Gaslight Review: रहस्य और रोमांच का पुराना फॉमूला, लेकिन इंप्रेस करते हैं सारा अली खान- विक्रांत- चित्रागंदा

निर्देशक- पवन कृपलानी
कलाकार- सारा अली खान, विक्रांत मैसी, चित्रागंदा सिंह, राहुल देव, अक्षय ओबेरॉय
प्लेटफॉर्म- डिज्नी+हॉटस्टार
मिस्ट्री- थ्रिलर फिल्मों की सबसे बड़ी जरूरत ये होती है कि अंत तक थ्रिल बना रहे और जो मुख्य आरोपी है उसका अंदाजा तक आप ना लगा पाएं। ऐसे में बॉलीवुड में दशकों से ऐसी फिल्में बनती आ रही हैं, जहां अंत में आरोपी वही निकलता है, जिसे निर्देशक शुरुआत से शक के घेरे से बाहर रखते हैं। जाहिर है अब ये फॉमूला काफी पुराना पड़ चुका है और बतौर दर्शक ये आपको बोर करता है। डिज्नी+हॉटस्टार पर रिलीज हुई फिल्म 'गैसलाइट' भी इस फॉमूले से अछूती नहीं रही।
व्हीलचेयर पर बैठी राजकुमारी मीशा (सारा अली खान) सालों बाद अपने महल मायागढ़ लौटती है ताकि वह अपने पिता से मिल सके। लेकिन वहां उसे पता चलता है कि उसके पिता कई दिनों से गायब हैं। उसे अपने पिता की दूसरी पत्नी रूकमणी (चित्रागंदा सिंह) पर संदेह है, जबकि उसकी रूकमणी समझती है कि मीशा भ्रम का शिकार है। लेकिन सच क्या है?
कहानी
हमें मीशा के अतीत के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया जाता, सिवाय इसके की वो एक दुर्घटना से जो बच गई थी, लेकिन उसने अपने दोनों पैर खो दिये थे। 15 साल बाद घर आई मीशा से रूकमणी पूछती है, "मैंने तुम्हारे बारे में जानने की कोशिश की थी, लेकिन तुम सोशल मीडिया पर भी नहीं हो। आज के समय में कैसे संभव है कि तुम्हारी कोई डिजिटल फुटप्रिंट नहीं है".. जहां मीशा को लेकर एक संशय की स्थिति बनी रहती है, वहीं वो महल में कुछ पैरानॉर्मल गतिविधियों का अनुभव करने लगती है, उसे संदेह है कि उसके पिता को मार दिया गया है। ऐसे में उसका साथ देता है कपिल (विक्रांत मैसी), जो उसके पिता का कामकाज संभालता है और उनके सबसे नजदीकी माना जाता था।
निर्देशन व तकनीकी पक्ष
पवन कृपलानी की मिस्ट्री-थ्रिलर शुरुआत से ही एक लय बनाकर रखती है। किरदारों को काफी दिलचस्पी के साथ स्थापित किया जाता है। लेकिन फिल्म असफल होती है सस्पेंस पैदा करने में। फिल्म में भय पैदा करने के वही सालों पुराना फॉमूला इस्तेमाल किया गया है, सुनसान जगह पर कदमों की आहट, चरमराते दरवाजे, पन्ने फड़फड़ाना, अचानक बिजली बंद होना आदि.. ऊपर से पुराना महल और इसके खाली कमरे बाकी कसर भी पूरी कर देते हैं। खैर, पूरी फिल्म में एक तरह की शांति रहती है, जो इसे दूसरों से अलग बनाती है। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी बहुत अच्छी है। इसके कैमरा वर्क को पूरे अंक मिलते हैं.. और प्रोडक्शन डिजाइन के लिए भी यही कहा जा सकता है। कमजोर पटकथा के बावजूद फिल्म अपीलिंग लगती है।
अभिनय
अभिनय की बात करें तो सारा अली खान ने इस फिल्म में अपने डायलॉग डिलेवरी और हाव भाव पर काफी काम किया है। वो अपने किरदार में सहज दिखती हैं। विक्रांत मैसी एक दमदार एक्टर हैं, लिहाजा उन्होंने यहां भी अपना परफेक्ट देने की कोशिश की है। हालांकि वो बेहतर स्क्रिप्ट के हकदार थे। चित्रागंदा सिंह ने अपना किरदार बखूबी निभाया है। कह सकते हैं कि रूकमणी के किरदार में उनके अलावा आप किसी और को नहीं सोच पाएंगे। राहुल देव और अक्षय ओबेरॉय अपने संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण किरदारों में ध्यान खींचते हैं।
रेटिंग
कुल मिलाकर, एक औसत पटकथा के बावजूद गैसलाइट आपको थोड़ी थ्रिल और अच्छे प्रदर्शन से बांधकर रखती है। यदि आपको मिस्ट्री- थ्रिलर शैली पसंद है, तो आप इसे एक बार देख सकते हैं। फिल्म 31 मार्च से डिज्नी+हॉटस्टार पर उपलब्ध है। फिल्मीबीट की ओर से गैसलाइट को 2.5 स्टार।


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