोटी पत्नी, बुआ की डकार, सौतेली मां जैसी बातों पर हंसाने की कोशिश की गई है, जो अनमने ढ़ंग से लिखी गई लगती है।

    अभिनय

    अभिनय

    फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष है इसके कलाकार। खासकर नवाजुद्दीन सिद्दीकी, इला अरूण और रघुबीर यादव ने अपने किरदार को पूरी सच्चाई से निभाया है। संतो बुआ के किरदार में इला अरूण का काम बेहतरीन है। वह हंसाती हैं और कहानी की डोर को एक ओर से थामे रखती हैं। वहीं, अमिताभ बच्चन का कैमियो आपको खुश कर सकता है। बिग बी के आते ही फिल्म में अचानक चमक आ जाती है, कहानी में भारीपन आता है। नवाजुद्दीन ने फिल्म को अपने कंधों पर उठाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन कमजोर लेखन ने उनका साथ नहीं दिया।

    तकनीकि पक्ष

    तकनीकि पक्ष

    यह फिल्म 4-5 साल पहले ही बन चुकी थी, लेकिन रिलीज नहीं हो पाई थी। अब लॉकडाउन में इसे सीधे ओटीटी पर रिलीज किया गया है। लिहाजा, फिल्म में ताजापन नहीं दिखता है। कैमियो में दिखे सितारे भी अपने सालों पुराने लुक में हैं। वहीं, फिल्म के संवाद भी औसत लगते हैं। पिछले 5 सालों में बॉलीवुड ने अपने कंटेंट पर बेहतरीन काम किया है। ऐसे में घूमकेतु जैसी फिल्म खो जाती है। फिल्म में सत्यराय नागपॉल की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है। उन्होंने मुंबई की भागमभाग और छोटे शहर की स्थिरता को अच्छा कैप्चर किया है।

    संगीत

    संगीत

    फिल्म में तीन गाने हैं, जिसमें से एक आइटम सांग है। फिल्म का संगीत दिया है स्नेहा खनवालकर और जसलीन रॉयल ने। खैर, फिल्म के बाद शायद ही आपको कोई गाने याद रहेंगे। अच्छी बात यह है कि गाने फिल्म के साथ साथ चलते हैं और कहानी को आगे बढ़ाते हैं।

    देंखे या ना देंखे

    देंखे या ना देंखे

    अपने ख्वाब के साथ घर से मुंबई भागा घूमकेतु कई भावनाओं से गुजरता है। उसे अपने परिवार का महत्व समझ आता है। फिल्म में एक अच्छी बात यह है कि वह अपने सपनों के साथ समझौता नहीं करता है, भले ही उसे पूरा का माध्यम बदल गया हो, लेकिन वह ख्वाब देखना नहीं छोड़ता। लेकिन इसके लिए 2 घंटे लंबी यह फिल्म देखना भी आसान नहीं है। फिल्मीबीट की ओर से घूमकेतु को 2 स्टार।

    English summary
    Nawazuddin Siddiqui, Anurag Kashyap and Raghubir Yadav starring Ghoomketu tries too hard to make you laugh, but fails. Film directed by Pushpendra Nath Misra.
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