दम लगा के हाइशा- फिल्म रिव्यू
शादी का रिश्ता एक बहुत ही नाजुक रिश्ता होता है, शुरुआत खराब हो तो पूरी जिदंगी खराब हो सकती है। लेकिन अक्सर हमारी हिंदी फिल्मों में इस रिश्ते की शुरुआत कितनी भी खराब क्यों ना दिखाई जाए लेकिन फिल्म के अंत में अक्सर इस रिश्ते की ही जीत होती है। शादी से जुड़ी कस्में, रस्में, बंधन वगैहर किरदारों को एक पल तो जोड़ ही लेते हैं।
आयुष्मान खुराना की फिल्म दम लगा के हाइशा भी कुछ ऐसे ही विषय पर आधारित है। फिल्म में प्रेम (आयुष्मान खुराना) और संध्या (भूमि) की कहानी दिखाई गयी है। प्रेम के पिताजी की एक कैसेट की दुकान है। प्रेम का परिवार बहुत बुरी परिस्थितियों से गुजर रहा है और उसी दौरान उसके पिताजी फैसला करते हैं कि प्रेम की शादी संध्या से कर दी जाए। संध्या एक बहुत पढ़ी लिखी लड़की है और प्रेम के साथ शादी करने को तैयार हो जाती है।
शादी के बाद प्रेम और संध्या के बीच का रिश्ता काफी उतार चढ़ावों से गुजरता है। प्रेम जो कि संध्या को बिल्कुल भी खूबसूरत और आकर्षित नहीं मानता उससे दूर दूर रहने लगता है। प्रेम को लगता है कि संध्या उसके सपनों की राजकुमारी जैसी नहीं है और इसके चलते वो संध्या की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं देता। वहीं संध्या प्रेम को बार बार रिझाने की कोशिश करती रहती है।
इसी दौरान दोनों की जिदंगी में कई खूबसूरत मोड़ आते है और इनका रिश्ता किन किन परिस्थितियों से होकर अंत में किस मंजिल पर पहुंचता है यही है दम लगा के हाइशा की कहानी।


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