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Dhadak 2 Movie Review: फिल्म में सिर्फ सिद्धांत की एक्टिंग देखने लायक, कहानी ने एक्टर की मेहनत को डुबोया

Dhadak 2

Rating:
2.0/5

Dhadak 2 Movie Review: सिद्धांत चतुर्वेदी और तृप्ति डिमरी स्टारर फिल्म 'धड़क 2' को लेकर लोग काफी एक्साइटेड हैं। इस फिल्म में एक नई जोड़ी देखने को मिल रही है और उनकी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री कैसी होगी यही फैंस जानना चाहते हैं। आपको ये फिल्म देखनी चाहिए या स्किप करनी चाहिए आइए इस रिव्यू में जानें।

क्या है कहानी

धड़क 2 की कहानी है एक ऐसे लड़के (नीलेश अहिरवार) की जो शिड्यूल कास्ट से है और यही उसके लिए सबसे बड़ा अभिशाप बन जाता है। उसे हर कदम पर लोगों की कड़वाहट झेलने को मिलती है। हर कदम पर लोगों के ताने सुनने को मिलते हैं। वो हर कदम पर ये साबित करने में जुटा रहता है कि वो हुनरमंद है लेकिन दुनिया उसे नीचा दिखाने में जुटी रहती है। इतनी मुश्किलों के बीच उसकी जिंदगी में एक लड़की (विदिशा उपाध्याय) आती है, जो उसे एहसास दिलाती है कि उसे भी खुश होने का हक है और नॉर्मल इंसानों की तरह जीने का हक है। लेकिन वो चाहकर भी ये एहसास नहीं कर पाता क्योंकि उसके आस-पास ऊंची जाति के लोग उसे बार-बार प्रताड़ित करते हैं।

इस फिल्म में नीलेश का सबसे बड़ा दुश्मन विदिशा के चाचा के बेटा (रॉनी) है, जिसे पंडित होने पर गर्व है और वो किसी भी हाल में विदिशा और नीलेश को अलग करना चाहता है। इस साजिश में रॉनी के पापा भी साथ देते हैं और वो नीलेश की सुपारी देते हैं। क्या नीलेश रॉनी की साजिश का शिकार हो जाएगा? क्या नीलेश अपने प्यार विदिशा के साथ जिंदगी बिता पाएगा? वो समाज की कुरीतियों से हार जाएगा... या लड़ेगा... ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

कैसी है फिल्म

फिल्म का टॉपिक तो शानदार है और इस तरह के मुद्दों पर और भी फिल्में बननी चाहिए। लेकिन फिल्म काफी ज्यादा बिखरी-बिखरी सी नजर आई। धड़क के पहले पार्ट की तरह इस पार्ट में लव स्टोरी पर ज्यादा फोकस नहीं किया गया है, बल्कि लड़के की मुसीबतों पर दिया गया है कि कैसे जातिवाद की वजह से उसकी जिंदगी में बद से बदतर होती जा रही है।

इस फिल्म में लव स्टोरी पर फोकस किया जाना चाहिए था ताकि लोगों को धड़क का टच देखने को मिलता। पहला हाफ काफी ज्यादा स्लो है। दूसरे हाफ में जाकर कहानी में रफ्तार आती है और सिद्धांत चतुर्वेदी की एक्टिंग इस फिल्म को एक जोश देती है।

यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर फिल्म की कहानी बेहतर होती तो ये फिल्म सिद्धांत चतुर्वेदी और तृप्ति डिमरी की एक्टिंग के साथ न्याय कर पाती। 'सैयारा' जैसी फिल्म के साथ इसका कॉम्पटीश है तो फिल्म में लव एंगल पर थोड़ा और काम करने की जरूरत थी।

कैसी है एक्टिंग

फिल्म की जान हैं सिद्धांत चतुर्वेदी, उन्होंने इस फिल्म में अपनी एक्टिंग से जान फूंक दी है। तृप्ति को सिद्धांत के मुकाबले कम स्क्रीन स्पेस मिला है लेकिन वो काफी इफेक्टिव लगा है। हालांकि, फिल्म को देखकर लगा है कि उनका कैरेक्टर ढंग से लिखा नहीं गया है। हालांकिं, उनके एक्सप्रेशन में कुछ अलग नहीं देखने को मिला है, जैसी एक्टिंग वो बाकी फिल्मों में करती आई हैं, वैसी ही उन्होंने इस फिल्म में की है लेकिन फिर भी वो स्क्रीन में अच्छी लगी हैं।

हालांकि, सौरभ सचदेवा इस फिल्म में चलते-फिरते यमदूत लग रहे हैं। उनका कैरेक्टर जहां भी जाता है, वहां मौत का संदेशा ही लेकर आता है। सिद्धांत के पिता का रोल निभाने वाले विपिन शर्मा ने छोटा लेकिन कमाल का काम किया है। जाकिर हुसैन इस फिल्म में सिद्धांत के कॉलेज के डीन बने हैं, जो सिद्धांत को एक ऐसी सीख देते हैं, जिससे उसके अंदर लड़ने की हिम्मत आती है।

फाइनल रिव्यू

अगर आपने हाल-फिलहाल में 'सैयारा' देखी है तो इस फिल्म का जायका आपको कुछ खास पसंद नहीं आएगा। हां, एक सोशल मैसेज के लिए ये फिल्म देखी जा सकती है। अगर आपको सिद्धांत और तृप्ति की एक्टिंग पसंद है तो आपको ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए लेकिन दोनों की बॉन्डिंग में अगर आप जादू की तलाश कर रहे हैं तो आपको मायूसी ही हासिल होगी। फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से इस फिल्म को मिलते हैं 2 स्टार।

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