Dhurandhar Review: हमजा के किरदार में रणवीर के तेवर दिखे एकदम धांसू, एक्शन सीन देख खड़े हो जाएंगे रोंगटे!

Dhurandhar Movie Review: 'धुरंधर' बड़े पर्दे पर ऐसी शुरुआत करती है कि पहला ही सीन बता देता है कि यह कोई आम स्पाई फिल्म नहीं है। यह फिल्म एक दमदार पैकेज है, जिसमें इमोशन हैं, तगड़ा एक्शन है, सस्पेंस है और देशभक्ति का जज्बा भी है। फिल्म के डायरेक्टर और लेखक अदित्य धर ने इस फिल्म में एक ऐसी दुनिया बनाई है जो एक तरफ काफी रियलिस्टिक लगती है और दूसरी तरफ पूरी तरह थिएटर के लिए बनी हुई बड़ी फिल्म जैसा एक्सपीरिएंस भी देती है।
क्या है कहानी
फिल्म की कहानी असली आतंकी घटनाओं, पॉलिटिकल स्ट्रेस और खुफिया एजेंसियों के खेल पर आधारित है। शुरू से ही फिल्म आपको एक खतरनाक, गहरे माहौल में ले जाती है, जहां एक गलत फैसला पूरे देश की किस्मत बदल सकता है। पुराने हमलों की असली फुटेज, साजिशों की हल्की आवाजें और सत्ता के गलियारों की बेचैनी को जिस तरह कहानी में जोड़ा गया है, वह दर्शकों पर गहरा असर डालता है।
रणवीर सिंह का दमदार किरदार
इस तूफानी माहौल में सबसे ज्यादा चमकते हैं रणवीर सिंह, जो फिल्म में हमजा का रोल निभा रहे हैं। यह रणवीर का ऐसा अवतार है जिसे दर्शक लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे। उनके चेहरे पर गुस्सा, दर्द, विद्रोह, चालाकी और बाद में आने वाली क्रूरता- उनके चेहरे पर आना वाला हर भाव इतना सच्चा लगता है कि स्क्रीन से नजर हटाना मुश्किल हो जाता है। कई सीन में लगता है कि पर्दे पर रोल नहीं, बल्कि असल में हमजा सामने खड़ा है।
सपोर्टिंग कास्ट भी दमदार
रणवीर के साथ आर. माधवन की मजबूती, अक्षय खन्ना की खामोश लेकिन डर पैदा कर देने वाली आंखें, संजय दत्त की भारी मौजूदगी और अर्जुन रामपाल का रहस्यमयी अंदाज। ये सभी मिलकर फिल्म को और मजबूत बनाते हैं। सारा अर्जुन का डेब्यू भी काफी फ्रेश और इंपैक्टफुल है। हर किरदार अपनी जगह बहुत मजबूत खड़ा दिखता है।
टेक्निकल पक्ष भी शानदार
तकनीकी स्तर पर भी फिल्म मजबूत है। बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म की धड़कन जैसा है- कभी धीरे-धीरे तनाव बढ़ाता है, तो कभी अचानक जोरदार तरीके से उठता है। कैमरा वर्क, लोकेशन, सेट और एक्शन। सबकुछ बेहद सटीक लगता है। लंबी रनटाइम होने के बावजूद फिल्म कहीं भी ढीली नहीं पड़ती, क्योंकि हर सीन कहानी को आगे बढ़ाता है।
कैसी है फिल्म
'धुरंधर' ऐसी फिल्म है जिसे एक बार देखकर मन नहीं भरता। पहली बार आप इसकी रफ्तार, एक्शन और स्टैण्डआउट एक्टिंग से दंग रह जाते हैं। दूसरी बार छोटे-छोटे इशारे, राजनीति, किरदारों की नजरें और छिपे हुए हिंट पकड़ में आते हैं। तीसरी बार आपको महसूस होता है कि यह सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि एक पूरा सिनेमाई यूनिवर्स है, जहां हर छोटा हिस्सा एक बड़ी कहानी का हिस्सा है।
फाइनल रिव्यू
अदित्य धर की सोच, टीम का आत्मविश्वास और कलाकारों की मेहनत मिलकर 'धुरंधर' को एक ऐसी फिल्म बना देते हैं जिसे जितनी बार देखेंगे, उतना ही मजा आएगा। और फिल्म की दूसरी इंस्टॉलमेंट की झलक ने तो दर्शकों में पहले से ही एक्साइटमेंट बढ़ा दी है। कुल मिलाकर ये फिल्म सच में थिएटर में बार-बार देखने लायक है।


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