Sushant Singh Rajput
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    Choked रिव्यू: अनुराग कश्यप का नोटबंदी की विफलता पर हमला, लेकिन चूक गए

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    2.5/5

    डायरेक्टरः अनुराग कश्यप

    कलाकारः सयामी खेर और रोशन मैथ्यू, आदि

    प्लेटफॉर्म-नेटफ्लिक्स

    अनुराग कश्यप अक्सर समसामयिक मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं और हमेशा सीधे सख्त लहजे में जवाब देते नजर आते हैं। ठीक ऐसे ही वह अपनी फिल्मों के जरिए बड़े और गंभीर विषय लेकर आते हैं। इस बार नेटफ्लिक्स पर उनकी फिल्म 'चोक्ड: पैसा बोलता है' रिलीज हुई है। जोकि नोटबंदी के सहारे कालाधन, लालच, घूसखोरी और मध्यम वर्ग के परिवार की समस्याओं पर चोट करती है। 'चोक्ड' नोटबंदी की विफलता को दर्शाती है। लेकिन इसे देख आप हैरान रह सकते हैं कि क्या वाकई ये फिल्म अनुराग कश्यप की बनाई है? कुछ सीन, संवाद तो समझ और इस फिल्म से परे लगते हैं। कुल मिलाकर कहे तो इस बार अनुराग कश्यप ने अपने फैंस को निराश कर दिया है।

    ऐसा इसीलिए क्योंकि इस बार अनुराग कश्यप के निर्देशन पर उनका राजनैतिक परसेप्शन हावी होता नजर आया। ढीली पटकथा और नोटबंदी जैसे विषय का संतुलन बनता नहीं दिखाई दिया। फिल्म में सुकून नायिका की एक्टिंग को देखने के बाद मिलता है। पूरी फिल्म नायिका के कंधे पर टिकी नजर आती है।

    अनुराग कश्यप इस फिल्म में नोटबंदी के सहारे जहां निशाना साधना चाह रहे थे, वे कहीं न कहीं चूक गए। इस फिल्म में कश्यप नोटबंदी की विफलता, घूसखोरी और मध्यम क्लास फैमिली की समस्या को एक फ्रेम में दिखाना चाह रहे थे, लेकिन ये संतुलन बन नहीं पाया और इस बार अनुराग कश्यप पर्दे पर कमाल करने से चूक गए। यही फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर उभरी है। हां, ये सही है कि कलाकार (निर्देशक) अपनी रचना के लिए स्वतंत्र है लेकिन निजी राय का हावी होना कला (फिल्म) के साथ बेइमानी करने जैसा ही है।

    फिल्म की शुरुआत

    फिल्म की शुरुआत

    फिल्म की शुरुआत देर रात के अंधेरे में कालाधन छिपाने की कवायद शुरू होती है। फिर नायिका और नायक का परिचय होता है। फिल्म में नायिका सरिता (सैयामी खेर) अपने घर में भी असली हीरो हैं। क्योंकि पति सुशांत (रोशन मैथ्यू) कर्ज में डूबा हुआ है। कर्ज, मध्यम वर्ग परिवार की समस्याओं और जिम्मेवारियों के चलते इस परिवार की तमाम उलझने देखने को मिलती हैं। इसी के समानांतर सरिता का अतीत फ्लैशबैक में चलता नजर आता है।

    कहानी

    कहानी

    फिल्म चोक्ड सरिता पिल्लै और सुशांत पिल्लै की कहानी के साथ साथ डिमोनेटाइजेशन जैसे विषय को उठाती है। कर्ज में डूबा पति अब घर में ही रहता है और सरिता सरकारी बैंक में काम करती हैं। वह घर की जिम्मेदारियां और पैसों की तंगी के चलते चिड़चिड़ी हो गई है। एक समय था जब सरिता सिंगर बनने का सपना रखती थीं लेकिन वो किसी कारण चूर चूर हो गया।

    इसके बाद घर से वह पारिवारिक उलझनों में लगातार धसती चली जा रही है। सरिता की कहानी के जरिए एक मीडिल क्लास फैमिली की उधेड़बुन चोक्ड में देखने को मिलती है। साथ ही चोक्ड में दिखाई देता है कि कैसे नोटबंदी जैसे फैसले, सरकार, नेता, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे आम जिंदगी को प्रभावित करते हैं।

    अनुराग कश्यप की चोक्ड दिखाती है कि कैसे नोटबंदी का फायदा एक तबके को हुआ और गरीब कुचले लोगों का इस निर्णय ने शोषण किया। इतना ही नहीं, फिल्म का एक सीन ये भी दिखाता है कि कैसे नोटबंदी से ठीक एक दिन पहले कुछ लोगों को इसकी खबर लग चुकी थी और उन्होंने रातों रात काले धन को ठिकाने पर लगाया।

    फिल्म की उलझन

    फिल्म की उलझन

    फिल्म चॉक्ड का मुद्दा साफ था कि ये फिल्म नोटबंदी के विषय पर बनी है लेकिन कुछ सीन ऐसे हैं जिसका लेना देना ही समझ नहीं आता। जैसे सरिता सिंगर बनना चाहती थी। फिल्म फ्लैशबैक में जाती भी है लेकिन कुछ साफ नहीं होता कि नायिका के साथ ऐसा क्या होता है कि वह सिंगर नहीं बन पाती। वहीं सुसाइटी के दूसरे लोगों का भूमिका अंत में थोड़ी संदेह पैदा करती है।

    फिल्म में एक उलझन और दिखती है। ये कि नोट अदला बदली तो दिखाई गई लेकिन नोटबंदी में बैंकों के रोल को दिखाने से निर्देशन ने परहेज किया।

    एक्टिंग

    एक्टिंग

    सरिता पिल्लै यानी सैयामी खेर ने जबरदस्त काम किया है। वह अकेले इस फिल्म की ढाल बनी हैं। इससे पहले भी हॉट स्टार की वेब सीरीज स्पेशल उप्स में सैयामी ने शानदार काम किया था। वहीं सुशांत भी अपनी जिम्मेवारी को निभाते नजर आते हैं।

    लेखक ने फिल्म में कई दर्शयों में व्यंग्यों का भी इस्तेमाल किया है। वह मौजूदा सरकार पर तंज कसने की कोशिश करता है, जोकि आपको आज की स्थिति से जोड़ने का प्रयास करता है।

    निर्देशन

    निर्देशन

    अनुराग कश्यप की इस बारे में चोक्ड को लेकर तारीफ करने पड़ेगी कि मध्यम वर्गी परिवार अपने हालातों के आगे कैसे मौका परस्त हो जाते हैं। वहीं नोटबंदी की विफलता जैसे विषय को निर्देशक ने चुना और इसके प्रभाव को आम लोगों से जुड़कर दिखाने की कोशिश की, ये एक अच्छा प्रयास था। लेकिन इस बार अनुराग कश्यप जैसे दिग्गज निर्देशक ने फिल्म को बोझिल बना दिया। फिल्म में बड़े घोटाले या भयंकर क्लाईमैक्स जैसी उम्मीद बांधे दर्शक को अंत में मायूसी हाथ लगती है। यही वजह है कि इस बार अनुराग कश्यप ने शायद निराश कर दिया।

    English summary
    Choked: Paisa Bolta Hai review Rating: netflix anurag kashyap movies based on demonetization
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