प्रभाव छोड़ने में असफल चांदनी चौक...

कलाकार: अक्षय कुमार, दीपिका पडुकोण, मिथुन चक्रवर्ती, रणवीर शौरी
संगीत: शंकर, अहसान, लाय
निखिल आडवाणी द्धारा निर्देशित फिल्म चांदनी चौक टू चाइना अपेक्षाओं पर खरा उतरने में असफल रही है। फिल्म के आने से पहले जितना शोर शराबा किया जा रहा था वह सब गायब मिला। फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी रही अच्छी पटकथा का न होना। जिससे तीन घंटे तक दर्शकों को बांधे रहना मुश्किल रहा।
कहानी: सिद्धू (अक्षय कुमार) चांदनी चौक के एक सड़क छाप भोजनालय में सब्जियां काटने का काम करता है। अपने धर्म- पिता दादा (मिथुन चक्रवर्ती) के उपदेशों के विपरीत, वह बिना मेहनत और जल्दी पैसा कमाने के लिए ज्योतिषियों के चक्कर लगाता रहता है।
चीन से आए दो अजनबी एक दिन उससे मिलते हैं और कहते हैं कि वह उनके प्राचीन योद्धा का अवतार है और गांव पर आतंक फैला रहे स्मगलर होजो को मारने के लिए ही पैदा हुआ है।
सिद्धू का साथी चॉप्स्टिक (रणवीरे शौरी) भी उसे चीन जाने की सलाह देता है। रास्ते में उसकी मुलाकात दीपिका से होती है जो अपनी जुड़वां बहन और चीनी पिता को श्रद्धांजलि देने चीन जा रही है।
होजो गांव वालों के सामने सिद्धू को पीटता है और उसके दादा की हत्या कर देता है। अब सिद्धू के सामने एक ही लक्ष्य है अपने दादा की हत्या का बदला लेना।
इसके लिए वह मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लेता है। प्रशिक्षण के दौरान उनके चेहरे पर गुस्से और आग की बजाय हंसी दिखाई देती है। जिसके कारण कहानी का असर खत्म हो जाता है। फिल्म का अंत भी साधारण है।
स्टंट दृश्य कुछ खास नही हैं। फिल्म में केवल अक्षय कुमार ही हैं जिंन्हे देखने जाया जा सकता है। दीपिका पडुकोण, मिथुन चक्रवर्ती और रणबीर सूरी का काम ठीकठाक हैं। दीपिका के पिता की भूमिका में चीनी अभिनेता रॉजर युआन ने अच्छा काम किया है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि एक अच्छी फिल्म बनने से रह गयी।


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