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    'बंटी और बबली 2' फिल्म रिव्यू: ना वो मस्ती है, ना चालाकी, ना स्वैग; रानी- सैफ की जोड़ी भी दिल ठगने में रही फेल

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    Rating:
    2.5/5

    निर्देशक- वरुण वी शर्मा

    कलाकार- रानी मुखर्जी, सैफ अली खान, सिद्धांत चतुर्वेदी, शरवरी वाघ, पंकज त्रिपाठी

    "हमारे और कांड का रिश्ता ऐसा हो गया है, जैसा गंजे और घने बालों के बीच होता है.. कि सालों पहले हुआ करते थे.." पुलिस की गिरफ्त में परेशान राकेश त्रिवेदी उर्फ बंटी (सैफ अली खान) कहता है। पुरानी बंटी और बबली की कुख्यात जोड़ी 15 सालों के बाद एक बार फिर वापस आ गए हैं। लेकिन इस बार मामला कुछ दूसरा है। इस बार वो खुद ठगी करने नहीं.. बल्कि नए बंटी और बबली को चोरी से रोकने के लिए आए हैं। लेकिन क्या ओरिजिनल जोड़ी नए ठगों को मात दे पाएंगे?

    कुल मिलाकर, 'बंटी और बबली 2' में दोनों किरदारों को फिर से पॉपुलर करने के लिए एक रोमांचक आधार था, लेकिन यह सीक्वल अपने मूल की तुलना में काफी ठगा हुआ लगता है।

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    कहानी

    कहानी

    राकेश त्रवेदी (सैफ अली खान) और विम्मी त्रिवेदी (रानी मुखर्जी) उर्फ़ बंटी और बबली उत्तर प्रदेश में एक छोटे शहर फुर्सतगंज में पारिवारिक जीवन जी रहे हैं। राकेश रेलवे टिकट कलेक्टर हैं और विम्मी अभी भी खुद के लिए फैशन डिजाइनिंग करती हैं। उनका एक बेटा भी है। दोनों अपने मध्यमवर्गीय जिंदगी में व्यस्त हैं.. खुश हैं या नहीं, पता नहीं। लेकिन जल्द ही उनकी लाइफ में एक ट्विस्ट आता है, जब न्यूज चैनलों में खबर दौड़ने लगती है कि 15 सालों के बाद बंटी और बबली एक बार फिर एक्टिव हो गए हैं। लेकिन सच्चाई है कि ओरिजनल बंटी और बबली से दूर.. इंजीनियरिंग पास बेरोज़गार कुणाल (सिद्धांत चतुर्वेदी) और सोनिया (शरवरी वाघ) अलग अलग स्कीम में फंसाकर लोगों से लाखों करोड़ों ठग रहे हैं और अपनी जोड़ी का नाम रखते हैं 'बंटी और बबली'। उनका मानना है कि "बईमानी को बईमानी से काटो, तो वो ही सबसे बड़ी ईमानदारी होती है".. ऐसे में इंस्पेक्टर जटायु सिंह (पंकज त्रिपाठी) अब नए बंटी और बबली को पकड़ने के लिए पुराने बंटी और बबली के साथ मिलकर मिशन प्लान करते हैं। अब नए और पुरानी बंटी- बबली का मिलना कैसा होगा और चारों क्या गुल खिलाते हैं.. इसी के इर्द गिर्द घूमती है पूरी कहानी।

    अभिनय

    अभिनय

    रानी मुखर्जी और सैफ अली खान की जोड़ी हमेशा से दर्शकों को बेहद पसंद रही है। यहां दोनों काफी ओवर एक्टिंग करने के बावजूद मजेदार लगते हैं। लेकिन अंत तक जाते जाते उनके किरदारों से भी जुड़ाव खत्म हो जाता है। वहीं, सिद्धांत चतुर्वेदी और शरवरी की जोड़ी बढ़िया दिखी है। शरवरी अपनी पहली फिल्म में काफी कॉफिडेंट लगी हैं। लेकिन दोनों किरदारों की कोई ठोस बैकस्टोरी ना होने की वजह से बतौर दर्शक इनके भी दिल नहीं जुड़ पाता। इंस्पेक्टर जटायु सिंह के किरदार में पंकज त्रिपाठी को कुछ नया करने नहीं दिया गया है, लिहाजा, जितना दिया गया उतने में वो परफेक्ट रहे हैं।

    निर्देशन

    निर्देशन

    देखा जाए तो इस पूरी फिल्म को 2005 में आई 'बंटी और बबली' की लोकप्रियता को भुनाने और कहानी को आगे ले जाने के लिए तैयार किया गया है। लेकिन नवोदित निर्देशक और पटकथा लेखक वरुण वी. शर्मा इस दिशा में संघर्ष करते दिखते हैं। फिल्म में कई दृथ्य और संवाद ऐसे डाले हैं, जो जबरदस्ती आपको पहली फिल्म की याद दिलाते हैं। नए बंटी और बबली द्वारा की गई कुछ ही चोरियां दिखाई गई हैं। कुछ दिलचस्प लगती हैं, जबकि कुछ बेवकूफी सी लगती है। फिल्म का फर्स्ट हॉफ नए और पुराने बंटी- बबली को आमने सामने लाने में फोकस किया गया है। वहीं, सेकेंड हॉफ में कहानी बेहद धीमी हो जाती है। इस फिल्म में निर्देशक ने चारों में से एक भी किरदार ऐसा नहीं बनाया है, जिससे दर्शक जुड़ाव महसूस कर सकें।

    तकनीकी पक्ष

    तकनीकी पक्ष

    तकनीकी स्तर पर फिल्म औसत से ऊपर है। गेवेमिक यू आर्य की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है। भारत के छोटे शहर की गलियों से अबू ढ़ाबी के पांच सितारा होटल और समुद्र तक उन्होंने अपने कैमरे में बढ़िया कैद किया है। आरिफ शेख एडिटिंग के मामले में फिल्म को थोड़ी और चुस्त कर सकते थे, खासकर फिल्म के सेकेंड हॉफ को, जहां कई संवाद दोहराए से भी लगते हैं।

    संगीत

    संगीत

    फिल्म में चार गाने हैं और संगीत दिया है शंकर- एहसान- लॉय ने। कोई दो राय नहीं कि फिल्म का संगीत बहुत ही कमजोर है। टैटू वालिए हो या लव जू.. फिल्म का कोई गाना प्रभाव नहीं छोड़ता। यशराज बैनर कभी अपनी फिल्मों के गानों को लेकर चर्चित हुआ करता था। फिल्म के एक-एक गाने सालों साल चला करते थे। 2005 में आई बंटी और बबली के गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं। लेकिन 'बंटी और बबली 2' इस मामले में बिल्कुल निराश करती है।

    क्या अच्छा क्या बुरा

    क्या अच्छा क्या बुरा

    फिल्म का फर्स्ट हॉफ काफी दिलचस्प है, लेकिन सेकेंड हॉफ शुरु होते ही कहानी इतनी बोरिंग हो जाती है, इधर उधर भागने लग जाती है कि आपका जुड़ाव पूरी तरह से खत्म हो जाता है। फिल्म की पटकथा कमजोर है, जो अपने कलाकारों के साथ भी न्याय नहीं करती। फिल्म का संगीत भी इसके कमजोर पक्ष में आता है। फिल्म को जो थोड़ा संभालते हैं वो हैं सिद्धांत और शरवरी, रानी और सैफ की जोड़ी।

    देंखे या ना देंखे

    देंखे या ना देंखे

    बंटी और बबली की याद में या उन किरदारों के प्यार में ये फिल्म देखना चाहते हैं, तो निराशा हाथ लग सकती है। फिल्म में ना वो मस्ती है, ना चालाकी, ना स्वैग.. हालांकि चारों कलाकारों का अभिनय अच्छा है। रानी मुखर्जी और सैफ अली खान के फैन हैं तो फिल्म एक बार देख सकते हैं। फिल्मीबीट की ओर से बंटी और बबली 2 को 2.5 स्टार।

    English summary
    Yashraj Films is back with a sequel of it's 2005 hit Bunty aur Babli. Starring Rani Mukerji, Saif Ali Khan, Siddhant Chaturvedi and Sharvari Wagh; Bunty aur Babli 2 fails to do justice with the franchise. The performances are good but story is weak.
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