Genius Movie Review: उत्कर्ष शर्मा की डेब्यू फिल्म जीनियस कतई नहीं है, न देखें तो अच्छा है

Rating:
1.0/5
Star Cast: उत्कर्ष शर्मा, इशिता चौहान, नवाजुद्दीन सिद्दकी, मिथुन चक्रवर्ती, आयशा झुलका
Director: अनिल शर्मा

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Genius Movie Review : Utkarsh Sharma | Nawazuddin Siddiqui |Ishita Chauhan | FilmiBeat

यहां सौदा नहीं संस्कार होते हैं और वो भी अंतिम, ये डायलॉग बोलकर उत्कर्ष शर्मा एक गद्दार ऑफिसर को आत्महत्या के लिए धमकाने की कोशिश करते हुए नजर आते हैं। ये सीन आपको सिरियस और खतरनाक लगने के बजाए मजाकिया लगता है। फिल्म जीनियस में ऐसे कई मोमेंट्स हैं जहां आपको लगेगा कि ये फिल्म आखिर बनाई ही क्यों गई। आपको असल में काफी जीनियस बनना पड़ेगा इस पूरी फिल्म और इसके अजीबो-गरीब डायलॉग को झेलने के लिए.. जो पूरी फिल्म में बॉम्ब की तरह ऑडिएंस पर गिराए जाएंगे।

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जीनियस की शुरूआत होती है पोरबंदर के एक अधूरे मिशन से जिसके चलके रॉ स्पेशल एजेंट वासुदेव aka वासु शास्त्री (उत्कर्ष शर्मा) विकलांग हो जाते हैं। लेकिन इस व्यक्ति की रगों में इतनी देशभक्ति भरी होती है कि अपने लंगडाते हुए पैर से वो साइकिल से एक पॉलिटिशन के तेजी से जाते हुए काफिले का पीछा करता है। उनकी गाड़ी पर लगे तिरंगे को ठीक करने के लिए। अपने सीनियर्स के द्वारा नाकाबिल घोषित किए जाने के बाद वासु इस मामले को अपने हाथ में लेने और मिशन पूरा करने का फैसला करता है।

लेकिन इसके पहले, फिल्म फ्लैशबैक में जाती है और आईआईटी कैंपस में पहुंचती है.. क्योंकि याद दिला दें कि हमारे हीरो के जीनियस साबित करना है। तो उसे देश के एक बड़े संस्थान का हिस्सा होना पड़ेगा। इसी बीच इंजीनियरिंग कॉलेज को लड़कों की जिंदगी में प्यार की कमी के मिथ को तोड़ने आ गए हैं जीनियस, जिन्हें पहली नजर में ही प्यार हो जाता है। ये लड़की होती है नंदनी (इशिता चौहान)। फिर शुरू करते हैं अपनी प्रेमलील, लड़की को इंप्रेस करने की कोशिश तो बहुत होती है लेकिन किस्मत खराब होती है और उन्हें अपना प्यार नहीं मिल पाता। दिल टूटने के बाद वासु फाइनली RAW ज्वाइन करने का डिसीजन लेता है। हालांकि उन्हें इस बात की खबर नहीं होती कि उनकी जिंदगी में नेमसिस एमआरएस (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) की एंट्री होने के साथ ही खतरनाक ट्विस्ट आने वाला है। ये भी अपने आपको जिनियस समझता है लेकिन पागल भी।

अनिल शर्मा की जीनियस भले ही पेपर पर थ्रिलिंग लगी हो लेकिन स्क्रीन पर किसी मजाक की तरह ही लगी है। याद है अब्बास मस्तान की मशीन.. अनिल शर्मा की लेटेस्ट डायरेक्टोरियल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। प्लॉट से लॉजिक गायब है और स्क्रीनप्ले पूरी फिल्म में भटकता रहता है। इस फिल्म में डायरेक्टर ने कई एलिमेंट को एक साथ दिखाने की कोशिश की है लेकिन कुछ भी ऑडिएंस को इंप्रेस नहीं कर सका है। जरूरत से ज्यादा डायलॉग ने और भी इरिटेट कर दिया।

उत्कर्ष शर्मा लॉन्च पैड उलझे हुए प्लॉट के साथ फुस्स पटाखे की तरह मालूम होती है। उत्कर्ष शर्मा के कमजोर कंधे इस उलझी हुई फिल्म का बोझ नहीं झेल पाते। रिबिक क्यूब हल करने से लेकर बॉम्ब डिफ्यूज करने और वैदिक मंत्र पढ़ने तक, इस फिल्म में उन्हें सुपरमैन की तरह दिखा डाला है। इशिका चौहान इस फिल्म में ग्लैमर मात्र के लिए हैं। वहीं तब सबसे बुरा लगता है कि जब नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे अभिनेता भी फिल्म में आलोचना का शिकार हो जाते हैं। वे हर सीन में ऑडिएंस की तरह ही कंफ्यूज्ड नजर आते हैं। मिथुन चक्रवर्ती और आएसा झूल्का को फिल्म में बेहद खराब लिखा रोल मिला है।

जहां एक तरफ फिल्म में एक्टिंग और डायरेक्शन फेल हो गया है वहीं फिल्म की शानदार लोकेशन ऑडिएंस को पसंद आई हैं। इस फिल्म का म्यूजिक अच्छा है लेकिन गाने मिसप्लेस हैं और फिलर मात्र बन कर रह गए हैं।
फिल्म हैं एक डायलॉग है.. दिल से मैं खेलता नहीं और दिमाग से खेलने देता नहीं। दुख की बात है कि ना तो जीनियस ऑडिएंस का दिल जीत पाई और ना ही सीरियस सीन में इंप्रेस कर पाई। हमारी राय तो यही है कि अपने दिमाग की सेहत के लिए इस फिल्म को न ही देखें तो अच्छा है। हमारी तरफ से फिल्म के 1 स्टार।

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