'दोबारा' फिल्म रिव्यू: अंत तक बांधे रखती है अनुराग कश्यप की ये रोमांचक संस्पेंस- थ्रिलर
निर्देशक- अनुराग कश्यप
कलाकार- तापसी पन्नू, पावेल गुलाटी, शाश्वत चटर्जी, निधि सिंह, राहुल भट्ट
"वो सपना है जो मुझे याद है या ये सपना है जो मेरे साथ हो रहा है", अपनी जिंदगी में हो रही घटनाओं से हैरान- परेशान अंतरा (तापसी पन्नू) कहती है। भूत और वर्तमान की भूलभुलैया में फंसे कुछ लोगों की कहानी है दोबारा या ज्यादा सटीक कहना होगा- दो बारह (2:12)। टाइम ट्रैवल और समानांतर दुनिया पर बनी ये फिल्म किसी पहेली की तरह लगती है। स्पैनिश फिल्म 'मिराज' की ये आधिकारिक रीमेक 19 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक दे रही है।
फिल्म की कहानी पुणे की है। 1990 के दशक में, एक जियोमैगनेटिक तूफान की रात में 12 वर्षीय अनय अपने पड़ोसी (शाश्वत चटर्जी) को अपनी पत्नी की हत्या करते देख लेता है, जहां से भागते हुए सड़क दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो जाती है। 26 साल बाद, फिर वैसी ही जियोमैगनेटिक तूफान की रात आती है और कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं, जब अंतरा खुद को एक टीवी सेट के सामने पाती है जिसके माध्यम से वह 12 वर्षीय अनय की जान बचाने का प्रयास करती है। लेकिन अगले ही पल वो खुद को अनय के घर में पाती है। वह अपने पति और बच्ची को ढूंढ़ती है, लेकिन उसे अहसास होता है कि वो 26 वर्ष पूर्व में जा चुकी है। वह घटनाओं के क्रम को समझने की कोशिश करती है। लेकिन जल्द ही उसे अहसास होता है कि अब जो घट रहा है वो बीता हुआ कल नहीं, बल्कि वास्विकता है।
निर्देशन
कोई शक नहीं कि फिल्म की कहानी जटिल है, लेकिन यह आपका ध्यान अंत तक बांधे रखती है। अनुराग कश्यप ने पहली फ्रेम से ही एक थ्रिल एलिमेंट को जोड़ दिया है। साथ ही पूरी कहानी मुश्किल से चार- पांच किरदारों के इर्द गिर्द घूमती है, लिहाजा इन किरदारों में लगातार आपकी दिलचस्पी बनी रहती है। फिल्म एक रोमांटिक, टाइम-ट्रैवल थ्रिलर के खाके पर टिकी हुई है, जो अनुराग की अन्य फिल्मों की तरह बहुत गहरी नहीं है, लेकिन स्तरित है। अच्छी बात ये भी है कि फिल्म को संतुलित बनाए रखने के लिए कुछ दृश्यों में ह्यूमर का अच्छा पंच डाला गया है। फिल्म की कमी की बात करें तो यहां एक साथ कई सब प्लॉट चलते हैं, कई ट्विस्ट हैं, जिस वजह से यह इमोशनल स्तर पर उचाट लगती है।
तकनीकी पक्ष
तकनीकी स्तर पर फिल्म औसत से ऊपर है। आरती बजाज की सधी हुई एडिटिंग कहानी को दिलचस्प बनाती है, लेकिन फिल्म की लंबाई थोड़ी छोटी की जा सकती थी। थ्रिलर फिल्मों में फिल्म की लंबाई खासा महत्व रखती है। इसके साथ ही एक और पक्ष जो कमजोर दिखता है, वो है फिल्म के गाने। फिल्म में दो गाने हैं जो कहानी में कुछ खास जोड़ते नहीं हैं। शोर पुलिस द्वारा दिया गया बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है। फिल्म की प्रोडक्शन डिजाइन भी ध्यान आकर्षित करती है, लिहाजा इसका जिक्र होना भी बनता है।
अभिनय
अच्छी कहानी को अच्छे कलाकारों का साथ मिल जाए तो इससे बेहतर क्या हो सकता है। इस फिल्म में तापसी पन्नू अपने किरदार में बिल्कुल रची बसी नजर आती हैं। यहां उनके कॉम्प्लेक्स किरदार को जिस गंभीरता और व्याकुलता की जरूरत थी, वो अभिनेत्री ने बखूबी लाया है। आस पास की घटनाओं को लेकर उनके हाव भाव में अस्पष्टता नजर आती है। वहीं, पुलिस इंस्पेकटर के किरदार में पावेल गुलाटी अपने सधे हुए अभिनय से ध्यान आकर्षित करते हैं। राहुल भट्ट और शाश्वत चटर्जी ने अपने अपने किरदारों में सराहनीय काम किया है।
रेटिंग
दोबारा जैसी फिल्में बॉलीवुड में बिरले ही बनती हैं। शायद इसीलिए भी क्योंकि इस तरह की एक्सपेरिमेंटल फिल्में बॉक्स ऑफिस के लिहाज से जोखिम भरी हो सकती है। लेकिन कोई दो राय नहीं कि, अनुराग कश्यप की यह संस्पेंस- थ्रिलर है जरूर देखी जानी चाहिए। इसकी कहानी और किरदार काफी दिलचस्प हैं, जो आपको 2 घंटों तक बांधे रखेंगे। फिल्मीबीट की ओर से 'दोबारा' को 3.5 स्टार।


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