लव का नहीं, सारे मनोरंजन का द एंड

निर्देशक : बंपी
कलाकार : श्रध्दा कपूर, तहा शाह, शहनाज ट्रेजरवाला
रेटिंग : 2 स्टार
हाल की फिल्मों पर ध्यान दें तो ऐसी कई फिल्मों का निर्माण हो रहा है जो युवाओं पर आधारित है। फिल्म के शीर्षक से यही अनुमान लगाया जाता है कि फिल्म में बहुत मस्ती होगी, लेकिन इन फिल्मों को देखने के बाद दर्शकों को निराशा ही हाथ लगती है। दरअसल, यह फंडा बन चुका है कि फिल्म का शीर्षक दर्शकों को लुभाने के लिए रखा जाता है, लेकिन बाद में फिल्म की कहानी बिल्कुल खोखली नजर आती है।
गौर करें तो हाल ही में रिलीज हुई फिल्म लव का द एंड इसी क्रम में एक निराशाजनक फिल्म है। फिल्म के शीर्षक ने निश्चित तौर पर युवा दर्शकों को आकर्षित किया होगा, लेकिन फिल्म में कुछ भी नया या युवा नहीं है। इसके निर्माताओं व निर्देशकों को इस बात से तो वाकिफ रखना ही चाहिए कि आज के दर्शक अधिक समझदार हो चुके हैं और वे बेफिजूल के विषयों को फिल्म के रूप में देखना अब वक्त की बर्बादी समझती है।
हाल ही में रिलीज हुई फिल्म फालतू हालांकि एक अच्छी फिल्म थी। उसमें युवाओं को नये तरीके से लोगों के सामने प्रस्तुत करने की कोशिश की गयी थी, लेकिन लव का द एंड में वह सारे तत्व नजर नहीं आते अब। साथ ही निर्देशकों को यह बात समझनी चाहिए कि जिस दौर में वैलेंटाइन डे जैसे दिन एक उत्सव के रूप में मनाये जाते हैं। ऐसे में प्यार को नकारात्मक रूप से प्रस्तुत करने की चूक कितने दर्शक पचा पायेंगे।
फिल्म की कहानी में रिया की प्रेम के लिए तलाश करने की कोशिश की गयी है। पूरी कहानी ऊबाउ है और सारे किरदार एक दूसरे से घुलमिल नहीं पाये हैं। श्रध्दा कपूर अपनी दूसरी फिल्म में भी कोई प्रभाव नहीं छोड़ पायी है। उन्हें अभी अपने अभिनय पर बहुत मेहनत करने की जरूरत है।
तहा शाह व शहनाज से कामचलाऊ अभिनय किया है। गौरतलब है कि लव का द एंड में लव एक किरदार है न कि फिल्म में प्यार के अंत को दिखाया गया है। निर्देशक की यह पहली फिल्म है, लेकिन उसमें खास गुंजाइश नजर नहीं आती। लेकिन अगर इसके मेकर्स की बात करें तो दुख जरूर होता है। चूंकि यही मेकर्स हैं, जिन्होंने फिल्म मोहब्बते, दिलवाले दुल्हनिया और वीर जारा जैसी लव स्टोरी बनाई है। इस फिल्म में खास प्रभाव छोड़ने जैसे कोई तत्व नहीं हैं।


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