फिल्म समीक्षा: एक-द पावर ऑफ वन

निर्देशक : संगीत सिवन
संगीत : प्रीतम
कलाकार : बॉबी देओल, श्रेया सरन, नाना पाटेकर, जैकी श्रॉफ, चंकी पांडे, जरीना वहाब
निर्देशक संगीत सिवन निर्देशित फिल्म 'एक-द पावर ऑफ वन" तेलुगू फिल्म अथाडु की हिंदी रिमेक है। फिल्म में एक बड़े परिवार की कहानी है जहां प्यार, भावनात्मक रिश्ते, दोस्ती, टूटे फूटे नियम और राजनीति का ताना बाना चलता है।
कहानी: फिल्म में अभिनेता नंदू ( बाबी देओल) एक अनाथ होता है। वह एक एक नेता अन्ना मार्टे (सचिन खेडेकर) के लिए काम करता है। चुनाव अभियान के दौरान नंदू एक रैली को संबोधित करता है। उस रैली में अचानक गोलियां चलती है और अन्ना मारा जाता है। नंदू वहां से भाग जाता है और चलती हुई ट्रेन में चढ जाता है। ट्रेन में उसकी मुलाकात पुरन (अक्षय खन्ना) से होती है जो कई सालों बाद अपने घर वापस जा रहा होता है। नंदू का पीछा करते हुए पुलिस ट्रेन में चढ जाती है इस दौरान फायरिंग में पुरन की मौत हो जाती है। नंदू पूरन की मौत की खबर देने के लिए उसके घर जाता है। उसके घर वाले उसे अपना बेटा समझ लेते है। नंदू उनके स्नेह में कुछ बता नही पाता है। उसे प्रीत (श्रेया सरन) से प्रेम हो जाता है।
सीबीआई के एक विशेष अधिकारी बने नाना पाटेकर (राणे) को अन्ना के हत्यारे नंदु के बारे में पता चलता है और वो पंजाब से पुरन के गांव छानबीन करने आता है। पुरन के घर राणे को नंदु मिलता है। क्या नंदु अपने आप को बचा पाता है?
कुल मिलाकर कहा जाए तो पुरानी कहानी को नए तरह से पेश करने की कोशिश गई है जो कुछ खास नही बन पाई है।


Click it and Unblock the Notifications











