क्या खूब दोस्ती है 'दोस्ताना' में
तरूण मनसुखानी द्धारा निर्देशित फिल्म 'दोस्ताना' के रीलिज होने से पहले समलैंगिक मुददा सुर्खियों में काफी छाया हुआ था। यह फिल्म में समलैंगिक मुद्दे को हलके फुलके ढंग से पेश से पेश करती है। इसको साधारण ढंग से पेश करती है और यह दिखाने का प्रयास करती है समलैंगिक होना कोइ अपराध नही होता है।
यह उनकी पहली फिल्म है और अपनी पहली ही फिल्म में उन्होंने एक अलग तरह का मुद्दा उठाया है और उसे बहूत ही खुबसूरती से पेश किया है।
कहानी: सैम (अभिषेक बच्चन) और कुनाल (जॉन अब्राहम) मियामी में रहते है। सैम मियामी के हास्पिटल मे नर्स है और कुनाल छायाकार है। दोनो घर ढुढते हुए एक ही जगह आकर टकराते है। उस घर में लड़को को घर किराए पर देने में पाबंदी है क्योंकि उस घर में एक खुबसूरत लड़की नेहा (प्रियंका चोपड़ा) रहती है जोकि पेशे से पत्रकार है।
घर लेने के लिए सैम और कुनाल एक दसरे को गे कपल घोषित करते है और फिर नेहा के साथ रहने लगते है। धीरे धीरे तीनों में गहरी दोस्ती हो जाती है। इसी बीच नेहा का प्रमोशन रूक जाता है और उसका बॉस अभिमन्यू सिंह (बॉबी देओल) उसे एक कठिन काम सौंपता है जिसे वह अपने फोटोग्राफर दोस्त की मदद से पूरा करती है। और उससे काफी प्रभावित हो जाती है।
अब कहानी में नया मोड़ आता है कि तीनो उसे चाहने लगते है। गे कपल अपनी सही पहचान बताता है और अभिमन्यु को किनारे लगाते है। आखिर नेहा किसके साथ जाती है यहीं कहानी का अंत है।
संगीत: फिल्म की कहानी के साथ विशाल शेखर के संगीत ने पूरी तरह तारतम्य बिठाया है। फिल्म का गाना 'देसी गर्ल' और 'मां दा लाडला बिगड़ गया' पर आपको नाचने का मन कर सकता है।
अभिनय के लिहाज से बात करे तो अभि और जॉन के बीच का तालमेल देखते ही बनता है। वही पर किरण खेर का एक पंजाबी मम्मी का किरदार और बोमन ईरानी की कामेडी सबको भाएगी। और अगर देसी गर्ल प्रियंका की बात की जाए तो फैशन के बाद उनकी दूसरी बेहतरीन फिल्म साबित होगी।


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