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दंगल फिल्म रिव्यू: धाकड़ बेटियों का धाकड़ बाप...4 स्टार

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4.0/5

फिल्म      - दंगल
स्टारकास्ट - आमिर खान, साक्षी तंवर, फातिमा सना शेख,सान्या मल्होत्रा, ज़ायरा वसीम, सुहानी भटनागर, अपारशक्ति खुराना, गिरीश कुलकर्णी
डायरेक्टर -  नितेश तिवारी
प्रोड्यूसर -   आमिर खान, किरण राव, सिद्धार्थ रॉय कपूर
लेखक -      नितेश तिवारी, पीयुष गुप्ता,श्रेयस जैन, निखिल मेहरोत्रा

क्या है हिट - बेहतरीन अदाकारी, शानदार निर्देशन, कसा हुआ लेखन, ज़बर्दस्त धोबीपछाड़ पहलवानी के सीन

क्या है ठंडा - साक्षी तंवर के किरदार के कुछ और रंग अगर फिल्म में देखने को मिलते तो मज़ा ही आ जाता।

पलकें कब झपकाएं - केवल इंटरवल में....सावधानी हटी...दुर्घटना घटी

दिल जीतने वाला सीन - फिल्म का सबसे बड़ा ट्विस्ट जहां आमिर खान अपनी बेटी फातिमा सना शेख के साथ एक फाइट करेंगे और पूरी फिल्म वहीं का वहीं पलट जाएगी।

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प्लॉट
महावीर फोगत, पूर्व, नेशनल लेवेल का पहलवान है जो हमेशा एक बेटे की चाह में जी रहा है। वो बेटा जो उसके लिए गोल्ड मेडल जीत कर ला सके, किसी इंटरनेशल इवेंट में। लेकिन चौथी बार भी उसे लड़की होती है।

महावीर फोगच दुखी हो जाता है और अपने गोल्ड मेडल को अलविदा कह देता है। हालांकि लड़कियां और लड़कों का अंतर उसके लिए तब मिटता है जब उसकी दो छोटी छोटी बेटियां गीता (ज़ायरा वसीम) और बबीता(सुहानी भटनागर) पड़ोस के दो बच्चों को बुरी तरह पीट देती हैं। क्योंकि उन दो लड़कों ने लड़कियों पर बुरे कमेंट किए होते हैं।

महावीर को तुरंत इस सच का एहसास हो जाता है कि गोल्ड तो गोल्ड ही रहेगा, लड़का जीत के लाए या फिर लड़की। और यहीं से शुरू होती है फिल्म की थीमलाइन - महारी छोरियां छोरों से कम हैं के?

जानिए फिल्म की पूरी समीक्षा -

समाज से लड़ता महावीर

समाज से लड़ता महावीर

लेकिन मेडल पेड़ पर नहीं उगते, उन्हें बनाना पड़ता है, प्यार से, मेहनत से, लगन से। इसके बाद एक आदमी की कहानी शुरू होती है जो अपनी और अपनी बेटियों के साथ समाज से लड़ता है और उसके आगे झुकता है। वो समाज जहां लड़कियां पहलवान नहीं होती...अखाड़े में नहीं उतरती और खेलना चाहें भी तो पहलवानी या कुश्ती नहीं लड़ती।

पॉलिटिक्स और खेल

पॉलिटिक्स और खेल

कुछ पाने के लिए बहुत मेहनत करनी होती है औऱ रास्ता इतना आसान नहीं होता जितना दिखता है। खासतौर से तब जब आप उस उम्र में हों जहां ध्यान भटकना और भटकाना सबसे आसान हो और आपका नेशनल कोच अक्खड़ हो।

निर्देशन

निर्देशन

नितेश तिवारी की फिल्म पहलवानी के इर्द गिर्द ही घूमती है और कहीं भी उससे नहीं हटती है। फिल्म हर मुश्किल को तोड़ते हुए जीत हासिल करने वाले एक पहलवान की कहानी है, ठीक वैसे ही जैसे कि इस साल आई सुलतान थी। लेकिन केवल यही एक पॉइंट इन दोनों फिल्मों में एक सा है। वरना कहानी और उसके ट्रीटमेंट के स्तर पर दोनों फिल्मों में ज़मीन आसमान का अंतर है।

बिल्कुल सटीक बैलेंस

बिल्कुल सटीक बैलेंस

नितेश तिवारी ने हमें चिल्लर पार्टी दी ती और इसके बाद भूतनाथ रिटर्न्स। इस बार उन्होंने मेहनत और लगन की सच्ची कहानी को फिल्मी कलेवर में बेहतरीन सामंजस्य के साथ परदे पर उतारा है।

सांस थामके बैठने वाले सीन

सांस थामके बैठने वाले सीन

दंगल बहुत ही गहरी और बांध के रखने वाली फिल्म है लेकिन फिल्म से इसका हल्का फुल्का कलेवर कभी गायब नहीं होता। पहलवानी के सारे फाइट सीन इतनी बेहतरीन तरह से बनाए गए हैं कि आप पलकें नहीं झपकाएंगे। नितेश तिवारी के कसे हुए प्लॉट के साथ बेहतरीन पंच डायलॉग्स की जितनी तारीफ की जाए कम है।

अभिनय

अभिनय

आमिर खान को परफेक्शनिस्ट क्यों कहा जाता है इसके बारे में अगर जानना हो तो दंगल देखिए। जहां बाकी एक्टर्स मैं कैसा दिख रहा हूं, सोचते रह जाते हैं वहीं आमिर को दो बेटियों का तोंद वाला बाप बनने में कोई दिक्कत नहीं है। सफेद दाढ़ी भी। ये वही आदमी है जो गजिनी के बाद आपको 6 पैक एब्स बनाने पर मजबूर कर गया था। इस साल शाहरूख ने भी डियर ज़िंदगी में अपनी उम्र के मुताबिक काम किया है। शायद बॉलीवुड बड़ा हो गया है।

नन्हें कलाकारों ने डाली जान

नन्हें कलाकारों ने डाली जान

दंगल में कई सीन ऐसे हैं जहां आमिर अपनी बेटियों को हीरो बनने का मौका देते हैं पर फिर भी आमिर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। ज़ायरा वसीम और सुहानी भटनागर छोटी गीता - बबीता हैं जो अपने हानिकारक बापू से बचने के लिए एक टीम बनाती है। वो बापू जो उन्हें गोलगप्पे तक खाने नहीं देता।

सुपरस्टार्स से बनी है ये स्टारकास्ट

सुपरस्टार्स से बनी है ये स्टारकास्ट

फातिमा सना शेख बबीता के किरदार में पूरे नंबर के साथ पास हुई हैं। वो पूरी तरह एक ऐसी लड़की की भूमिका में जमी हैं जिसने हर बाधा पार करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता।

सान्या मल्होत्रा भले ही फातिमा जितनी स्ट्रॉन्ग ना हो पर उनका किरदार अपने लिहाज़ से पूरा है।

साक्षी तंवर फिल्म को मज़बूती से पकड़ती है पर उन्हें फिल्म में और खुलकर रोल देना चाहिए।

अपारशक्ति खुराना अपने बॉलीवुड डेब्यू में आपका ध्यान खींचेंगे। और वो कहीं भी आपको हंसाना नहीं भूलेंगे।

गिरीश कुलकर्णी एक घमंडी कोच बने है जो लाइमलाइट के लिए तरसता है और इस जलन में किसी भी हद तक जा सकता है।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

दंगल हर तरह से आपको बांध के रखती है। फिल्म की एडिटिंग बल्लू सलूजा ने शानदार तरीके से की है भले ही फिल्म 2 घंटे 40 की है। सेतु श्रीराम की सिनेमैटोग्राफी बहुत ही दिलचस्प शेड देती है। फिल्म के संगीत की बात करें तो ये फिल्म के अनुरूप है। जहां हानिकारक बापू अपने मज़ेदार बोल की वजह से याद रहेगा वहीं धाकड़ा और दंगल शानदार है।

फाइनल रेटिंग

फाइनल रेटिंग

हमारी तरफ से फिल्म को 4 स्टार। तुरंत इसके टिकट बुक कराएं क्योेंकि ये साल 2016 की बेस्ट फिल्म है।

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    English summary
    Dangal movie review is here. Directed by Nitesh Tiwari featuring Aamir Khan, read on to know how the movie is!

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