चेतावनी: कमजोर दिल वाले ना देखें- Darr The Mall रिव्यू!
जिमी शेरगिल और नुसरत बारुचा की फिल्म डर एट दि मॉल को लेकर अगर आपके मन में कुछ ऐसे सवाल हों कि फिल्म पता नहीं कैसी होगी, डर लगेगा या नहीं, भूत दिखेगा या नहीं। तो इन सब को साइड में रखकर फिल्म देखने जरुर जाएं। भले ही पूरी फिल्म आपके रोंगटे खड़े ना करे लेकिन फिल्म के कुछ सीन्स जरुर आपके मुंह से चीख निकलवा देगी। पवन कृपलानी जिन्होंने रागिनी एमएमएस फिल्म से लोगों को अपने बेहतरीन भूतिया निर्देशन से चौंका दिया था ने डर एड दि मॉल में भी बेहतरीन काम किया है। फिल्म के एक एक सीन में सस्पेंस डालने और उस सस्पेंस को लगातार बनाए रखने के लिए पवन ने काफी मेहनत की है।
डर एट दि मॉल की कहानी शुरु होती है एमिटी मॉल से जहां पर एक के बाद एक तीन रहस्यमयी मौतों के बाद मॉल को भूतिया करार देकर बंद कर दिया जाता है। यूं लगता है कि जैसे कि मॉल में कुछ अतृप्त आत्माएं हैं जो कि किसी बात का बदला लेना चाहती हैं। लेकिन इन सब बातों पर यकीन ना करके मॉल के मालिक एक बार फिर से मॉल को लॉंच करते हैं और पार्टी के दौरान उनका पूरा परिवार मॉल में आता है। जिमी शेरगिल मॉल के सेक्यूरिटी गार्ड की नौकरी के लिए आता है और कोई और कैंडिडेट ना पाकर उसे ही रख लिया जाता है। मॉल की रीलॉंच पार्टी के दौरान ही मॉल के मालिक की मौत हो जाती है और मॉल के दो शेयर होल्डर्स अपने बच्चों के साथ मॉल में फंस जाते हैं। मॉल में बंद आत्माएं एक एक करके इन लोगों को मारना शुरु करती हैं।
आखिर ये आत्माएं कौन हैं और किस बात का बदला ले रही हैं ये मॉल के मालिकों से। जिमी शेरगिल का क्या रिश्ता है इन आत्माओं से और इस मॉल की क्या कहानी है ये जानने के लिए आपको डर एड दि मॉल देखने नजदीकी सिनेमाहॉल में जाना होगा। लेकिन फिल्म देखने से पहले इतना जरुर ध्यान रखियेगा कि फिल्म में कई सीन ऐसे हैं जो कि आपके दिलों की धड़कन बढ़ा सकते हैं। तो जाइये मगर सोच समझकर।


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