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    Movie Review: जिदंगी ना मिलेगी दोबारा..इसलिए 'दिल धड़कने दो'

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    जिंदगी ना मिलेगी दोबारा में रिश्तों, दोस्ती की एक परत को खोलने के बाद अब जोया रिश्तों की दूसरी परत की असलियत सामने लाने के लिए अपनी फिल्म दिल धडकने दो के साथ हाजिर हैं। इस फिल्म में रिश्तों की उन परतों से आपका सामना होगा जो उपर से तो बेहद खूबसूरत नज़र आती हैं लेकिन अंदर से जिनमें खालीपन है।

    Dil Dhadakne Do movie review in Hindi

    हम अक्सर अपने आस पास ऐसी ही रिश्तों से लोगों से टकराते हैं जिनके चेहरे की हंसी सिर्फ एक छल होती है। अब उसके पीछे की असलियत क्या है ये जोया ने अपनी फिल्म दिल धड़कने दो में दिखाने की कोशिश की है। यूं तो जोया अख्तर की दिल धड़कने दो हमारे समाज के उच्च वर्ग के परिवारों की धड़कनों को ही सुनाती है लेकिन ये कहना गलत ना होगा कि इन मुश्किलों से आज हर एक परिवार व हर एक इंसान गुजर रहा है।

    कहानी

    कहानी

    फिल्म शुरू होती है सबसे प्रमुख पात्र से यानि कि प्लूटो मेहरा। जी हां, यूं तो ये इस घर के पालतू कुत्ते हैं [आमिर खान की आवाज़ के साथ] पर पूरे घर को ठीक से यही जानते हैं। क्योंकि इस घर में किसी के पास इतना समय नहीं है कि एक दूसरे को जानें और समझें। इस घर में हैं चार सदस्य, प्लूटो के अलावा-

    किरदार

    किरदार

    कबीर मेहरा - इन्हें अपने पापा के बिज़नेस में कोई दिलचस्पी नहीं है और बनना चाहते हैं पायलट।
    आयशा मेहरा - आयशा को एक इंडिपेंडेंट लड़की बनना है, हाउसवाइफ नहीं। इसलिए वो अपने पति से तलाक लेना चाहती हैं।
    कमल मेहरा - अनिल कपूर एक टिपिकल पापा है। उनके बिज़नेस में हुए नुकसान की भरपाई वो अपने बेटे की शादी एक बडे़ बिजनेस मैन की बेटी से कराकर करना चाहते हैं।

    नीलम मेहरा- ये हैं कमल मेहरा की पत्नी जिनका किरदार निभाया है शेफाली शाह ने। इन्होंने घर से भागकर शादी थी और आज भी कमल मेहरी की तमाम गलतियों के बावजूद अपने घर को बचाकर चल रही हैं।

    कहानी में ट्विस्ट

    कहानी में ट्विस्ट

    ये पूरी फैमिली जाती है 10 दिन के एक हॉलीडे ट्रिप और यहीं से शुरू होती है रिश्तों के बोझ ढोते, उनकी उधेड़बुन में फंसे इन लोगों की कहानी। एक तरफ आयेशा अपनी शादी में खुद को बंधा हुआ कमजोर महसूस कर रही है तो वहीं कबीर ये तय ही नहीं कर पा रहा कि अपने सपनों के साथ जाए या अपने प्यार के साथ। वहीं कमल मेहरा भी अपने परिवार व समाज के सामने खुद को एक बेहतर, परफेक्ट और सक्सेसफुल दिखाने की जद्दोजहद में खुद को खोता जा रहा है। क्या इन तीनों की जिदंगी में बदलाव आएगा। यही है दिल धड़कने दो का ट्विस्ट।

    निर्देशन

    निर्देशन

    दिल धड़कने दो के पहले भाग में अधिकर फिल्म क्रूज पर शूट की गयी हैष लोकेशन पर ज्यादा ध्यान ना देकर जोया ने किरदारों व उनकी जिंदगी को परफेक्ट तरीके से दिखाने पर काम किया है। दूसरे भाग में सारे ट्विस्ट शुरु होते हैं। पहले भाग में कहानी भी थोड़ी धीमी गति से बढ़ती है और दर्शकों को अपनी सीट पर बैठने में मुश्किल महसूस हो सकती है। इंटरवल से ठीक पहले फिल्म में फरहान अख्तर की एंट्री बेहतरीन है और हर किरदार पर बखूबी काम किया गया है।

    संगीत

    संगीत

    फिल्म का संगीत बेहतरीन है। कहीं कहीं ज़्यादा म्यूज़िक शोर जैसा लगता है। लेकिन शंकर एहसान लॉय का संगीत तेज़ है और युवाओं पर अच्छा खासा चढ़ने वाला है।

    अभिनय

    अभिनय

    फिल्म काफी धीमी है। इतने किरदार हैं कि सबका इंट्रोडक्शन ही आधा घंटा ले लेगा। अनिल कपूर और शेफाली शाह बेहतरीन हैं। रणवीर अनुष्का की लव स्टोरी अच्छी है पर अनुष्का के पास फिल्म में करने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं है।

    देखें या नहीं

    देखें या नहीं

    छुट्टियां है और फैमिली भी है तो फिल्म ज़रूर देखिए। एक बार फैमिली ट्रिप बनती है। हमारी रेटिंग 4 Star

    English summary
    Zoya Akhtar's Dil Dhadakne Do is a family oriented movie. Dil Dhadakne Do is a story of Mehra Family that includes Anil Kapoor, Priyanka Chopra, Ranveer Singh and Shefali Shah.
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